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डेढ़ साल बाद भी पॉलीटेक्निक में नहीं शुरू हो हुए आईटीआई कोर्स

- इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के दोहरे इस्तेमाल के लिए मिली थी मंजूरी

- ज्यादा से ज्यादा छात्रों को शिक्षा से जोड़ने की थी कवायद

डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश के किसी भी पॉलीटेक्निक संस्थान में एक भी इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट(आईटीआई) कोर्स को मंजूरी नहीं मिली है। जुलाई, 2016 में आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन(एआईसीटीई) की ओर से सीमित संसाधनों में बिना किसी विशेष अतिरिक्त खर्च के ज्यादा से ज्यादा छात्रों को शिक्षित करने के लिए पॉलीटेक्निक संस्थानों में आईटीआई कोर्स चलाने की योजना पर मुहर लगाई थी, लेकिन डेढ़ साल बाद भी इस योजना जुड़ने के लिए एक भी आवेदन न आने से योजना ने दम तोड़ दिया है।

शिक्षा का लाभ सभी तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2016 में तत्कालिक सचिव प्रो. एपी मित्तल ने पॉलीटेक्निक संस्थानों में आईटीआई के संचालन संबंधी दोहरे कोर्स की कवायद शुरू की थी। ताकि, एक ही परिसर में संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो सके और ज्यादा विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ा जा सके।

पॉलीटेक्निक संस्थानों में आईटीआई शुरू होने वाली इस योजना को आज डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन एक भी पॉलीटेक्निक संस्था ने इसके लिए आवेदन नहीं किया है, जिसके चलते एआईसीटीई की मुहर के बाद किसी पॉलीटेक्निक में यह योजना शुरू नहीं हुई। एआईसीटीई की शर्त यह थी कि आईटीआई के कोर्स चलाने के लिए पॉलीटेक्निक में पर्याप्त स्थान हो और आवेदन करने वाले पॉलीटेक्निक संस्थान का निरीक्षण कराया जायेगा, जिसके बाद अनुमति मिलेगी।

इस व्यवस्था पर मुहर लगे काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई भी पॉलीटेक्निक संस्था इसके लिए आवेदन नहीं कर सकी है। वहीं, पॉलीटेक्निक अधिकारियों की मानें तो पॉलीटेक्निक संस्थानों में आईटीआई खोलने के लिए शासन की मंजूरी अभी तक नहीं मिल सकी है, जिसके चलते इस योजना ने दम तोड़ दिया है।

यह थी प्रक्रिया--

1- पॉलीटेक्निक संस्थानों को क्यूसीआई (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) के पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा।

2- आवेदन करने वालों की जांच कराई जायेगी।

3- क्यूसीआई आवेदन को डीजीटी भेजेगा।

4- डीजीटी की ओर से स्थलीय निरीक्षण कराया जायेगा।

5- निरीक्षण रिपोर्ट से संतुष्टïहोने पर रिपोर्ट एआईसीटीई भेजी जाएगी।

6- एनसीवीटी की बैठक में दुरुस्त पाए गए आवेदनों को मान्यता मिलेगी।

वर्जन

पॉलीटेक्निक संस्थानों से अभी तक प्रस्ताव नहीं मिला है। आवेदन करने के बाद भी संस्थानों में आईटीआई खोले जा सकते हैं। फिलहाल, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में एनसीवीटी और एससीवीटी पाठ्यक्रम संचालित है।

मयंक गंगवार, उपनिदेशक, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय।

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