केजीएमयू में 30 से 40 फीसदी घटी दवाओं की मांग
-यूरोलॉजी दवा घोटाले के बाद डॉक्टरों में बढ़ी सतर्कता -कई विभागों से दवाओं की मांग

-डॉक्टर इंडेंट पर हस्ताक्षर करने में भी बरत रहे सावधानी
लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता।
दवा घोटाले का असर
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के कथित दवा घोटाला सामने आने के बाद दवाओं की खरीद और मांग को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। घोटाले की जांच शुरू होने के बाद विभिन्न विभागों से दवाओं की मांग में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। डॉक्टर अब मरीजों के लिए दवाएं लिखने और इंडेंट भेजने में पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं। जबकि ज्यादा विभाग में बेड भरे हैं।
अन्य विभागों में भी गिरावट
यूरोलॉजी विभाग ही नहीं बल्कि मेडिसिन, सर्जरी, नेत्र रोग, कैंसर और अन्य विभागों से भी दवाओं की मांग में खासी गिरावट आई है। पहले जहां वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए नियमित रूप से बड़ी मात्रा में दवाओं का इंडेंट भेजा जाता था। वहीं अब डॉक्टर जरूरत का आकलन करने के बाद ही दवाओं की मांग कर रहे हैं।
महंगी दवाओं से बचाव
कई डॉक्टर महंगी दवाएं लिखने से भी बच रहे हैं। इसमें इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, प्रोटीन, आयरन के महंगे इंजेक्शन शामिल हैं। वे मरीजों की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों को ध्यान में रखते हुए ही दवाओं का चयन कर रहे हैं। वहीं दवा इंडेंट से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को लेकर भी डॉक्टरों में सतर्कता बढ़ गई है। कई डॉक्टर बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी भी दस्तावेज पर दस्तखत नहीं कर रहे हैं। कुछ डॉक्टर अब इंडेंट फाइलों को विस्तार से पढ़ने और सभी औपचारिकताओं की पुष्टि करने के बाद ही हस्ताक्षर कर रहे हैं।
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