केजीएमयू में फेफड़े और दिल का प्रत्यारोपण शुरू होगा

Jan 30, 2026 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - केजीएमयू में अब फेफड़े और दिल का प्रत्यारोपण संभव होगा। इसके लिए ब्रेन डेड मरीजों के अंगों का दान किया जाएगा। विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की गई है। पहले लिवर, गुर्दा और कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा थी। अब, फेफड़े और दिल के प्रत्यारोपण की तैयारी पूरी है।

केजीएमयू में फेफड़े और दिल का प्रत्यारोपण शुरू होगा

केजीएमयू में अब फेफड़े और दिल का प्रत्यारोपण हो सकेगा। ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान से यह सुविधा की शुरू की जा सकेगी। इसके लिए सभी तैयारी की जा चुकी हैं। केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि शताब्दी भवन में अंगों के प्रत्यारोपण के लिए विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट को तैयार किया गया है। इस यूनिट में मरीजों के अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी हर तरह की अत्याधुनिक मशीनें आदि सुविधाएं हैं। केजीएमयू में अभी तक लिवर, गुर्दा और कॉर्निया प्रत्यारोपण की ही सुविधा है। अब फेफड़े और दिल का प्रत्यारोपण भी किया जाएगा। लिवर, गुर्दा या कॉर्निया प्रत्यारोपण में परिवार या रिश्तेदार का कोई व्यक्ति आमतौर पर अंगदान करता है।

तमाम जांचों के बाद मरीजों का अंग प्रत्यारोपण किया जाता है। सिर्फ ब्रेन डेड मरीज के अंगदान से ही प्रत्यारोपण फेफड़े और दिल के प्रत्यारोपण में परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार का अंग नहीं लिया जा सकता है। फेफड़े और दिल के प्रत्यारोपण के लिए ब्रेन डेड मरीज की ही जरूरत पड़ती है। उसके परिवारीजनों की रजामंदी के बाद ब्रेन डेड मरीज के अंगों को प्रत्यारोपित किया जाता है। केजीएमयू में भी सिर्फ ब्रेन डेड मरीज के अंगों को लेकर ही फेफड़ा या दिल का प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके लिए केजीएमयू के प्रत्यारोपण की टीमों ने पूरी तैयारी कर रखी है। ब्रेन डेड मरीज के मिलने पर किसी मरीज का फेफड़ा और दिल का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक जल्द ही करने की उम्मीद है। मरीज की मौत से टल गया था प्रत्यारोपण केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक संस्थान में पिछले सप्ताह ही एक मरीज का दिल का प्रत्यारोपण टल गया था। यह केजीएमयू में दिल का पहला प्रत्यारोपण हो सकता था। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती ब्रेन डेड के एक मरीज के परिवारीजनों की काउंसलिंग की गई थी। वह मरीज का अंगदान करने को राजी हो गए थे, लेकिन सीटीवीएस विभाग में दिल के प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीज की उसी दिन मौत हो गई, जिस दिन प्रत्यारोपण करने की तैयारी की जा रही थी। दोनों मरीजों की सभी जरूरी जांचें भी हो चुकी थीं।

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