बोले लखनऊ: आलमबाग में जर्जर खंभों पर लटक रहे तारों का मकड़जाल, दहशत में लोग
Lucknow News - लखनऊ के आलमबाग पंजाबी कॉलोनी में बिजली के खंभों पर लटके हुए इंटरनेट केबलों का मकड़जाल स्थानीय निवासियों के लिए जानलेवा बन गया है। बारिश के समय करंट फैलने का खतरा है और लोग अपनी बालकनी में जाने से डरते हैं। स्थानीय लोग इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

बोले लखनऊ: आलमबाग में जर्जर खंभों पर लटक रहे तारों का मकड़जाल, दहशत में लोग फोटो भी प्रस्तुति: सुमित गुप्ता, संजीव पांडेय, फोटो: रितेश यादव कॉमन इंट्रो राजधानी के आलमबाग पंजाबी कॉलोनी में बिजली के खंभों पर फैला इंटरनेट केबलों का मकड़जाल स्थानीय निवासियों के लिए ‘मौत की फांस’ बन गया है। घरों की बालकनी और छज्जों से सटकर गुजरते ये तार हर पल बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। आलम यह है कि लोग अपनी ही बालकनी में जाने या खिड़की खोलने से भी डरते हैं। खुले एलटी फ्यूज बॉक्स और लटकते तारों के कारण बारिश में करंट फैलने का खतरा दोगुना हो जाता है।
जन प्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों तक गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन मौन है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने ‘बोले लखनऊ’ अभियान के तहत क्षेत्र की समस्याओं की पड़ताल की, तो स्थानीय लोगों का दर्द छलक पड़ा। पेश है रिपोर्ट- लखनऊ, हिन्दुस्तान टीम। आलमबाग के नटखेड़ा रोड मार्केट स्थित पंजाबी कॉलोनी में बिजली के खंभों पर इंटरनेट और निजी टीवी केबलों का ऐसा मकड़जाल फैल गया है कि अब यह स्थानीय निवासियों के लिए ‘फांस’ बनता जा रहा है। लगभग 75 साल पुरानी कॉलोनी में बिजली के तारों के बीच उलझे ये काले केबल न केवल कॉलोनी की सुंदरता बिगाड़ रहे हैं, बल्कि किसी भी समय एक बड़ी अग्नि दुर्घटना या शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकते हैं। इलाके की स्थिति इतनी भयावह है कि इंटरनेट के ये मोटे केबल लोगों के घरों की बालकनी, छज्जों और खिड़कियों से सटकर गुजर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपनी बालकनी में खड़े होने या खिड़की से हाथ बाहर निकालने में भी कतराते हैं, क्योंकि बिजली के हाई-वोल्टेज तारों और इन केबलों के आपस में टकराने से कभी भी करंट उतर सकता है। कई स्थानों पर तो केबलों का वजन इतना अधिक हो गया है कि बिजली के खंभे एक ओर झुकने लगे हैं। इसके अलावा कॉलोनीवासियों के लिए अपने घर की बालकनी में खड़े होना या खुली छत पर सांस लेना किसी जानलेवा जोखिम से कम नहीं है। यहां घरों की बालकनी और छज्जों से सटकर गुजर रही हाईटेंशन लाइनें स्थानीय लोगों के लिए मौत का जाल बन चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने समस्या के समाधान के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर एसडीओ और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तक, हर संभव दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। बारिश के दौरान यहां के परिवारों के लिए किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं होती। हल्की सी बूंदाबांदी होते ही तारों से उठती चिंगारियां और उनकी तेज आवाज लोगों को घरों के भीतर कैद होने पर मजबूर कर देती है। ‘हिन्दुस्तान’ की टीम ने जब इस इलाके का दौरा किया, तो लोगों का गुस्सा और डर फूट पड़ा। स्थानीय निवासी तजिन्दर कौर, हरविंदर सिंह, बिपिन बरमानी ने बताया कि कई घरों की बालकनी में लोहे के एंगल लगाकर निकाली गई इन लाइनों ने न केवल उनका चैन छीन लिया है, बल्कि पूरे जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। बिजली विभाग के अधिकारियों का तर्क अक्सर यह होता है कि लाइनें पहले से मौजूद थीं और निर्माण बाद में हुआ, जबकि स्थानीय निवासी मंजू, गुड़िया, विनय गुप्ता, उजागर सिंह ने दावा किया कि कॉलोनी के नक्शे और बसावट के समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। दहशत के साये में दिन काट रहे इन लोगों की अब केवल एक ही मांग है। इन मौत के तारों को रिहायशी इलाके से दूर शिफ्ट कर उन्हें सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया जाए। ---------------- अंडरग्राउंड केबलिंग के बाद भी करंट के साये में लोग आलमबाग में बिजली व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर अंडरग्राउंड केबलिंग तो की गई, लेकिन विभागीय लापरवाही ने इसे और अधिक खतरनाक बना दिया है। आलमबाग और आसपास के कई रिहायशी इलाकों में जमीन पर लगे एलटी फ्यूज डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स