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10 अप्रैल, 2021|11:54|IST

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कलियुग मे दान करना ही श्रेष्ठ है- आस्था भारती

बलरामपुर गार्डन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से बलरामपुर गार्डन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें व अंतिम दिन शनिवार को आस्था भारती ने कहा कि इस कलियुग में दान करना ही जीवन के लिए मंगलकारी है। उन्होंने कहा कि कलियुग में धर्म का एक ही चरण शेष रहेगा और वह है दान। श्रीराम चरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि कलयुग में धर्म के चार पदों में से दान ही प्रधान रह जाएगा और वही मानव जीवन का कल्याण करेगा। अतः अपने ध्यान को धर्म यज्ञ में आहुति के रूप में लगाए और जीवन में लाभ की प्राप्ति करें। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा भागवत की महिमा का बखान करते हुये कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिला था कि सात दिवस के पश्चात उनकी मृत्यु हो जाएगी परंतु परीक्षित जी ने इस लघु अवधि का इतना अपूर्व रूप से सदुपयोग किया कि उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल गए। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि परीक्षित जी की मुक्ति केवल हरि चर्चा या कृष्ण लीलाओं को श्रवण करने मात्र से नहीं हुई थी अपितु पूर्ण गुरु श्री सुखदेव जी महाराज के द्वारा प्रभु के तत्व रूप को अपने अंदर जान लेने पर हुई थी। शास्त्रानुसार अज्ञानतावश सभी सदस्यों का नाश गुरु द्वारा दिव्य नेत्र प्राप्त होने पर ही होता है।

अच्छा हो एक दीप जलाएं

कथा व्यास ने कहा अंधकार को क्यों धिक्कारे अच्छा हो एक दीप जलाएं। अंधकार कितना ही पुराना क्यों ना हो लेकिन एक छोटा सा दीपक जलाते ही वह क्षण भर में खत्म हो जाता है। इसी प्रकार कोई कितना भी पापी क्यों ना हो ज्ञान का दीपक जलाते ही जन्म जन्मांतरों के कर्मों का तिमिर छठ जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुदेव आशुतोष महाराज जी ने वर्तमान में भी जीवंत कर दिखाया है। श्री गुरुदेव का कहना है कि पाप से घृणा करो पापी से नहीं भारत की जेलों में कार्य कार्य रत बंदी सुधार एवं पुनर्वास कार्यक्रम अंतर क्रांति प्रकल्प इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है वह कभी जिनके मुख गुरु महाराज जी की आध्यात्मिक शिक्षा और ब्रह्मज्ञान की दीक्षा को आधार बनाकर तिहाड़ जेल के कैदियों ने अपने जीवन में धर्म निष्ठा संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित किया है ब्रह्मज्ञान के प्रकाश ने उनके भीतर के अज्ञानता रूपी तमस को दूर कर दिया है। आज वह स्वयं प्रज्वलित दीपक है और अपने प्रकाश से दूसरों के जीवन को रोशन करने निकल पड़े हैं।