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15 जुलाई, 2020|12:31|IST

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लवीश हत्याकाण्ड : गवाह के बाद आरोपी की भी मौत, प्रॉपर्टी डीलर पर मेहरबान पुलिस

लखनऊ के मोहनलालगंज में बागपत निवासी लवीश चौधरी उर्फ जॉनी की सिर काटकर की गई हत्या की रंजिश में मुजफ्फरनगर में हुई गैंगवार में घायल आरोपी सौरभ की भी मौत हो गई। इस गैंगवार में लवीश के फुफेरे भाई प्रशांत की पहले ही मौत हो गई थी। प्रकरण में तीन हत्याओं के बाद भी लखनऊ पुलिस के कान पर जूं नहीं रेंगा। घटना के मुख्य किरदार लवीश, अनिल और सौरभ गोमतीनगर में प्रॉपर्टी डीलर प्रदीप चौधरी के फ्लैट में ठिकाना बनाए थे। जांच में इन तीनों का आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद भी पुलिस ने प्रदीप चौधरी पर शिकंजा नहीं कसा। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली संदेह के घेरे में आ गई है। 

16 मई की रात को मोहनलालगंज के खुजौली में प्रदीप चौधरी के फार्म हाउस पर बागपत के छपरौली निवासी लवीश की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बागपत निवासी अनिल उर्फ धनपत और मुजफ्फरनगर निवासी सौरभ उर्फ गोटी का नाम सामने आया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। बाद में लवीश के फुफेर भाई प्रशांत ने भी इन्हीं दोनों के खिलाफ गवाही दी थी। मामले में फरार चल रहे अनिल और सौरभ को मोहनलालगंज पुलिस सरगर्मी से ढूंढने का दावा कर रही थी। वहीं, दोनों आरोपी पुलिस के दावों को खोखला बताते हुए अपने गृह जनपद मुजफ्फरनगर में शरण लिए हुए थे। वहां बुढ़ाना थानाक्षेत्र के मिडकाली जंगल में शुक्रवार देर रात दोनों पक्षों में गैंगवार हो गई, जिसमें प्रशांत की मौत हो गई थी। घटनास्थल पर घायल मिले सौरभ को आगरा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। 

जेल में हुई थी चारों की मुलाकात 
सीओ बुढ़ाना गिरजाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि सौरभ ने मरने से पहले बयान दिया था। इसके मुताबिक लवीश और उसका फुफेरा भाई प्रशांत कुछ समय पहले जानलेवा हमले के मामले में जेल गए थे। जेल में उनकी मुलाकात सौरभ और अनिल से हुई और चारों दोस्त बन गए। जेल से छूटने के बाद भी चारों एक-दूसरे के संपर्क में बने रहे। इस बीच अनिल और सौरभ लखनऊ आकर प्रॉपर्टी डीलर प्रदीप चौधरी के लिए काम करने लगे। लवीश भी इनके पास आया था, जहां विवाद के दौरान अनिल और सौरभ ने उसकी हत्या कर दी। प्रशांत ने लवीश की हत्या का बदला लेने की ठानी, जिससे गैंगवार की पृष्ठभूमि तैयार हो गई। 

आरोपियों का पुलिस एनकाउंटर कराना चाहता था प्रशांत 
पुलिस के मुताबिक लखनऊ से लौटने के बाद प्रशांत ने लवीश के शव का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद अस्थियां विसर्जित करने हरिद्वार चला गया। वहां उसने लवीश के कातिलों से बदला लेने की कसम खाई। सूत्रों की मानें तो प्रशांत  भाई के हत्यारोपियों को पुलिस एनकाउंटर में मरवाना चाहता था। लेकिन, बात न बनने पर उसने अपने साथियों को सौरभ और अनिल की तलाश में लगा दिया। जानकारी मिलने पर उसने शुक्रवार रात दोनों को फैसले के लिए बुलाया। वहां पहुंचे सौरभ और अनिल को हमले की भनक लग गई और दोनों प्रशांत को गोली मारकर भागे। इस बीच प्रशांत पक्ष के लोगों ने फायरिंग की जिसमें सौरभ मरणासन्न हो गया। पुलिस अब अनिल की तलाश कर रही है। 

प्रॉपर्टी डीलर की बोली बोलती रही पुलिस 
अनिल और सौरभ के खिलाफ मुजफ्फरनगर और बागपत में हत्या, जानलेवा हमले और रंगदारी के दर्जन भर मामले दर्ज हैं। दोनों शार्प शूटर थे। इसके बावजूद प्रॉपर्टी डीलर प्रदीप चौधरी ने न सिर्फ दोनों को काम पर रखा बल्कि अपने फ्लैट में रहने की जगह भी दी। इस सम्बंध में मोहनलालगंज पुलिस ने प्रदीप चौधरी से अब तक कोई पूछताछ नहीं की। लवीश की हत्या के बाद शिनाख्त होने पर प्रदीप ने जो कहानी बताई, पुलिस उसे ही रटते नजर आई।
 

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  • Web Title:Lavish murder case: Accused also dies after witness Police is kind to property dealer