खुले पड़े हैं, जो सीधे तौर पर मौत को दावत दे रहे हैं। मुख्य सड़क और गलियों में घरों के ठीक बाहर लगे इन बॉक्सों के दरवाजे या तो गायब हैं या टूट चुके हैं। इनके भीतर बिजली के नंगे तार और फ्यूज पैनल स्पष्ट देखे जा सकते हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ये बॉक्स अक्सर बच्चों की पहुंच में होते हैं, जिससे हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है। स्थानीय निवासी नरेंद्र पाल सिंह, हरजीत सिंह, सर्वजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, देवेन्द्र सिंह, त्रिलोचन सिंह और मनोज ने बताया कि बिजली विभाग के कर्मचारी काम करने के बाद बॉक्स को खुला ही छोड़ देते हैं, जिससे पशुओं और राहगीरों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इन खुले बॉक्सों को तत्काल बंद नहीं किया गया और इनकी मरम्मत नहीं हुई, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। विभाग की यह सुस्ती किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगी, ऐसा प्रतीत होता है। ---------------- बिना सीमेंटेड घेरे के खड़े कर दिए बिजली खंभे पंजाबी कॉलोनी में लेसा और ठेकेदारों की एक और गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुदृढ़ करने के लिए नए खंभे तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उनके आधार को मजबूती देने के लिए आवश्यक सीमेंटेड घेरा नहीं बनाया गया है। बिना कंक्रीट सपोर्ट के मिट्टी के सहारे खड़े ये भारी-भरकम खंभे अब स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। नटखेड़ा रोड युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष अरोड़ा ने बताया कि खंभा लगाने के बाद उसके चारों ओर जमीन की सतह पर सीमेंट, बालू और कंक्रीट का एक मजबूत घेरा बनाया जाना अनिवार्य है। यह न केवल खंभे को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि बारिश के पानी को खंभे की जड़ तक जाने से रोककर उसे मिट्टी छोड़ने या धंसने से भी बचाता है। वर्तमान में ये खंभे सिर्फ मिट्टी से दबे हुए हैं, जिससे तेज हवा या भारी बारिश के दौरान इनके झुकने या गिरने की प्रबल आशंका बनी हुई है। स्थानीय निवासी रीना, रितु दुआ, ममता विज, सरोज पांडेय, अखिलेश पांडेय ने बताया कि केबलों के भारी बोझ के कारण खंभे पहले से ही असुरक्षित हैं, ऊपर से आधार कमजोर होना खतरे को दोगुना कर रहा है। घनी आबादी और संकरी गलियों में यदि कोई खंभा गिरता है, तो भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि ठेकेदार के इस अधूरे काम की जांच हो और जल्द से जल्द खंभों के आधार को सीमेंट से पक्का कर सुरक्षित किया जाए। ---------------- रात में बिजली गुल तो नहीं उठता फोन पंजाबी कॉलोनी के लोगों ने आरोप लगाया कि रात के समय शॉर्ट-सर्किट या फॉल्ट होने पर उपकेंद्र का फोन नहीं उठता, जिससे किसी बड़े हादसे की स्थिति में मदद मिलना असंभव हो जाता है। वर्टिकल सिस्टम के तहत जब लोग जूनियर इंजीनियर, एसडीओ या अधिशासी अभियंता से संपर्क करते हैं, तो वे टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत करने की सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। विडंबना यह है कि 1912 पर कॉल जल्दी कनेक्ट नहीं होती और स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं होती। मजबूरी में उपभोक्ताओं को रात के अंधेरे में खुद उपकेंद्र जाकर कर्मचारियों को बुलाना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में घंटों का समय बर्बाद होता है और क्षेत्र की बिजली सप्लाई लंबे समय तक ठप रहती है। ---------------- प्रमुख समस्या - बिजली के खंभों पर इंटरनेट केबल का मकड़जाल - अंडरग्राउंड केबल के एलटी फ्यूज बॉक्स खुले हैं - कॉलोनी में कई जगह बिजली के खंभे झुके हुए है - घर के छज्जों के नजदीक से गुजर रहे बिजली तार प्रमुख सुझाव - बिजली खंभों से बेकार इंटरनेट केबल हटाए जाएं - अंडरग्राउंड केबल के एलटी फ्यूज बॉक्स बंद किए जाएं - बिजली के झुके खंभों को बदला जाए -------------------- इंफो- आलमबाग - लेसा में 04 बिजली जोन हैं - अमौसी जोन के आलमबाग का मामला - कॉलोनी करीब 75 साल पुरानी है - कॉलोनी में करीब 50 घर है -------------------- विद्युत उपभोक्ता परिषद का रुख बिजली के जर्जर खंभों को तत्काल बदला जाना सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है। खंभों पर फैला इंटरनेट केबलों का अनियंत्रित मकड़जाल न केवल तकनीकी फॉल्ट का कारण है, बल्कि यह बड़ी दुर्घटनाओं को भी खुला निमंत्रण दे रहा है। लेसा प्रबंधन को चाहिए कि वे संबंधित निजी कंपनियों को सख्त नोटिस