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केशव ने 37 साल बाद तोड़ा था कमला बहुगुणा का रिकॉर्ड

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फूलपुर संसदीय सीट देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम से पहचानी जाती है। यहां की जनता ने उन्हें लगातार तीन बार अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद में भेजा था पर पिछले यानी 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व इस सीट पर सर्वाधिक मतों के अंतर से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड कमला बहुगुणा के नाम दर्ज था, जो 1977 के आम चुनाव में बना था।
37 वर्षों के बाद 2014 में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने इस रिकॉर्ड को ब्रेक किया था। हेमवती नंदन बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर यहां की सांसद चुनी गई थीं। 1971 के चुनाव में इलाहाबाद से पति हेमवती नंदन बहुगुणा के सांसद चुने जाने के बाद वह 1977 के चुनाव में फूलपुर से मैदान में उतरी थीं। उन्होंने कांग्रेस के रामपूजन पटेल को 122352 मतों के अंतर से पराजित किया था। 1977 के बाद इस क्षेत्र में हुए नौ चुनावों में कोई उनके इस रिकॉर्ड को ब्रेक नहीं कर सका था। लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने 308308 मतों के अंतर से जीत हासिल कर इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। इसके साथ ही सर्वाधिक मतों से जीत के मामले में कमला बहुगुणा दूसरे स्थान पर चली गईं जबकि इस मामले में तीसरे स्थान पर रामपूजन पटेल हैं, जो 1984 के चुनाव में 114572 मतों के अंतर से चुनाव जीते थे।

सिर्फ पांच सांसदों को मिले 50 प्रतिशत मत
फूलपुर संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में सिर्फ पांच सांसदों पंडित नेहरू, वीपी सिंह, कमला बहुगुणा, रामपूजन पटेल और केशव प्रसाद मौर्य को ही पचास प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। 
आजादी के बाद देश में पहला  आम चुनाव 1951 में हुआ था। इस चुनाव में फूलपुर के नाम से सीट नहीं थी। 1957 के चुनाव में फूलपुर सीट बनी तो पंडित जवाहर लाल  नेहरू चुनाव लड़े, उन्हें 36.87 प्रतिशत मत  ,मिले थे। हार-जीत के मतों में अंतर सिर्फ 29018 वोट का था। 1962 के चुनाव में नेहरू जी और डॉ. राम मनोहर लोहिया के बीच सीधी टक्कर हुई, जिसमें नेहरू जी को 61.62 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने लोहिया को 64571 मतों से पराजित किया था। 
     1967 में नेहरू जी की बहन विजय लक्ष्मी पंडित और जनेश्वर मिश्र के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें विजय लक्ष्मी 36237 मतों से जीती थीं। 1971 में वीपी सिंह ने बीडी सिंह को 66780 मतों से पराजित किया था। 1977 में कमला बहुगुणा मैदान में उतरीं तो उन्होंने सर्वाधिक मतों से जीत का रिकॉर्ड बनाया। उन्हें 65.18 प्रतिशत मत मिले थे।
1998 में सबसे कम अंतर से हुई थी जीत
फूलपुर लोकसभा सीट के चुनाव में हार-जीत के मतों का अंतर 1998 के चुनाव में सबसे कम था। इस चुनाव में सपा के जंग बहादुर सिंह पटेल और भाजपा के बेणी माधव बिंद के बीच टक्कर हुई, जिसमें पटेल, बिंद पर सिर्फ 14520 मतों से भारी पड़े थे। इस क्षेत्र में सबसे कम वोट पाने वाले सांसद धर्मराज पटेल हैं। 1999 के चुनाव में सपा से चुने गए धर्मराज पटेल को मात्र 29.41 प्रतिशत वोट मिले थे। कमोवेश ऐसी ही स्थिति 2009 के चुनाव में बसपा से जीते कपिलमुनि करवरिया की थी, जिन्हें 30.36 प्रतिशत मत मिले थे। 

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  • Web Title:Keshav broke the record of Kamla Bahuguna after 37 years