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मकर संक्राति पर अवध की सरजमी में दिखेंगे परंपरा के रंग

- शहर एक ,त्यौहार एक लेकिन मनाने के तरीके हैं अनेक लखनऊ। निज संवाददातात्येहारों के रंगों से साल भर रंगे रहने वाले देश में एक ही छत के नीचे कई रंग देखने को मिलते हैं। पुरानी कहावत के अनुसार खिचड़ी के चार यार घी, मूली, चटनी अचार तक मकर संक्राति सीमित नहीं है इस दिन अलग-अलग समुदायों में इसको अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। कहीं मिट्टी की हांडी में परंपरिक बरसों पुराना खिचड़ी का स्वाद...कहीं स्नान संग दान, घेवर की महक और जलेबी का स्वाद, पकौडियों की महक तो केले के पत्ते पर बिखरते परंपरिक त्यौहार के स्वाद...राजधानी में आज जहां युवा और बच्चों में पतंबाजी और पेच लड़ाए जाएंगे तो वहीं पुरानी रीति से बुजुर्ग पूजापाठ करते नजर आएंगे। राजधानी में तेजी से बदलाव जहां साल दर साल हो रहे हैं वहीं इन सब में एक चीज कॉमन है वो है देश के कोने-कोने से आए समाज के लोग। जो पर्व के विशेष दिन को अनेकता में एकता दिखाकर सालों साल से हर्षोल्लास संग मनाते आ रहे हैं। देश के अलग कोने से दिल में अपनी रीति-रिवाजों को बसाए लोग आज अपने समाज के तरीके से मकर संक्राति मनाएंगे। इस विशेष पर्व पर जहां प्रयागराज में पहला शाही स्नान आरंभ होगा वहीं इस त्योहार से पौराणिक बातें भी जुड़ी है। पेश है हिंदुस्तान की एक खास रिपोर्ट खास पर्व मकर संक्राति पर।-सिंधी समाजमकर संक्रति का पर्व सिंधी समाज में तरमूरी के नाम से जाना जाता है। सिंधी समाज के लोग संक्राति की पूर्व संध्या पर सामूहिक रूप से रात में अलाव जलाकर माता लाललोई की पूजा करते हैं मकर संक्रति पर तिल के लड्डू और तिल की पट्टी बनाते हैं। मूली मंगवाते हैं मीठे चावल बनाते हैं पालक का साग बनाकर मिठाई पहले गाय को अर्पित कर फिर कन्या को भोग लगाते हैं इसके बाद घर के परिवारीजन प्रसाद की तरह चख उसे पूरा दिन खाते हैं। -सुशील तेजवानी, आलमबागपर्वतीय समाज कुमाऊनी समाज से आते हैं उन्होंने बताया कि इस त्यौहार को कुमाऊनी समाज में घुघुतिया कहते हैं इसलिए मकर संक्रति के दिन पकने वाले भोजन को घुघुती कह के बोला जाता है। सूरज निकलने पर सबसे पहले स्नान कर मंदिरों में जाकर माथा झुकाते हैं। सर्वाधिक लोग बाग मंदिरों में बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाकर पूजा को संपन्न करते हैं। उन्होने बताया कि इस दिन हमारे समाज के बच्चे पकवानों को सुबह सवेरे ही ऊंचे स्थान पर रख देते हैं और कौओं को बुलाकर उनको खाना खिलाया जाता है। इस दिन घर की महिलाएं आटे और गुड की मीठ्ठी कतली बनाती है जिसको घुघुरी कहते हैं इसके संग मालपुआ और बरा भी बनाया जाता है। -राकेश लेखक, बालागंजबंगाली समाजखजूर के गुड की खीर है विशेषमकर संक्रति का पर्व हर साल उत्साह संग मनाते हैं सुबह स्नान कर मां दुर्गा की पूजा करने से दिन की शुरूआत होती है जिसके बाद नारियल तिल के लड्डू को तैयार करते हैं। कुछ लोग सुबह उठकर नदी में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दिन तील के लड्डू, मीठा चावल, आटे के लड्डू खजुर गुड की खीर को बनाते हैं।