जारी कर अनावश्यक तारों को तुरंत हटाने का निर्देश दें, ताकि शॉर्ट-सर्किट की घटनाओं पर अंकुश लग सके और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो। अवधेश कुमार वर्मा अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व्यापार संगठन की पीड़ा जर्जर खंभों और तारों के मकड़जाल के कारण व्यापारी वर्ग और स्थानीय निवासी आए दिन होने वाले शॉर्ट-सर्किट और घंटों की बिजली कटौती से त्रस्त हैं। वर्टिकल सिस्टम लागू होने के बाद जवाबदेही खत्म सी हो गई है, जूनियर इंजीनियर और एसडीओ सीधे तौर पर मदद करने के बजाय 1912 पर कॉल करने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। विडंबना यह है कि टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल जल्दी लगती नहीं, जिससे उपभोक्ता खुद को असहाय महसूस करता है। मनीष अरोड़ा अध्यक्ष, नटखेड़ा रोड युवा व्यापार मंडल विभागीय पक्ष बिजली के खंभों पर अवैध रूप से फैले इंटरनेट केबलों को हटाने के लिए संबंधित कंपनियों को अंतिम चेतावनी के साथ पत्र जारी किया जा रहा है। क्षेत्र में जितने भी जर्जर खंभे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जाएगा। नए खंभों के आधार को सीमेंटेड घेरे (ग्राउटिंग) से मजबूत करने और खुले पड़े एलटी फ्यूज बॉक्सों को तत्काल बंद करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दे दिए गए हैं। जन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। महफूज आलम मुख्य अभियंता, अमौसी जोन ---------------- लोगों से बातचीत-- बालकनी में जाना अब जान जोखिम में डालने जैसा है। खिड़की खोलते ही हाईटेंशन लाइन सामने दिखती है। डर लगता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। तजिन्दर कौर बारिश के समय तारों से उठती चिंगारियां और तेज आवाजें रूह कंपा देती हैं। लेसा अधिकारी हमारी शिकायतों को नजरअंदाज कर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। हरविंदर सिंह नए खंभों को बिना सीमेंटेड घेरे के सिर्फ मिट्टी के सहारे खड़ा करना ठेकेदार की बड़ी लापरवाही है। तेज हवा चलने पर ये खंभे कभी भी गिर सकते हैं। विपिन बरमानी करोड़ों खर्च कर अंडरग्राउंड केबलिंग तो हुई, लेकिन खुले फ्यूज बॉक्स ने खतरा कम करने के बजाय बढ़ा दिया है। नंगे तार सड़क पर मौत बनकर झूल रहे हैं। मनोज केबलों के भारी बोझ से खंभे एक तरफ झुकने लगे हैं। ऊपर से इनका आधार मजबूत नहीं किया गया। हम हर पल दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। रीना इंटरनेट केबलों का मकड़जाल इतना घना है कि बिजली के तार दिखाई भी नहीं देते। शॉर्ट सर्किट होने पर पूरे मोहल्ले में आग फैलने का गंभीर खतरा बना रहता है। रितु खुले डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। गलियों में खेलते वक्त किसी का भी हाथ इन नंगे तारों से छू सकता है। यह घोर लापरवाही है। ममता विज हमने जेई से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, पर नतीजा शून्य रहा। सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, धरातल पर तारों का जाल कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। सरोज पांडेय बिजली खंभों की ग्राउन्डिंग न होने से गीले मौसम में करंट फैलने का डर रहता है। लोहे के एंगल घरों से सटाकर निकाल दिए गए हैं, जो पूरी तरह अवैध है। अखिलेश पांडेय बिजली विभाग कहता है कि मकान बाद में बने, जबकि सच्चाई यह है कि सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर घनी आबादी के बीच से लाइनें खींच दी गईं। मंजू इंटरनेट कंपनियों ने बिजली के खंभों को अपना अड्डा बना लिया है। तारों के गुच्छे छज्जों को छू रहे हैं। बिजली विभाग इन कंपनियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता? गुड़ियां रात के समय बिजली तारों में शॉर्ट सर्किट की आवाज सुनकर नींद उड़ जाती है। अंडरग्राउंड केबलिंग के नाम पर खानापूर्ति हुई है, क्योंकि सुरक्षा के कोई इंतजाम सड़क पर नजर नहीं आते। विनय गुप्ता बालकनी में कपड़े सुखाना तक मुमकिन नहीं है। लोहे की रेलिंग में कब करंट उतर आए, कुछ कहा नहीं जा सकता। पूरा परिवार हर वक्त तनाव में रहता है। उजागर सिंह यदि जल्द ही इन तारों को रिहायशी इलाके से दूर शिफ्ट नहीं किया गया और खंभों को पक्का नहीं किया गया, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। नरेन्द्र पाल सिंह विभागीय कर्मचारी काम अधूरा छोड़कर चले जाते हैं। फ्यूज बॉक्स के दरवाजे टूटे पड़े हैं। आवारा पशु और राहगीर अक्सर इन बॉक्सों की चपेट में आकर चोटिल होते हैं। हरजीत सिंह
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