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पं. लच्छू महाराज

घुंघरुओं की झनकार संग कथकाचार्य को नृत्यांजलि

-पं. लच्छू महाराज की स्मृति में ‘नृत्यपरम्परा‘ का आयोजन

-दिल्ली के सुप्रसिद्ध नर्तक पं. राममोहन महाराज ने दी विशेष प्रस्तुति

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

लखनऊ घराने के वरिष्ठ कथक गुरु पं. लच्छू महाराज की स्मृति में सोमवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में 'नृत्य परम्परा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पं. लच्छू महाराज की वरिष्ठ शिष्या व लखनऊ घराने की प्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ. कुमकुम धर ने अपने गुरु को श्रद्धा अर्पित करने के उद्देश्य से कथक की यह महफिल सजाई थी। खेल मंत्री चेतन चौहान यहां मुख्य अतिथि थे और भातखंडे संगीत संस्थान की कुलपति प्रो. श्रुति सडोलीकर व उप्र संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा पांडेय विशिष्ट अतिथि थीं। शाम के मुख्य कलाकार दिल्ली के पं. राममोहन महाराज थे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ नवोदित कलाकार शिवांगी, कूहू , अनन्या, पाशर्वी, संस्कृति और अभिषेक ने मंगलचरण से किया। इन कलाकारों ने राम स्तुति व शुद्ध नृत्य की बंदिशें प्रस्तुत की। मंगलाचरण के बाद नृत्य नाटिका 'पंचतत्व' की प्रस्तुति डॉ. कुमकुम धर की वरिष्ठ शिष्याओं ने दी। इसमें यह दिखाने का प्रयास किया गया कि सृष्टि की रचना ईश्वरीय लीला है और पंचमहाभूत ही इस लीला के संवाहक हैं। दीपमाला सचान, अदिति थपलियाल, अमीषा तिवारी, रोशनी, प्रेरणा राणा व रंजना शर्मा ने यह प्रस्तुति दी। बड़ोदरा से आईं डॉ. कुमकुम धर की वरिष्ठ शिष्या डॉ. रुक्मिणी जायसवाल ने शायर राशिद की गजल पर सुंदर भाव अभिनय प्रस्तुत किया। इसके बाद चार अंगों से बनी रचना 'चतुरंग' भी प्रस्तुत की। शाम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में दिल्ली से आए सुप्रसिद्ध नर्तक पं. राममोहन महाराज का कथक था। उन्होंने 'तिलकभाल पीताम्बर सोहे...' संरचना से शुरुआत की। इसके बाद शुद्ध नृत्य के अंतर्गत उपज, टुकड़े, परन, गतनिकास, गतभाव आदि की प्रस्तुति दी। अंत में उन्होंने पं. बिन्दादीन महाराज द्वारा रचित ठुमरी 'हटो छेड़ो न कन्हाई काहे को रार मचाई...' पर दर्शकों का मनमोह लिया।

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