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मजहब की सही व्याख्या और नए मुद्दों का समाधान विद्वानों की जिम्मेदारी

मजहब की सही व्याख्या और नए मुद्दों का समाधान विद्वानों की जिम्मेदारी

संक्षेप:

Lucknow News - लखनऊ में नदवातुल उलमा के तहत दो दिवसीय सेमिनार में मौलाना सैय्यद बिलाल अब्दुल हसनी नदवी ने इस्लाम के अनुसार नए मुद्दों का समाधान करने की जिम्मेदारी उलेमा पर रखी। मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने...

Sep 27, 2025 07:38 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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लखनऊ,कार्यालय संवाददाता इस्लाम एक कयामत तक मार्ग दर्शन करने वाला मजहब है, बदलते हालात में नए मुद्दे व समस्याएं सामने आती हैं। जिनका समाधान करना उलेमा, विद्वानों की जिम्मेदारी है। इस सिलसिले में उलेमा की कोशिश बहुत अहम और मूल्यवान है। ये बातें नदवातुल उलमा के प्रमुख मौलाना सैय्यद बिलाल अब्दुल हसनी नदवी ने नदवा में इस्लामी शरिया (कानून) अनुसंधान परिषद के तहत दो दिवसीय सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि मजहब की सही व्याख्या करना विद्वानों की जिम्मेदारी है। इसके लिए इल्म में गहराई के साथ-साथ विचारों में व्यापकता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक ने मजहब को आसान बनाया है।

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आधुनिक मुद्दों का समाधान करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह लोगों के लिए आसान हो। राष्ट्रीय सेमिनार में ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि अल्लाह के रसूल अंतिम नबी थे। नबूवत पूरी होने के फलस्वरूप इस उम्मत पर तीन जिम्मेदारियां आती हैं। पहली दावत और प्रचार, दूसरी यदि दीन में किसी तरह की रुकावट पैदा करने की कोशिश की जाए तो उसे दूर करना और हर तरह के शक व संदेह को दूर करना और तीसरी नई समस्याओं का दीन की रोशनी में समाधान करना और उसके लिए आपस में बैठकर सलाह मशविरा से एक मत रखना। यह सामूहिक एकजुटता बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि यह नई समस्याओं का युग है, राजनीतिक परिस्थितियां बहुत बदल गई हैं, जिन पर विचार करना विद्वानों की जिम्मेदारी है। नदवा के वरिष्ठ शिक्षक मौलाना जकारिया संभली ने कहा कि इस्लाम कुरान और हदीस पर आधारित है। हमें कुरान और हदीस से उन रत्नों को निकालना होगा जो नई समस्याओं के समाधान में रोशनी दें। मजलिस के सचिव मौलाना अतीक अहमद बस्तवी ने कहा कि नई समस्याओं पर मार्गदर्शन का काम बहुत ही नाजुक और बेहद जिम्मेदारी वाला है। यह काम केवल वही विद्वान कर सकते हैं जो समय की नब्ज के साथ-साथ शरीयत पर गहरी नजर रखते हों। इस मौके पर मजलिस द्वारा प्रकाशित लेखों के तीन संग्रहों का विमोचन किया गया। इस मौके पर नदवा के महासचिव मौलाना अम्मार अब्दुल अली हसनी नदवी, डॉ. मुहम्मद अली नदवी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के महासचिव मौलाना फजलुर्रहीम मुजद्दिदी, दारुल उलूम वक्फ देवबंद के प्रधानाचार्य मौलाना सुफियान कासमी, दारुल उलूम नदवत उलेमा के उप प्रधानाचार्य मौलाना अब्दुल अजीज, रामपुर से सांसद मौलाना मुहिबुल्लाह नदवी सहित देश भर से विद्वान उपस्थित थे।