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13 अप्रैल, 2021|10:36|IST

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वृन्दावन धाम अपार भजेजा राधे राधे

भागवत कथालखनऊ। निज संवाददाताजीवन में गुरु कृपा जरूरी है। गुरु की कृपा से ही भगवान का मिलन आसान होता है। यह बात बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू मन्दिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार को वृन्दावन के मृदुल कान्त शास्त्री जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान नही होता। इस लिए जगत को शिक्षा देने के लिए प्रभु विद्या अध्य्यन के लिए स्वयं भगवान संदीपनी गुरु के पास जा कर विद्या अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि बिना सेवा के प्राप्त की गयी विद्या सफल नही होती। गुरु आज्ञा का पालन करना सबसे बड़ी सेवा है। प्रसंग के दौरान महाराज जी ने एक भजन ‘‘वृन्दावन धाम अपार भजेजा राधे राधे सुनाया। रुक्मिणी विवाह की चर्चा करते हुये कथा व्यास ने कहा कि प्रभु ने ब्रजजनो के पास सन्देश लेकर श्री उद्धव जी को भेजा। उद्धव जी ज्ञान प्रधान है और गोपांगनाये प्रेम प्रधान है। जीवन मे ज्ञान एवं प्रेम एक दूसरे के पूरक हैं। प्रेम से ज्ञान और ज्ञान से प्रेम दृढ़ होता है। इस लिए प्रभु से उद्धव जी एवं गोपिकाओं का मिलन ज्ञान एवं प्रेम का मिलन कराया। इस प्रसंग पर भजन ‘‘को जाने यह राह बिरह की भजन सुनकर भक्तजन आनन्दित हुए। प्रभु जब द्वारिकाधीश बने तब पहले श्री बलराम जी का विवाह रेवती जी के साथ एवं प्रभु का प्रथम विवाह माता रुक्मिणी जी के साथ बड़ी ही धूमधाम से हुआ। विवाह गीत ‘‘कैसे सजे नंदलाल जोड़ी का जवाब नही और ‘‘किसने सजाया तुमको मोहन बड़ा प्यारा लगे सुनाया।संगठन मंत्री सुधीश गर्ग ने बताया कि बुधवार को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं फूलों की होली खेली जायेगी।