सरसों के तेल में लेड की अधिकता को लेकर उठे सवाल
Lucknow News - -एफएसडीए द्वारा कराई गई जांच कई नमूने मिले थे असुरक्षित, मिली लेडप्रदेश के तेल व्यापारियों ने उठाई मिट्टी और पानी की जांच की मांग

-निजी लैब की जांच पर उठाए सवाल कहा, सरकारी लैब में कराई जाए दोबारा जांच
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग लेगा दोबारा जांच पर फैसला
लखनऊ, विशेष संवाददाता।
खाद्य तेलों में लेड की अधिकता मिली है। एफएसडीए ने जांच रिपोर्ट के आधार पर असुरक्षित पाए गए नमूनों के आधार पर संबंधित फर्मों के तेल की बिक्री पर रोक लगा रखी है। मगर तेल व्यापारी इस कार्रवाई से असहमत हैं। उन्होंने सिर्फ कार्रवाई पर सवाल ही नहीं उठाए, तेल में लेड की उपलब्धता के मानक नये सिरे से किए जाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि तिलहन की बुवाई से पहले मिट्टी और जल की जांच कराई जाए। उसमें लेड की उपलब्धता के हिसाब से ही तेल के लिए मानक तय किए जाएं।
तेल व्यापारियों की मांग और नई बहस
तेल व्यापारियों की इस मांग ने नई बहस छेड़ दी है। बड़ा सवाल यह है कि क्या मिट्टी और खेती में प्रयोग किए जाने वाले पानी में लेड की अधिकता है। यदि ऐसा है तो यह खबर सिर्फ रौंगटे खड़े करने वाली ही नहीं, चौकन्ना करने वाली भी है। व्यापारियों ने निजी लैब की जांच रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकारी लैब में जांच की मांग کی है। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने यह मांग एफएसडीए आयुक्त डा. रोशन जैकब से मुलाकात के दौरान उठाई। देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्यापारियों की मांग पर विभाग नमूनों की सरकारी लैब में दोबारा जांच कराएगा।
एफएसडीए का अभियान और व्यापारी
दरअसल, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा फरवरी के अंतिम सप्ताह में खाद्य तेलों की जांच को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाया था। विभिन्न स्थानों से सरसों के तेल, पाम ऑयल सहित अन्य के नमूने लिए गए थे। जांच में कानपुर, लखनऊ, आगरा, गोरखपुर, मेरठ व हापुड़ की 14 फर्मों के तेल में लेड की अधिकता मिली थी। निजी लैब में कराई गई जांच में प्रति किलोग्राम तेल में 0.1 मिलीग्राम लेड की उपलब्धता की पुष्टि की गई थी। इसके बाद एफएसडीए ने इन फर्मों के तेल की बिक्री पर रोक लगा दी थी। खबर है कि इस मामले में व्यापारी अब कोर्ट का रुख कर रहे हैं।
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