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बदहाल हुआ जल निगम, दो महीने से न वेतन न पेंशन

विशेष संवाददाता- राज्य मुख्यालयअफसरों व कर्मचारियों की लम्बी चौड़ी फौज, पूरे सूबे में फैला कार्यक्षेत्र और भारी भरकम बजट के चलते कभी महत्वपूर्ण कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश जल निगम बदहाल हो गया है। नौबत यह आ गई है कि पिछले दो महीनों से इस निगम के करीब पन्द्रह हजार अफसरों व कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका है। न ही इसके करीब आठ हजार सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन ही मिल पाई है। पिछले करीब साढ़े पांच वर्षों से नियमित पूर्णकालिक चेयरमैन न होने की वजह से कामकाज में भी लगातार गिरावट आ रही है। हाल ही में पंचायती राज विभाग ने गांवों में हैंडपंप की रीबोरिंग के मामले में निगम का एकाधिकार भी खत्म कर दिया।पाइप के जरिए जलापूर्ति, हैंडपंप, सीवरेज व नदी प्रदूषण जैसे कामों का विशेषज्ञ माने जाने वाले जल निगम की कमान पहले किसी वरिष्ठ आईएएस अफसरों के जिम्मे होती थी। मगर पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में इसके चेयरमैन तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां बने। उत्तर प्रदेश जल निगम जल संस्थान मजदूर यूनियन के महामंत्री राम सनेही यादव आरोप लगाते हैं कि आजम ने अपने कार्यकाल में कभी भी इस निगम के कामकाज को बढ़ाने और इसे सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। श्री यादव के अनुसार सपा सरकार से पहले बसपा के कार्यकाल में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल इसके चेयरमैन थे। निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन व पेंशन पर हर महीने कुल 67.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। बीते दिसंबर में भी यही नौबत थी। उस वक्त वेतन और पेंशन न मिलने पर आंदोलन भी हुआ था। चार महीने के वेतन व पेंशन की बकायेदारी निपटाने के लिए मुख्य सचिव से हुई वार्ता के बाद 300 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त कर्ज के रूप में दिए गए थे।श्री यादव ने बताया कि निगम के विभिन्न संवर्गों के करीब डेढ़ दर्जन संगठनों को मिलाकर एक समन्वय समिति बनी है। शनिवार को इस समिति की बैठक बुलाई गई है। बैठक में एक बार फिर बकाया वेतन व पेंशन भुगतान, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने और निगम को सरकारी विभाग बनाने आदि मुददों पर विचार किया जाएगा।

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  • Web Title:Jal Nigam