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एलडीए में एक महीने में दूसरी बार लगी आग

---इस बार बिल्डिंग के अन्दर जीने के नीचे कूड़े के ढेर में लगी आग, रद्दी कागजों में रखे जाने की अंदेशा, चौकन्ना हुआ एलडीए प्रशासन, उपाध्यक्ष ने जांच का दिया आदेश

लखनऊ। एक महीने के भीतर एलडीए में बुधवार को दूसरी बार आग लग गयी। इस बार आग गोमतीनगर कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग के भूतल पर सीढि़यों के नीचे लगी। यह वही बिल्डिंग है जिसमें प्राधिकरण का रिकार्ड रूम है। इसी की चौथी मंजिल पर अक्तूबर में आग लगी थी। आग की सूचना मिलते ही बिल्डिंग में भगदड़ मच गयी। अधिकारी कर्मचारी बाहर भागने लगे। एलडीए के गार्डों व पुलिय कर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन लोहे का दरवाजा होने से वह घटना स्थल पर नहीं पहुंच पाए। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने दरवाजे के एक हिस्से को काटकर आग बुझाई। इसमें करीब डेढ़ घंटे लग गया।

एलडीए में इससे पहले 13 अक्तूबर को आग लगी थी। उस समय प्राधिकरण की 156 फाइलें जलकर राख हो गयीं थीं। बुधवार को फिर लगी आग ने अफसरों को चौकन्ना कर दिया है। हालांकि इस बार फाइलें तो नहीं जल पायी हैं लेकिन इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जतायी जा रही है। एलडीए के अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की जांच का आदेश दिया है। हालांकि गोमतीनगर के फायर अफसर शान्तनु कुमार यादव ने कहा कि आग बीड़ी व सिगरेट के जलते हुए टुकड़े के फेंकने से लगी है।

आग बुझाने में देरी से बढ़ी

आग बुझाने में देरी होने से यह और फैलने लगी। इसका धुंआ बिल्डिंग की पांचवी व छठीं मजिल से भी निकलने लगा। ऊपर तक धुंआ देख प्राधिकरण के कर्मचारी दहशत में आ गए। जिन लोगों को बिल्डिंग में आग लगने की जानकारी नहीं हो पायी उन्हें कर्मचारियों ने बाद में शोर मचाकर बाहर निकाला। करीब 10 मिनट में ही पूरी बिल्डिंग खाली हो गयी।

एलडीए के गार्ड व कर्मचारी आग बुझाने वाला सिलेण्डर दौड़ रहे थे। लेकिन वह उस जगह नहीं पहुंच पा रहे थे जहां आग लगी थी। क्योंकि अन्दर की तरफ सीढि़यों की तरफ धुंआ भर गया था। बाहर की तरफ लोहे का दरवाजा था। दरवाजे में अन्दर की तरफ से ताला लगा था। फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंच गयीं। अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों न छीनी हथौड़ी से गेट का कुछ हिस्सा गाटा। फिर अन्दर की कुण्डी काटी। इसके बाद आग बुझायी जा सकी। अन्दर रखी कुर्सी, गत्ते सहित तमाम चीजें जली हुई थीं। किसी फाइल वगैरह के जलने का कोई साक्ष्य नहीं था।

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कहीं कोई बड़ी साजिश तो नहीं हो रही है

महीने भर में दूसरी घटना से प्राधिकरण में तरह तरह की चर्चा हो हरी है। इन दो घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो पिछले 10 से 12 वर्षों के बीच यहां कभी आग नहीं लगी। इससे लोग इसके पीछे पीछे कोई साजिश बता रहे हैं। क्योंकि इसी बिल्डिंग में चौथी मंजिल पर प्राधिकरण का रिकार्ड रूम है। इसी में फाइलें रखी हैं। 13 अक्तूबर की रात इसी में आग लगी थी।

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फिर फेल दिखी आग से निपटने की एलडीए की तैयारी

आग से निपटने की एलडीए की तैयारियां फिर फेल दिखीं। आग लगने के बाद एलडीए के कर्मचारी व गार्ड केवल अग्निशमन का सिलेण्डर लेकर दौड़ रहे थे। बिना फायर ब्रिगेड के आए वह कुछ भी नहीं कर पाए। कर्मचारी अधिकारी केवल दौड़ रहे थे।

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फिर सभी उपकरण फेल मिले

एलडीए के आग रोकने के सभी उपकरण फिर फेल मिले। बिल्डिंग में लगा एक भी स्मोक डिटेक्टर ठीक नहीं था। भूतल से छठीं मंजिल तक धुंआ फैलने के बावजूद एक भी स्मोक डिटेक्टर से सायरन की आवाज नहीं आयी। इसी तरह पानी के लिए पूरी बिल्डिंग में जो लाइनें बिछायी गयी थीं उनमें भी किसी में पानी नहीं था। इससे इंजीनियरों की लापरवाही का अन्दाजा लगाया जा सकता है। अगर दिन नहीं होता तो फिर यह आग और बड़ा रूप ले सकती थी।

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हमने आग लगने की दशा में किसको क्या करना इसकी जिम्मेदारियां तय कर रही हैं। एक सप्ताह पहले ही मिटिंग कर सबकी अलग अलग जिम्मेदारी तय की थी। फिर भी आग लगने के बाद बुझाने में इतना समय लगा। मामले में पूरी रिपोर्ट मांगी गयी है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। फिलहाल किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

जयशंकर दुबे, सचिव, एलडीए

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