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कामकाज : कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े

जीएसटी लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार निगम की कोई सुधि नहीं ले रही है। निगम का व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाने से प्रदेश भर में कार्यरत लगभग 850 कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। निगम की स्थापना सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1960 के तहत वर्ष 1965 में की गई थी। इसका कार्य बिना लाभ-हानि के राज्य कर्मचारियों को करमुक्त सस्ती दरों पर दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं को उपलब्ध कराना था। इसकी स्थापना का एक उद्देश्य महंगाई और बाजार दरों पर नियंत्रण करना भी था। जीएसटी लागू होने से पहले तक निगम द्वारा व्यापार कर मुक्त दरों पर दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही थीं लेकिन एक जुलाई से जीएसटी लागू कर दिए जाने के बाद निगम का व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया। उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव और महामंत्री हैदर अली अंसारी ने कहा कि व्यवसाय ठप हो जाने के बाद लगभग 850 कर्मचारियों को वेतन के लिए अनुदान देने की मांग प्रदेश सरकार से की गई लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा यह मांग भी गई कि कर्मचारियों को निगम के पैतृक विभाग खाद्य एवं रसद में रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए।

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  • Web Title:Karmchari kalyan nigam staff getting no pay