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शाहमीना शाह से 30 दिसम्बर को निकलेगा जुलूस ए गौसिया

आल इण्डिया मोहम्मदी मिशन की ओर से 30 दिसम्बर को दरगाह शाहमीना शाह से जुलूस ए गौसिया निकाला जाएगा। गुरुवार को शहर काजी मुफ्ती अबुल इरफान मियां फिरंगी महली की अध्यक्षता में जुलूस की तैयारियों को लेकर एक बैठक उनके आवास पर हुई। मौलाना अबुल इरफान मियां ने बताया कि जुलूस 12 बजे दिन में शाहमीना शाह से निकाला जाएगा जो मेडिकल कॉलेज के अंदर स्थित हाजी अलहरमैन की मजार तक जाएगा। वहीं, जामिया बहरूल उलूम फिरंगी महल में जश्ने गौसुलवरा का आयोजन किया गया।

मौलाना अबुल इरफान मियां फिरंगी महली ने कहा कि ये जुलूस बहुत ही पाकीजगी और अदब व एहतराम वाला है। लिहाजा जुलूस में शामिल होने वाली अंजुमनें बवजू इसमें शरीक हो। उन्होंने क्योंकि जुलूस मेडिकल कॉलेज के अंदर जाता है। जहां पर काफी मरीज होते हैं। इसलिए अंजुमनों को चाहिए कि जुलूस में किसी तरह का कोई शोर शराबा न हो, जिससे मरीजों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि जुलूस का मकसद भाईचारा बढ़ाना है। मोहम्मदी मिशन के सदर सय्यद अय्यूब अशरफ ने तमाम अन्जुमनों की तैयारियों के बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जुलूस में शामिल होने के लिए अंजुमनों की तैयारियां पूरी हो गई है। शाकिर अली मीनाई बाबू मियां ने बताया कि दरगाह शरीफ में जश्ने गौसिया और लंगर का इंतजाम भी मुकम्मल हो गया है। मीटिंग में फैजान फिरंगी महली, मौलाना अफफान मियां फिरंगी महली, मौलाना यार मोहम्मद, सैय्यद मोहम्मद अहमद अशरफ समेत उलमा शामिल हुए।

अमन का पैगाम देती है ग्याहरवीं शरीफ

जामिया बहरूल उलूम फिरंगी महल में आयोजित जश्ने गौसुलवरा को खिताब करते हुए मौलाना अबुल इरफान मियां फिरंगी महली ने कहा कि ग्याहरवीं शरीफ सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि ये अमन का पैगाम देती है। मौलाना ने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह गौस ए आजम के बताए हुए रास्तों पर चलें। मौलाना ने कहा कि जिस बंदे में अल्लाह का डर होता है। वह कभी दहशतगर्द नहीं बन सकते हैं। जलसे को मोहम्मद मुहिब रजा खान कादरी, कारी यार मोहम्मद समेत अन्य उलमा ने खिताब किया।

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