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 इनसे सीखें  : बहराइच में महिलाओं के अरमानों को पंख लगा रहीं नाहिद

विपरीत परस्थितियों में भी खुद पर भरोसा रखने के लिए किसी शायर ने लिखा है - हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा। आज इन्हीं चंद लाइनों को सार्थक कर रही हैं आशा संगिनी नाहिद इम्तियाज़। स्वस्थ समाज के लिए अपनी भूमिका निभाकर वह स्वास्थ्य विभाग को मजबूती प्रदान कर नजीर बनी हुई हैं। उत्कृष्ट कार्य के लिए 23 अगस्त 2018 को शासन की ओर से इन्हें जिले में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।

ग्रामीण परिवेश मे पली-बढ़ी जरवल ब्लॉक के बढ़ौली गांव निवासी नाहिद इम्तियाज़ शुरुआती दिनों में समाज और परिवार के बन्दिशों मे उलझी रहीं। चूल्हा-चौका की ज़िंदगी से बाहर निकलकर कुछ बेहतर करने के जुनून में पारिवारिक रिश्तों में टकराहट की स्थिति उत्पन्न हो गई , पर इन्होंने हार नहीं मानी। एएनएम के समझाने पर पति मान गए| उनका सहारा मिला तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वर्ष 2006 में आशा के रूप में चयनित होकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ गईं। तभी से स्नातक उतीर्ण नाहिद अपनी काबलियत के बल पर न सिर्फ लोगों को सेहत के प्रति सजग रहने का काम कर रही हैं, बल्कि अपने जैसी तमाम महिलाओं को जागरूक कर उनके अरमानों को पंख दे रही हैं।

 उनके इस पहल के बाद आज इनकी रिश्तेदारी में 7 महिलाएं आशा बन कर काम कर रही हैं। जिसमें एक आशा शबा बेगम का कहना है कि नाहिद की पहल से आज हम लोगों को भी अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला।  जरवल की बीसीपीएम सोनी जायसवाल ने बताया नाहिद इम्तियाज़ को इनके बेहतर कार्यों के लिए ब्लाक स्तर पर छह बार प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।

कठिन परिश्रम और बदलते परिवेश से बढ़ा महत्व

पहली बार टीकाकरण सत्र के लिए नाहिद जब घर से बाहर निकली तो कई तरह की बातें सुनने को मिली, लेकिन कठिन परिश्रम और बदलते परिवेश के साथ समुदाय और विभाग में उनका महत्व बढ़ता गया। कल तक जो लोग घर की चौहद्दी में रहने का सबक सिखाते थे, वही आज इनकी उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं। वर्ष 2013 में स्वास्थ्य विभाग ने पदोन्नति कर उन्हें आशा संगिनी के पद की ज़िम्मेदारी सौंपी। नाहिद ने बताया कि संगिनी बनने के बाद 21 आशाओं की ज़िम्मेदारी मिली, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी टीम की 6 आशाएं जो पढ़ने लिखने में बहुत कमजोर थी। जिससे उन्हें अपना रजिस्टर भरने मे मुश्किल होती थी। नाहिद ने नया रास्ता निकाला। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नाहिद आशा के पतियों को भी प्रशिक्षित करती थी जिससे अभिलेख अपडेट किया जा सके। उनके इस प्रयास से 21 आशा क्षेत्र के सभी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बनने लगीं। जिससे जिले के 109 आशा संगिनी में नाहिद इम्तियाज़ संगिनी नंबर वन बन गईं।

स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है आशा और आशा-संगिनी

नाहिद इम्तियाज़ के कार्य से अन्य ब्लाकों की आशा व आशा संगिनी को प्रेरणा लेनी चाहिए। संबन्धित ब्लाक के सामुदायिक प्रक्रिया मैनेजर सोनी जायसवाल भी बधाई की पात्र हैं। अन्य ब्लाकों मे भी शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

 

 जिले में कुल 109 आशा संगिनी हैं | इसमें महुरी कला और कुरसंडा उपकेंद्र मे तैनात आशा संगिनी नाहिद ने वर्ष 2017 – 18 में संस्थागत प्रसव में 95 फीसद , पूर्ण टीकाकरण में 92 फीसद और सम्पूर्ण प्रतिरक्षण में 88 फीसद उपलब्धि हांसिल कर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए इन्हें शासन से पांच हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया गया है।

डॉ सुरेश सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बहराइच

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  • Web Title:Learn from them: Nahid is putting wings to the aspirations of women in Bahraich