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इमाम हुसैन की कुर्बानी ने बचाया इस्लाम को

सहाबा की बताए रास्तों पर चले मुसलमान

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

इमाम हुसैन एक ऐसी शख्सियत है जिन्होंने अपनी कुर्बानी देकर दुनिया को हक और बातिल की पहचान करा दी। उनकी कुर्बानी का नतीजा है कि इस्लाम आज भी जिंदा है। यह बात पहली मोहर्रम को मिनाई एजुकेशन सोसाइटी की ओर से दरगाह शाहमीना शाह में आयोजित जिक्रे शोहदाये कर्बला को खिताब करते हुए जामिया दारूल मसूद के मौलाना मोहम्मद फीरोज अलीमी ने कही। वहीं, दारूल उलूम फरंगी महल में आयोजित जलसा ‘शुहादाये दीने हक व इस्लाहे माआशरह को खिताब करते हुए मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि हमें अपनी सहाबा कराम के सिखाए तरीके पर गुजारना चाहिए।

जलसे को खिताब करते हुए मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने मुसलमानों से अपील की कि वह सहाबा की पाक जिन्दगियों को अपना नमूना बनाये और एक स्वच्छ समाज के निर्माण और स्थापना में अपना प्रभावशाली और महत्वपूर्ण योगदान दें। जलसे का आरम्भ दारून उलूम निजामिया फरंगी महल के उस्ताद कारी कमरुद्दीन की तिलावत कलाम पाक से हुआ। जलसे का संचालन मौलाना हारून निजामी ने किया। उन्होंने कहा कि पहली मोहर्रम को इस्लाम की दूसरे खलीफा हजरत उमर की शहादत का दिन भी है। उनके हुकूमत करने का तौर तरीका दुनिया के तमाम हुकूमत करने वालों के लिए एक उदाहरण है। मस्जिद एक मीनारा में आयोजित जलसा शोहदाए कराम का आगाज मदरसा आलिया फुरकानिया के कारी मोहम्मद ताहा व कारी मोहम्मत वसफी ने तिलावत कुरान ए पाक से किया। इसके बाद जलसे को कारी मोहम्मद सिद्दीक ने खिताब किया। दरगाह शाहमीना शाह में हुए जलसे का आगाज तिलावत कुरान ए पाक से हुआ। इसके बाद कारी जहांगीर कारी मोईनुद्दीन, कारी शरफुद्दीन कमर सीतापुरी, दारूल उलूम शाहमीना के तलबा ने हज़रत इमाम हुसैन की शान में मनकबत के अशआर पेश किये। जलसे की सदारत पीरजादा शेख राशिद अली मीनाई ने की।

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  • Web Title:jalsa