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30 अक्तूबर, 2020|12:56|IST

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मंडी परिषद में तत्काल प्रभाव से सातवां वेतनमान लागू करने के आदेश से रोष

मंडी परिषद में सातवां वेतनमान तत्काल प्रभाव से लागू करने के शासन के आदेश से घमासान शुरू हो गया। मंडी कर्मी मंगलवार को होने वाले मंडी बोर्ड की बैठक से पूर्व सीएम से विरोध करने की तैयारी में हैं। मंडी कर्मियों का कहना है कि बोर्ड की पिछली बैठक में स्वयं मुख्यमंत्री ने पहली जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान लागू करने के आदेश दिए थे, लेकिन शासन ने सीएम के आदेशों को दरकिनार कर सोमवार को उसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी कर दिया।

जानकारों के अनुसार 18 जनवरी 2018 को मंडी परिषद के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंडी बोर्ड की बैठक हुई थी। जिसमें मंडियों की आय में 25 फीसदी की वृद्धि होने पर बोर्ड ने सर्वसम्मति से पहली जनवरी 2016 से मंडी कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय किया था। बोर्ड के इस निर्णय को वित्त विभाग ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी थी। कारण, इसके लिए सरकार पर कोई व्ययभार नहीं पड़ रहा था। सारा व्ययभार मंडी परिषद को ही वहन करना था। मंडी कर्मियों का यह भी कहना है कि नेडा समेत कमोबेश सारे विभागों में सातवां वेतनमान पहली जनवरी 2016 से लागू किया गया है, जबकि इसके लिए इन विभागों को सरकार की ओर अनुदान दिया गया है। वहीं मंडी परिषद में सरकार को कुछ भी नहीं देना है। मंडी परिषद अपने स्रोतों से इसे वहन करेगी।