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सुरों ने कराया महसूस, शास्त्रीय संगीत सुरक्षित हाथों में मौजूद

राष्ट्रीय प्रतियोगिता

तीन दिवसीय ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ इंडिया का आगाज

12 राज्यों के 18 शहरों से आये हैं प्रतिभागी

लखनऊ। निज संवाददाता

शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों से सराबोर तीन दिवसीय क्लासिकल वॉयस ऑफ इंडिया का आगाज गुरुवार से संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में हुआ। राष्ट्रीय स्तर की इस शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता में बाल, किशोर और युवा वर्ग शास्त्रीय गायन की सुन्दरता देखने व सुनने को मिली। प्रतियोगिता का आगाज पर्यटन मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने किया। इस मौके पर शास्त्रीय गायिका स्वतंत्र शर्मा, इसराज वादक कुमार मिश्रा एवं तबला वादक शीतला प्रसाद मिल को शास्त्रीय संगीत में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में बारह राज्यों के शहरों से शीर्ष पर रहे प्रतिभागियों को क्लासिकल वॉयस ऑफ इंडिया में प्रतिभाग करने का मौका मिला है। प्रतिभागियों की प्रतिभा का मूल्यांकन करने के लिए निर्णायक मण्डल में इल्मास हुसैन खान, पंडित शीतला प्रसाद एवं पंडित परिमल चक्रवर्ती शामिल रहे।

तबले की थाप और कर्णप्रिय राग

संगीत मिलन संस्था की ओर से हो रही क्लासिकल वॉयस ऑफ इंडिया प्रतियोगिता में प्रतिभागी कन्हैया ने राग मारू विहाग में ‘शुभ दिन आयो आराध्य श्रीवास्त्व ने पुरिया धनाश्री राग विलम्बित में ‘बलि बलि जाऊं, सुभांशी राय ने छोटा ख्याल ‘पायल बाजे मोरी, वेदिका देशमुख ने ‘मोहे मनावन आए, रिषभ ने ‘रैन अंधेरी गया, मान वगीशा ने ‘अब तो सुन लो विरज में धूम मचाये जैसी रचनाओं को पेश कर बताया कि शास्त्रीय संगीत का भविष्य सुरक्षित हाथों में मौजूद है। इसके अलावा अन्य प्रतिभागियों ने राग बागेश्री, बिहाग, केदार और जोग में प्रस्तुति पेश की। इसके साथ ही रवि गोस्वामी के संचालन में तबला की प्रतियोगिता हुई। जिसमें प्रतिभागियों ने तीन ताल रूपक, झप ताल आदि में उठान, पेशकार, कायदे, टुकड़े, गत तिहाई आदि प्रस्तुत किया। यहां हर्षवर्धन, सौम्यादीप, शिव शंकर, अरिजीत साहा, सुरजीत सिंह, गुरु प्रिया आदि ने तबले की थाप से दर्शकों को अपना प्रशंसक बनाा। ।

स्कॉलरशिप की बनायी योजना

संगीत मिलन की उपाध्यक्ष अरुंधति चौधरी ने कहा की क्लासिकल वॉयस ऑफ इंडिया का प्रमुख मकसद भारत के शास्त्रीय एवं गुरु-शिस्य परम्पराओं को देश के नयीं पीढ़ी में पुनर्जीवित करना है। इस काम को पूरा करने के लिए वे पुरस्कृत नकद राशि को विजेता और उनके गुरु मे आधी-आधी कर बांटते है ताकि विजेताओं के गुरुओं को भी श्रद्धांजलि दी जा सके। संगीत मिलन आने वाले साल से स्कॉलर्शिप की योजना ला रहे है जहां विजेताओं को उनका प्रतियोगिता से जीता हुआ रकम एक बार में ना मिल कर तीन साल के अंतराल में उनकी प्रगति को परखते हुए दिया जाएगा। संगीत मिलन का मुख्य मकसद है शास्त्रीय संगीत की शिक्षा एवं बच्चों में परंपरा और शुद्धता की संरक्षण करना।

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