
उभरी नाक का जटिल आपरेशन कर नया जीवन दिया
Lucknow News - केजीएमयू में 14 वर्षीय किशोर गणेश की जन्मजात नाक की विकृति का जटिल ऑपरेशन किया गया। आठ घंटे चले ऑपरेशन के बाद नाक का आकार सामान्य हुआ। परिजन किशोर को भगवान गणेश मानकर पूजा करने लगे थे। डॉक्टरों ने बताया कि किशोर को हाइपरटेलोरिज्म और नासोएथमॉइडल एनसेफेलोसील जैसी समस्याएं थीं।
केजीएमयू -आठ घंटे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने किशोर के चेहरे को आकार ठीक किया -उभरी नाक की वजह से परिजन और ग्रामीण भगवान गणेश का अवतार मानकर पूजा करने लगे थे -चेहरे में सूजन व दिक्कत बढ़ने पर पिता बेटे को लाए केजीएमयू लखनऊ, कार्यालय संवाददाता केजीएमयू के डॉक्टरों ने कुशीनगर के 14 वर्षीय गणेश की उभरी नाक की जन्मजात विकृति का जटिल ऑपरेशन किया है। आठ घंटे चले ऑपरेशन और प्लास्टिक सर्जरी के बाद अब किशोर की नाक का आकार करीब-करीब सामान्य हुआ है। परिजन और ग्रामीण किशोर को बचपन के उपचार के बजाए उसे गणेश भागवान मानकर पूजा करनी शुरू कर दी थी।
परिजनों ने बेटे का नाम भी गणेश रख दिया। केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि किशोर को जन्म के समय से दिमाग के ऊतक नाक के पास निकले थे। किशोर को हाइपरटेलोरिज्म के साथ नासोएथमॉइडल एनसेफेलोसील की दिक्क्त थी। इसमें दिमाग के ऊतक बाहर उभरने लगते हैं। इस ऊतक से उम्र के साथ बढ़ने पर किशोर को समस्या होने लगी। कुछ ग्रामीणों की सलाह पर परिजन उसे केजीएमयू लेकर आए। यहां प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने जांच के बाद सर्जरी की सलाह दी। ऑपरेशन में लगे आठ घंटे डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि जटिल ऑपरेशन में करीब आठ घंटे लगे। न्यूरोसर्जन डॉ. सोमिल जायसवाल ने पहले ऑपरेशन कर दिमाग से जुड़ी संरचानाओं को अलग किया। फिर प्लास्टिक सर्जन ने नाक के उभरे हुए हिस्से को अलग किया। नाक का छेद बहुत बड़ा हो गया था। दिमाग के ऊतक नाक की जड़ से और नासिका पट से बाहर निकल रहे थे। नाक के पुनर्निर्माण के लिए फैली हुई माथे की हड्डी और नाक की संरचनाओं को दोबारा आकार दिया गया। ऑपरेशन टीम में यह रहे मौजूद प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ.बृजेश मिश्रा, डॉ. रवि कुमार, डॉ. बी गौतम रेड्डी, डॉ.गौरव जैन, डॉ. अजहर फैयाज, डॉ. साक्षी भट्ट, डॉ. रुचा यादव, डॉ. आंचल अग्रवाल और डॉ.आकांक्षा मेहरा और न्यूरोसर्जरी के डॉ. सोमिल, डॉ. विष्णु वर्धन, डॉ.शुब्रित त्यागी और डॉ. शुभम कौशल ने ऑपरेशन किया। इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. आमना खातून, डॉ. शांभवी झा, डॉ. छवि कारा, डॉ. ओबिली मनोज, डॉ. आयुषी माथुर व सिस्टर इंचार्ज सरिता का अहम योगदान रहा।

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