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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तेंदुए का रेस्क्यू ओपरेशन न हुआ 'सरकस' का खेल हो गया

-स्थानीय लोगों ने ढेले मारे, दिनभर मचाते रहे हुड़दंग

-वन विभाग के अधिकारी मना करते रहे नहीं माने लोग

-पुलिस अधिकारी चुप बैठे रहे, डंडे फटकार कर समझाते दिखे

वन विभाग और लखनऊ जू की टीम को जब पक्का हो गया कि तेंदुआ आशियाना के औरंगाबाग के सरसों के खेत में ही छुपा है तो उन्होंने उसे पकड़ने के लिये अपनी कार्रवाई शुरू की। इस दौरान उनको कई बार वहां इकट्ठा लोगों के हुड़दंग से कार्रवाई करने में दिक्कत आई।

डीएम से मांगी मदद

लोग बिल्कुल संवेदनशील नहीं थे। वे इस कार्रवाई को सरकस का खेल समझ रहे थे। जबकि वन अधिकारी बार-बार लोगों को यह चेता रहे थे कि अगर तेंदुआ अचानक खेत से भागा तो कई लोगों को घायल कर देगा। इसके बावजूद लोग मानने को तैयार नहीं हुए। पुलिस अधिकारी भी सुस्ताते रहे। डीएफओ मनोज सोनकर ने लोगों का हुड़दंग बढ़ते देख जिलाधिकारी को फोन करके पीएसी बल की मांग की। कुछ लोग खेत में ढेला फेंकते तो कुछ दीवार पर खड़े होकर हल्ला करते। कुछ तो खेत में घुसने का प्रयास करने लगते। इसको देखते हुए कई बार वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच नोंक-झोंक भी हुई। जब तेंदुआ खेत से निकलकर कर खाली मैदान में पड़े पाइप लइनों में जा छुपा तो लोग उसके पीछे भागते हुए वहां पहुंच गये। यहां भी उन्होंने खूब हुड़दंग किया। लोग यहां खाली पड़े एक अपार्टमेंट में घुस गये। उसके हर फ्लैट की बालकनी में लोग खड़े हो गये। कुछ तो छत पर खड़े हो गये। लोगों ने समझाया लेकिन वे यहां से नहीं हटे। पुलिस अधिकारी भी भारी संख्या में भीड़ देख उनको केवल लाठी फटकार कर हटाने की औपरचारिकता पूरी करते नजर आये।

पुलिसकर्मी पर भी फेंका मिट्टी का ढेला

रेस्क्यू अभियान के दौरान वहां हुड़दंग कर रहे लोगों ने पुलिसकर्मी पर भी मिट्टी का ढेला फेंका। जिससे नाराज पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों में भिड़ंत भी हुई लेकिन फिर भी लोग मौके से कम नहीं हुए।

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