केजीएमयू में छेड़छाड़ के आरोपी डॉक्टर पर मेहरबानी

Newswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - हिन्दुस्तान फालोअप केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में महिला मरीज से छेड़छाड़ का मामला आरोपी डॉक्टर पर

केजीएमयू में छेड़छाड़ के आरोपी डॉक्टर पर मेहरबानी

हिन्दुस्तान फालोअप केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में महिला मरीज से छेड़छाड़ का मामलाआरोपी डॉक्टर पर अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाईलखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता।केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में काकोरी मोड़ निवासी महिला इलाज के लिए आई थीं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी थी। आरोप हैं कि यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान महिला मरीज से डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। इसकी शिकायत पीड़िता ने विभाग के अध्यक्ष से की। लगभग एक सप्ताह गुजर चुका है। यूरोलॉजी विभाग प्रशासन छेड़छाड़ के आरोपी डॉक्टर पर मेहरबान है। अभी तक आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।यूरोलॉजी विभाग में पीपीपी मॉडल का खेलकेजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में करीब 12 नियमित डॉक्टर तैनात हैं।

40 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर हैं। विभाग में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे समेत दूसरी मशीनों का संचालन कर रहा है। केजीएमयू में पीपीपी मॉडल पर मशीन चलाने का खेल चल रहा है। केजीएमयू के बिल्डिंगों में कंपनियां मोटी कमाई कर रही हैं। बदले में केजीएमयू को मामूली कमीशन मिल रहा है। यूरोलॉजी विभाग में भी करीब 20 साल से पीपीपी मॉडल पर अल्ट्रासाउंड आदि मशीनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें जांच कौन कर रहा है? इसकी फिक्र केजीएमयू प्रशासन को नहीं है।आयुष डॉक्टर कर रहा जांच, मरीजों की जान सांसत मेंयूरोलॉजी विभाग में आयुष विधा का डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच कर रहा है। पीड़िता की शिकायत है कि आयुष डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि विभाग से छेड़छाड़ के मामले की जानकारी मांगी गई है। कमेटी गठित कर जांच कराई जाएगी। यदि आयुष विधा के डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड जांच करने की पुष्टि हुई तो कंपनी पर भी कार्रवाई की जाएगी।मरीज से लेकर डॉक्टर तक कोई सुरक्षित नहींकेजीएमयू में कमेटियां और कैमरे सिर्फ दिखावासख्ती के बावजूद छेड़छाड़ की घटनाएं हो रहींलखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता।केजीएमयू में मरीज से लेकर डॉक्टर तक कोई सुरक्षित नहीं है। यही वजह है कि यहां लगातार छेड़छाड़ घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है। कभी मरीज से तो कभी तीमारदार से। सीनियर डॉक्टर तक सुरक्षित नहीं हैं। रेजिडेंट डॉक्टर व मेडिकल छात्राएं भी छेड़छाड़ की शिकार हो रही हैं।छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए केजीएमयू में प्रॉक्टोरियल बोर्ड है। इसमें अधिकारियों की लंबी चौड़ी फौज है। सीसी टीवी कैमरे जगह-जगह लगाए गए हैं। विशाखा कमेटी भी बनी है। इसके बावजूद घटनाएं लगातार जारी हैं।प्रमुख घटनाएं11 फरवरी 2026पीडियाट्रिक विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर ने एडिशनल प्रोफेसर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। आरोपी डॉक्टर ने कमरे में बुलाकर अनुचित व्यवहार किया। केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को तुरंत निलंबित कर दिया। जांच बिठाई थी।13 फरवरी 2026एक अन्य मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर पर महिला डॉक्टर से छेड़छाड़ और मोबाइल पर आपत्तिजनक मैसेज भेजने के आरोप लगे। आरोपी को निलंबित किया गया।2 जनवरी 2026नर्सिंग छात्रा ने एमबीबीएस इंटर्न पर यौन शोषण, शादी का झांसा और धमकी के आरोप लगाए। मुकदमा दर्ज कराया गया। छात्र की इंटर्नशिप रद्द कर दी गई थी।19 दिसंबर 2025पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर पर यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल और धर्म परिवर्तन के प्रयास के आरोप। आरोपी गिरफ्तार, दाखिला रद्द8 नवंबर 2025सीनियर प्रोफेसर ने जूनियर फैकल्टी पर यौन उत्पीड़न व अभद्रता का आरोप लगाया था।17 जनवरी 2025मानसिक स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी पर मानसिक रूप से बीमार युवती से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे। केजीएमयू प्रशासन ने संविदा कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था।21 जून 2024एमबीबीएस छात्रा ने हॉस्टल कर्मचारी पर छेड़छाड़ व अनचाहे व्यवहार का आरोप लगाया। एमआईआर की सिफारिश और संबंधित एजेंसी ब्लैकलिस्ट की गई थी।26 जनवरी 2024नर्सिंग अधिकारी ने सहकर्मी पर यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थी। आरोपी का ट्रांसफर किया गया था।

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