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केजीएमयू में अगले माह से शुरू होगा बोनमैरो प्रत्यारोपण

केजीएमयू में अगले माह से शुरू होगा बोनमैरो प्रत्यारोपण

संक्षेप: Lucknow News - केजीएमयू के हिमैटोलॉजी विभाग में अगले माह से ब्लड कैंसर के मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू होगा। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इसकी घोषणा की। 11 दिसंबर से ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें मरीज के भाई या बहन से बोन मैरो लिया जाएगा। सम्मेलन में तीन वरिष्ठ डॉक्टर्स को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया।

Fri, 7 Nov 2025 09:11 PMNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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केजीएमयू के हिमैटोलॉजी विभाग में ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट अगले माह से शुरू हो जाएगा। यह घोषणा शुक्रवार को केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने की। कानपुर रोड स्थित एक होटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ हिमैटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन (आईएसएचबीटी) के 66वें वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने रक्त से जुड़ी बीमारियों पर जानकारी साझा की। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि 11 दिसंबर से केजीएमयू के हिमैटोलॉजी विभाग में बोन मैरो प्रत्यारोपण की शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी विभाग में 65 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में 10 बेड होंगे।

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शुरुआत में मरीज के बहन या भाई से बोनमैरो लेकर प्रत्यारोपित किया जाएगा। केजीएमयू हिमैटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसपी वर्मा ने कहा कि ब्लड कैंसर का शुरुआत में दवाओं से इलाज किया जाता है। उन मरीजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। जब किसी कारण से मरीज के शरीर का बोन मैरो खराब हो जाता है। पर्याप्त स्वस्थ रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है। ऐसी दशा में स्वस्थ व्यक्ति से खून के माध्यम से बोन मैरो लेकर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। टोरंटो के डॉ. ऑरो विश्वबंद्या ने बताया कि ब्लड कैंसर मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस) के मरीजों में बोन मैरो प्रत्यारोपण मुकिश्ल होता है। बुजुर्गों के मामलों में प्रत्यारोपण और भी कठिन हो जाता हे। ऐसे में कीमोथेरेपी ही विकल्प बचता है। जिससे बीमारी पर काबू पाने का प्रयास किया जाता है। तीन डॉक्टरों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सम्मेलन में देश के तीन वरिष्ठ हिमैटोलॉजिस्ट डॉ. एमबी अग्रवाल, डॉ. टीके दत्ता और डॉ. रेनू सक्सेना को लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. विजय तिलक, डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. रश्मि कुशवाहा, डॉ. नम्रता पी अवस्थी और डॉ. अंशुल गुप्ता मौजूद रहे। इन रोगों में बोन मैरो प्रत्यारोपण ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया और रक्त कैंसर बुजुर्ग मरीजों प्रत्यारोपण कठिन डॉ. तपन सैकिया ने बताया कि मल्टीपल मायलोमा के मामले अभी भी अपने देश में शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आ रहे हैं। इसमें बदलाव आ रहा है, लेकिन भी अभी और सुधार की जरूरत है। डॉ. नीना कपूर ने प्रतिरक्षी विकारों के प्रबंधन में कोशिका थेरेपी में हुई प्रगति पर चर्चा की। उनके मुताबिक कोशिका थेरेपी से इलाज के नए विकल्प खुल रहे हैं।