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चिड़ियाघर के जन्मदिवस पर 'शुतुर्मुग' के जोड़े को मिला नया घर

-अब सर्दियों में मिल सकेगी धूप, कुनबा बढ़ाने में होगा सहायक

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

लखनऊ प्राणि उद्यान के स्थापना दिवस पर बुधवार को शतुरमुर्ग के जोड़े को नया बाड़ा आवंटित कर दिया गया है जो पहले से आठ गुना बड़ा है। मछलीघर के पास पिछले करीब डेढ़ साल से शतुरमुर्ग का भारी भरकम जोड़ा मछलीघर के गेट के पास वे छोटे बाड़े में रह रहा था। जहां भारी भरक म पेड़ों की छांव के चलते सर्दियों में धूप नहीं मिल पाती थी।

नया बाड़ा भी मछलीघर के पास ही है लेकिन पहले पहले से आठ गुना बड़ा और खुला हुआ है। नया बाड़ा लगभग सात से आठ हजार स्कवायर फिट का है। नया बाड़ा कुनबा बढ़ाने के लिये भी सहायक होगा। शतुरमुर्ग को ऐसी जगह चाहिये होती है जहां सूखी मिट्टी रहे और ओट भी रहे।

जंगली बिल्लियां भी देख सकेंगे दर्शक

लखनऊ। दुर्लभ किस्म की जंगली बिल्लियां 'केरकल' भी प्राणि उद्यान में बुधवार से देखी जा सकेंगी। ये दुर्लभ पांच रंग-बिरंगी जंगली बिल्लियां एक-एक कर बाड़ों में उतरने लगी हैं। अभी तक ये प्राणि उद्यान के अस्पताल में थीं। प्राणि उद्यान प्रशासन के मुताबिक अभी एक-एक कर ये आएंगी। धीरे-धीरे बाकी भी आयेंगी। पशु चिकित्सक डा आशीष सिंह ने बताया कि इन बिल्लियों के कान और सिर पर बाल होते हैं। यह बहुत एक्टिव होती हैं। हवा में 10 फुट कूदकर चिड़ियों का शिकार करती हैं। इनके रहने लायक माहौल होने पर यहां इनको एक-एक कर बाड़ों में छोड़ा जायेगा।

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बाड़े में आज भी लोग झांकने में नहीं झिझकते

वन्य जीवों को खिझाना उनके जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है लेकिन इस बात को रोजाना प्राणि उद्यान में आने वाले दर्शक समझ नहीं रहे हैं। कोई हुक्कू बंदर को चिढ़ता है तो कोई बारासिंघा के बाड़े में झांकता दिखता है। बुधवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जानकारों का कहना है कि ऐसा करने से जानवर सहम जाते हैं। चिड़ियाघर प्रशासन ने कुछ प्रयास जरुर किए लेकिन यहां इतने दर्शक पर नजर रख पाना उनके लिये मुश्किल हो रहा है। यहां के अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों को आपका दुलार चाहिए। मानव हृदय में वन्य जीवों के संवेदना होगी तभी हमारे प्रयास भी सफल हो सकेंगे।

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लेकिन ऐतिहासिक छतरियों और गेटों को गोद रहे दर्शक

लखनऊ प्राणि उद्यान में बनी ऐतिहासिक धरोहरों जैसे संगमरमर की छतरियों और गेटों को यहां आने वाले दर्शक गोदकर जा रहे हैं। इसपर उद्यान प्रशासन को कोई ध्यान नहीं जा रहा है। यहां धरोहरें सुरक्षित नहीं है जबकि इनसे यहां के पार्कों की सुंदरता को चार चांद लगते हैं।

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प्राणि उद्यान का उद्देश्य

-वन्य जीव संरक्षण, शिक्षा, अनुसंधान तथा लुप्तप्राय वन्यजीवों का प्रजनन

-आम जनता को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उनकी भागीदारी और कर्तव्यों के प्रति बोध कराना

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अलग होता है इनका आहार

-वन्यजीवों के आहार में विटामिन एवं टॉनिक दिए जाते हैं, जिससे उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा हो सके। समय-समय पर कैलशियम, विटामिन और लीवर टॉनिक दिया जाता है।

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प्राणि उद्यान में दण्डनीय अपराध

-वन्यजीवों को किसी भी प्रकार छेड़ना तथा खाना खिलाना

-फूल तोड़ना तथा वृक्ष और बागीचों को क्षति पहुंचाना

-ऊंची आवाज में बोलना या फिर चिल्लाना

-पॉलीथीन लाना

-आग जलाना और भोजन आदि बनाना

-ट्रांजिस्टर और टेपरिकार्डर लाना

-क्रिकेट, फुटबाल या फिर बैडमिंटन खेलना

-नशीले पदार्थों का सेवन करना

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क्या है प्रावधान

-वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38 के अनुसार प्राणि उद्यान में नियमों का उल्लघंन करने वालों को छह महीने की कैद व 2000 रुपए का जुर्माना, दुबारा नियम का उल्लंघन करने वाले को एक साल की कैद और पांच हजार रुपए का जुर्माना है।

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सर्दी के मौसम में बदल जाता खाने का मैन्यू

सर्दी के मौसम में लखनऊ प्राणि उद्यान के वन्यजीवों के भोजन का मेन्यू बदल जाता है। मांसाहारी पशु-पक्षियों के मीट की मात्रा भी काफी बढ़ा दी जाती है। चौंकिएगा मत! भालू को तो इस मौसम में कभी-कभी जलेबी और चिंपैंजी को मुरब्बा भी गर्माहट बने रहने और स्वाद को बदलने के लिए आहार में दिया जाता है। दरियाई घोड़े को हरे चारे के साथ चोकर में गुड़ मिलाकर दिया जाने लगता है। हिरन को सरसों और मूंगफली की फली और चोकर में चने का स्वाद लेते देखा जा सकता है। पसंदीदा गाजर भी इनको खाने में मिलता है। शेर, चीते और बब्बर शेर प्रत्येक को गर्मी के मौसम में दिया जाने वाला पांच से आठ किलो मीट बढ़कर 10 से 14 किलो हो जाता है। चिंपैंजी का पसंदीदा फ्रूट जूस आहार में बढ़ा दिया जाता है।

आशीष सिंह, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर

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सर्दियों का मेन्यू

वन्यजीव आहार

बंदर उबले अण्डे, सब्जी, फल

भालू गुड़-दूध की खीर, बेसन और जौ के आटे की रोटी, सब्जी, फल

हिरन सरसों की फली, मूँगफली, चोकर में चना मिलाकर, गाजर और हरा चारा

टाइगर, लायन, पैंथर मीट बढ़कर 10-14 किग्रा तक पहुंच जाता है, मीट में मल्टी मिनिरल्स का मिक्सचर भी डलवाया जाता है

दरियाई घोड़ा हरा चारा, चोकर, गुड़, आलू बंधा गोभी

चिड़िया(फिजेन्ट्स) दाना मिक्सचर, कीमा या मछली मैश करके, पानी में मल्टी विटामिन्स

चिंपैंजी फ्रूट जूस, मल्टी विटामिन, ताजा फल, अण्डा और सब्जियां

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