आरएन बोस नजरबागराजस्थानी संक्रतिपूरे परिवार संग छत पर उड़ाते हैं पतंगमकर संक्रति का त्योहार खुशियों का त्योहार है इस दिन छत पर पतंग उड़ाने का रिवाज है राजस्थान में इस दिन हर एक घर की छत पर लोग पतंगबाजी करते नजर आएंगे। राजस्थानी दुल्हनों का खूबसूरत रिश्ता इस त्योहार संग जुड़ा है हर साल कि तरह मैं इस बार भी अपने मायके राजस्थान जाउंगी जहां भाई बहन और भाभियों संग पेच लड़ाउगी। मेरी बेटी की भी हाल ही में शादी हुई है जिसको मैं इस पर्व पर सुहाग का सामान दूंगी। इस दिन सुहागिने 13 शादीशुदा महिलाओं को घर बुलाकर उपहार देंगी। इस दिन विशेष तौर पर लड्डू, तिल पट्टी, चिक्की, पकौड़ी, घेवर, जलेबी को बनाकर सब साथ बैठकर खाते हैं। माघीयहियागंज गुरुद्वारे के सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी नाके के निवासी है वो बताते है कि मकर संक्रति को माघी कहकर बुलाते हैं इस दिन नदी किनारे दीप प्रज्जवलित कर खुशियां मनाते है गरीबों को कपड़े बाटना, जरूरतमंदों की मदद करना इस त्योहार का उदेश्य है इस दिन भांगडा गिद्दा और डीजे पर शोर शराबबे संग परिवार संग मस्ती करते हैं। शादीशुदा जोड़ों को घरे के बुजुर्ग आर्शीवाद के रूप में नेग देते हैं इस दिन तिल्ली के तेल के दीये जलाने से घर की बिमारी दूर और खुशियां नजदीक आती हैं। इस दिन घर की महिलाएं खिचड़ी गुड़ और खीर बनाती हैं। - बीहूअसम का सबसे बड़ा त्योहार है बीहू। इस दिन विशेष तौर पर घर के लोग छुट्टी लेकर साथ में इस त्योहार को मनाते हैं असम में तीन बीहू होते हैं फसल बोते समय सबके हाथ खाली होते हैं जिसको बोलते है कगाली बीहू इसके बाद फसल काटने के वक्त रंगाली बीहू तीसरा और आखिरी बीहू भेगली बीहू जो धान कटने पर खेती के बढ़ने पर खुशी को बयां करती है। इस दिन धान कटने के बाद जो पुआल बचता है उससे बच्चे छोटे-छोटे मंदिर बनाते हैं फिर एक दूसरे के घर चोरी करने जाते हैं जिसको शुभ माना जाता है। महिलाएं घरों में पीठा दूध चावल के पकवान कांदे की खीर तिल का अचार और लड्डू बनाते हैं। मनदीपा, आशियानापोंगलतेलगू संस्कृति के पी शिव शंकर बताते है कि पोंगल चार दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है लखनऊ में रहने के बाद यहां भी उसी तरह से इसको उत्साह संग माना हूं। सूर्यकी पूजा, पशुधन पूजा करते हैं महिलाएं मिलकर घरों में लोकगीतों को गाकर खुशियां बाटती हैं इस समय धान की फसल खलिहान में आ चुकी होती है महिलाएं चावल,घी, दूध, शक्कर से मी पकवान बनाती है जिसको सूर्य देवता को अर्पित करती हैं पोंगल में सूर्य को प्रमुख देव मानकर पूजा की जाती है इस दिन दूरदाराज के लोग भी घर आकर खुशियां साथ में मनाते हैं।पी शिव शंकर, परियोजना निदेशक एनएचएआईउड़िया समाजउड़िया समाज भी संक्राति को धूमधाम से मनाता है समाज के लोग नहाने के बाद सबसे पहले मंदिर जाकर दर्शन करते हैं। घर में विभिन्न तरह के व्यंजनों संग खिचड़ी का लुत्फ उठाया जाता है भगवान सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देते हैं इस पर्व को हर्षोल्लास संग मनाया जाता है।ज्योतिका अमीनाबादवैदिक उत्सव में संस्कृतिसूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैंइसी के संग उत्त्रायण शुरू हो जाता है शास्त्रों के अनुसार यह देवताओं का दिन है यह वैदिक उत्सव है इसका पुण्श्काल 40 घटी यानी लगभग 16 घंटे होता है इस त्यौहार को सूर्य की तिथि अनुसार तय करते हैं।दान पुण्य का महत्व डालीगंज निवासी ज्योतिषाचार्य प्रशांत तिवारी ने बताया कि देवताओं का दिन आरंभ हो जाता है और शुभ कार्य भी कर सकते हैं मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व शास्त्रों में बताया गया है जप-तप, दान पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है

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