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नाना साहब देशमुख के जयप्रभाग्राम का जानिए इतिहास, ऐसे पड़ी नींव

ग्राम स्वराज और एकात्म मानव दर्शन के शिल्पकार नानाजी देशमुख को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से गुरुवार को शाम राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जा रहा है। नाना जी देशमुख को भारत रत्न...

नाना साहब देशमुख के जयप्रभाग्राम का जानिए इतिहास, ऐसे पड़ी नींव
कमर अब्बास अरविंद शुक्ला ,गोण्डा। Thu, 08 Aug 2019 11:27 AM
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ग्राम स्वराज और एकात्म मानव दर्शन के शिल्पकार नानाजी देशमुख को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से गुरुवार को शाम राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जा रहा है। नाना जी देशमुख को भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने पर गोण्डा व बलरामपुर मुदित है। नानाजी के कर्मस्थली के रूप में ग्रामोदय प्रकल्प जयप्रभाग्राम मंडल में ही नहीं पूरे प्रदेश में अपनी खुशबू बिखेर रहा है। 

देवीपाटन मंडल मुख्यालय से 27 किमी दूर गोण्डा-बलरामपुर मार्ग पर राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख का आंगन दीनदयाल शोध संस्थान जयप्रभाग्राम शिक्षा, स्वास्थ्य,स्वावलंबन और सदाचार की महक से महकता है। ग्राम स्वराज को जमीन पर उतारने वाले नानाजी की इस बगिया में जन प्रेरणा का अद्भुत संगम है।

मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं : मुख्य द्वार पर नानानजी का जीवन सूत्र वाक्य मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं, अपने वे हैं जो पीड़ित और उपेक्षित है लोगों को प्रेरणा देता है। दीनदयाल शोध संस्थान जयप्रभा के नाम से स्थापित प्रकल्प में नाना जी की कुटिया, अरविंद कुटी,चिन्मय कुटी, पोषक वाटिका व मानस झील के दर्शन के साथ नौका विहार भी होता है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण व उनकी पत्नी प्रभावती की स्मारिका मंदिर के अलावा सामाजिक समरसता का प्रतीक भक्ति धाम चारों धाम के दर्शन होते हैं।

ऐसे रखी गई जयप्रभा ग्राम की नींव: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कड़ोली गांव के अमृतराव देशमुख व उनकी पत्नी राजाबाई के घर 5 वीं संतान के रूप में 11 अक्टूबर 1916 नानाजी देशमुख ने जन्म लिया।आस पास कोई विद्यालय व होने के कारण नाना जी को 11 वर्ष की आयु तक अक्षर ज्ञान नहीं हुआ। क्षर ज्ञान के लिए उन्हें रिसोड़ नामक जगह पर जाना पड़ा। 1937 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद नानाजी संघ के डॉ हेडगेवार के अलावा बाबासाहेब आप्टे से बेहद प्रभावित हुए।संघ के कार्यों में लग गए। दम विभूषण व अन्य कई सम्मान पा चुके नानाजी का जीवन काफी सादगी भरा रहा। 25 वर्षों की राजनैतिक सेवा के बाद 60 वर्ष की आयु में 8 अप्रैल 1978 को उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।


25 नवम्बर 1978 को हुई जयप्रभा की स्थापना : 25 नवंबर 1978 को जयप्रभाग्राम प्रकल्प की स्थापना हुई। बलरामपुर संसदीय सीट से 1977 में राजमाता बलरामपुर को चुनाव हराकर नानाजी देशमुख लोकसभा के लिए चुने गए। चुनाव हारने के बाद जानकी नगर ग्राम पंचायत के करीब 50 एकड़ जमीन को राजमाता ने नाना जी को दान के रूप में दे दी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के दर्शन को व्यवहारिक धरातल पर उतारने के लिए नानाजी देशमुख ने सामाजिक-आर्थिक पुनर्रचना की प्रयोगशाला के तौर पर दीनदयाल शोध संस्थान जयप्रभा ग्राम की स्थापना की।

हर हाथ को काम और हर खेत को पानी देने की पीड़ा उठाकर नाना जी ने 25 नवंबर 1978 में ग्राम उत्थान के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी से कई परियोजनाओं को संचालित कराया। 25 हजार से अधिक बास बोरिंग करा कर किसानों को खुशहाल बनाया।

पांच सौ गांवों में आया बदलाव: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सदाचार के आधार पर संस्थान ने गोण्डा-बलरामपुर के पांच सौ गांवों में बदलाव ला दिया। अब तक करीब 60 हजार से अधिक युवक युवतियों को संस्थान ने विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर  स्वावलंबी बनाया।साथ ही थारू जनजाति के 10 हजार से अधिक बच्चों  को शिक्षित किया गया।तीन सौ से अधिक महिलाओं के समूह का गठन कर उन्हें स्ववालम्बी बनाया गया।

फैली है शाखाएं :मंडल में ही नहीं नानाजी की शाखाएं कई प्रदेशों में अपनी अलख जगा रहीं है। संस्थान की शाखाएं मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र के बीड़, नागपुर,दिल्ली और चित्रकूट तक फैली है।
कैसे नाम पड़ा जयप्रभाग्राम:लोकनायक जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभावती ने समग्र क्रांति के नाम से कार्य प्रारंभ किया। इनके कार्यों से नाना जी काफी प्रभावित हुए। दोनों प्रख्यात समाज सेवी दम्पति के नाम के पहले अक्षर से जय प्रभा ग्राम की स्थापना की। 

बांस की कुटी में रहते थे नानाजी: जयप्रभाग्राम के मानस झील के सामने नानाजी देशमुख बांस की कुटी बना कर रहे।सादगी भरी इस जीवन में नानाजी केवल लोगों के लिए  आर्थिक र्निर्भरता व सामाजिक पुनर्रचना में ही लगे रहे। उन्होंने मृत्यु से पहले अपने शरीर को एम्स में दान देने की बात कही थी। नानाजी देशमुख ने 27 फरवरी 2010 को अंतिम सांस ली।

नानाजी खुद ही एक रत्न थे: सचिव राम कृष्ण तिवारी नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत रत्न के सम्मानित किये जाने पर काफी गदगद है। कहा नानाजी अपने आप में खुद एक रत्न है। उन्होंने कहा कि गुरूवार देश के लिए गौरव का दिवस है।

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