छेड़छाड़ के आरोपी डॉक्टर को बचाने में जुटे,केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में एक सप्ताह बाद भी नहीं बनी जांच कमेटी

Newswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - लखनऊ में केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में एक आयुष डॉक्टर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। पीड़ित महिला की शिकायत के बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जांच कमेटी का गठन नहीं हुआ है, जिससे पीड़िता इलाज कराने से भी डरी हुई है।

छेड़छाड़ के आरोपी डॉक्टर को बचाने में जुटे,केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में एक सप्ताह बाद भी नहीं बनी जांच कमेटी

लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग छेड़छाड़ के आरोपी आयुष डॉक्टर को बचाने में जुट गया है। एक सप्ताह पहले पीड़ित महिला ने छेड़छाड़ की शिकायत की। अभी तक अधिकारियों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आलम यह है कि अभी तक जांच कमेटी तक गठित करने की जहमत नहीं उठाई गई है। डरी सहमी पीड़िता, इलाज से कतरा रहीयूरोलॉजी विभाग में काकोरी मोड़ निवासी महिला इलाज के लिए आई थीं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी थी। आरोप है कि यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान महिला मरीज से डॉक्टर ने छेड़छाड़ की।

इसकी शिकायत पीड़िता ने विभाग के अध्यक्ष से की। लगभग एक सप्ताह का समय गुजर चुका है। अभी तक विभाग की तरफ से मामले की जांच नहीं कराई गई। न ही कोई कमेटी बनाई गई। नतीजतन पीड़िता को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। वहीं अब पीड़िता विभाग में इलाज कराने से भी घबरा रही है।यूरोलॉजी विभाग में पीपीपी मॉडल का खेलकेजीएमयू में रेडियोलॉजी विभाग है। विभाग में करीब 12 नियमित डॉक्टर तैनात हैं। जबकि 40 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर हैं। विभाग में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे समेत दूसरी मशीनों का संचालन कर रहा है। विभाग लगातार रेडियोडायग्नोसिस जांच की गुणवत्तापरक सुविधाएं बढ़ा रहा है। इसके बावजूद केजीएमयू में पीपीपी मॉडल पर मशीन चलाने का खेल चल रहा है। केजीएमयू के बिल्डिंगों में सिर्फ मशीन व कर्मचारी लगातार कंपनियां मोटी कमाई कर रही हैं। बदले में केजीएमयू को मामूली कमीशन मिल रहा है। यूरोलॉजी विभाग में भी करीब 20 साल से पीपीपी मॉडल पर अल्ट्रासाउंड आदि मशीनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें जांच कौन कर रहा है? इसकी फिक्र केजीएमयू प्रशासन को नहीं है।आयुष डॉक्टर कर रहा जांच, मरीजों की जान सांसत मेंयूरोलॉजी विभाग में आयुष विधा का डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच की प्रक्रिया कर रहा है। पीड़िता की शिकायत है कि आयुष डॉक्टर ने ही उसकी जांच की। जांच के दौरान छेड़छाड़ की। केजीएमयू में आयुष डॉक्टर जांच कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसे रोकने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि विभाग से छेड़छाड़ के मामले की जानकारी मांगी गई है। कमेटी गठित कर जांच कराई जाएगी। यदि आयुष विधा के डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड जांच करने की पुष्टि हुई तो कंपनी पर भी कार्रवाई की जाएगी। छेड़छाड़ के मामले को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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