बवाल के साक्ष्य शासन को सौंपे, आन्दोलन टला

Jan 13, 2026 08:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - -केजीएमयू प्रशासन ने दूसरे दिन शासन की मांग पर सुबूत पेश किए -घटना के बाद

बवाल के साक्ष्य शासन को सौंपे, आन्दोलन टला

-वीडियो फुटेज, तस्वीरों के परीक्षण के बाद मुकदमा दर्ज करने पर होगा फैसला लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। केजीएमयू प्रशासन ने मंगलवार को कुलपति कार्यालय में बवाल के बचे सुबूत शासन को सुपुर्द कर दिए हैं। दूसरे दिन भी शासन ने केजीएमयू से हंगामा, बवाल और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के समर्थकों से जुड़े सुबूत मांगे थे। केजीएमयू प्रशासन ने वीडियो और फोटो समेत दूसरे प्रमाण उपलब्ध करा दिए हैं। उधर, कुलपति की गुजारिश पर डॉक्टर-कर्मचारियों के पांचों संगठनों ने कार्यबहिष्कार टाल दिया है। नौ जनवरी को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थक करीब 12 बजे कुलपति कार्यालय के सामने एकत्र हुए थे।

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आरोप हैं कि केजीएमयू प्रशासन को बिना पूर्व सूचना दिए अपर्णा यादव कुलपति कार्यालय पहुंची थी। उनके पहुंचते ही पहले से जुटे अपर्णा के समर्थकों ने केजीएमयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी थी। कुछ ही देर में तोड़-फोड़ शुरू कर दी थी। कुलपति के कार्यालय पर तीन घंटे कब्जा कर रखा था। प्रतिकुलपति डॉ. अपजीत कौर व विशाखा कमेटी की चेयरमैन डॉ. मोनिका कोहली को बंधक बना लिया था। उपाध्यक्ष के सामने महिला डॉक्टरों से अभद्रता की। डॉक्टर-कर्मचारियों में उबाल घटना से केजीएमयू के डॉक्टर व कर्मचारी संगठनों में उबाल है। सभी संगठन अपर्णा समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर अड़े हैं। केजीएमयू के पांच संगठनों ने कार्यबहिष्कार की चेतावनी दी थी। मंगलवार को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टर-कर्मचारियों ने कार्यबहिष्कार टाल दिया है। परीक्षण के बाद दर्ज होगा मुकदमा उधर, सूत्रों का कहना है कि राज्य महिला आयोग के पदाधिकारियों ने कहा कि वह केजीएमयू अकेले आई थीं। कुलपति से मिलने अकेले गई थीं। इसके बाद शासन ने फिर से केजीएमयू प्रशासन से हंगामा और बवाल से जुड़े सुबूत मांगे। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और कैमरे से बनाई गई तस्वीरें बतौर सुबूत शासन को भेज दिए हैं। इसके अलावा परिसर में मुस्लिमों की भीड़ से संबंधित वीडियो और तस्वीरे सामने आई थी। इस पर भी केजीएमयू प्रशासन ने शासन के समझ अपना पक्ष रखा। केजीएमयू प्रशासन ने बताया कि एक कार्यक्रम में मुस्लिम संगठन आए थे। सुबूतों का परीक्षण के बाद ही मुकदमा दर्ज करने पर फैसला होगा।

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