आईपीएल के फर्जी टिकट बनाने वाले चार गिरफ्तार

Newswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - छत्तीसगढ़ के एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो आईपीएल के फर्जी टिकट बेच रहा था। चार आरोपियों को लखनऊ में पकड़ा गया, जिनमें से एक ने पॉलीटेक्निक डिप्लोमा किया है। आरोपी ऑनलाइन और स्टेडियम के आसपास फर्जी टिकट बेचते थे। इनसे एक युवक ने एक हजार रुपये में टिकट खरीदा, जो फर्जी निकला।

आईपीएल के फर्जी टिकट बनाने वाले चार गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, लखनऊ में गुरुवार के मैच में भी बेचा था फर्जी टिकट लखनऊ, संवाददाता।

चैट जीपीटी और कोरल ड्रॉ का इस्तेमाल करके आईपीएल के फर्जी टिकट हूबहू तैयार कर बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपी में एक युवक ने पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा कर रखा है, जबकि दूसरे इंटर पास आरोपी ने यूट्यूब व कोचिंग के जरिए टू व थ्री डी डिजाइनिंग व एलीवेशन का कोर्स कर रखा है। आरोपी ऑनलाइन और तमाम स्टेडियम के आसपास रहकर लोगों को फर्जी तरीके से तैयार किए गए आईपीएल के टिकट बेचते हैं।

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इकाना के बाहर उरई के युवक को बनाया शिकार

उरई के सुशील नगर निवासी प्रदीप सिंह लखनऊ इकाना स्टेडियम में गुरुवार को एलएसजी बनाम आरसीबी का मैच देखने पहुंचे थे। यहां पर प्रदीप ने स्टेडियम के बाहर मिले युवकों से आईपीएल मैच के दो टिकट खरीदे और यूपीआई से एक हजार रुपए भुगतान किया। प्रदीप जब उन टिकटों को लेकर स्टेडियम के गेट पर पहुंचे तो कर्मचारियों ने बारकोड जांच की। टिकट को फर्जी बताकर प्रदीप को स्टेडियम के अंदर नहीं जाने दिया। प्रदीप ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मामले की रिपोर्ट कराई।

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा, टू व थ्री डी का कोर्स किया

डीसीपी दक्षिण अमित आनंद ने बताया कि सुशांत गोल्फ सिटी की पुलिस ने दोदनखेड़ा चौराहा के पास से चारों आरोपी को पकड़ा। चारों छत्तीसगढ़ दुर्ग नेवई के निवासी हैं। इनमें स्नातक श्रीकांत बोरकर कार वॉशिंग का व्यवसाय और डिजाइनिंग कार्य करता है। नूतन कुमार साहू ने पॉलीटेक्निक से आर्किटेक्ट में डिप्लोमा किया है। वहीं, इंटर पास विश्वजीत साहू ने टू व थ्री डी डिजाइनिंग व एलीवेशन का कोर्स यूट्यूब और कोचिंग के जरिए सीखा है। चौथा आरोपी इंटर पास राजेंद्र चौधरी वॉशिंग का व्यवसाय करता है।

दिल्ली में फर्जी टिकट बेचने का प्रयास किया

गोसाईंगंज एसीपी रिषभ यादव ने बताया कि चारों सदस्य दूसरे राज्यों में स्टेडियमों के बाहर जाकर फर्जी टिकट बेचते थे। इन लोगों ने सोशल मीडिया से ओरिजनल टिकट की फोटो प्राप्त की। असली टिकटों की तरह एडिट और डिजाइन किया। चैट जीपीटी की सहायता से टिकट की साइज, पेपर की गुणवत्ता की जानकारी ली। फिर कोरल ड्रॉ एप्लीकेशन से फर्जी टिकट तैयार किए। आरोपी रायपुर में मैच देखने गए थे। वहां ब्लैक में इन लोगों ने आईपीएल का टिकट खरीदा था। वहां टिकट के जरिए स्टेडियम में आसानी से प्रवेश मिल गया। इस पर उन्होंने फर्जी टिकट बनाकर बेचने की योजना बनाई। सभी आरोपित चार मई को कार से दिल्ली में स्थित अरुण जेटली स्टेडियम गए थे। यहां भी उन्होंने फर्जी टिकट बेचने का प्रयास किया था। गुणवत्ता और बारकोड मैच न होने पर वह टिकट बेच नहीं सके। फिर सभी छह मई को लखनऊ पहुंचे। यहां एक होटल में ठहरे थे।

यूपीआई से रुपये लेने पर फंसे

सुशांत गोल्फ सिटी थाने के इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि पकड़े गए चारों आरोपियों के पास से लैपटॉप, आईपीएल मैच के 15 फर्जी टिकट, पेपरशीट पर छपे हुए 14 कूटरचित टिकट, पेपर कटर, कार, 13 प्लेन पेपर शीट, पासबुक, तीन एटीएम कार्ड, दो आधार व पैन कार्ड बरामद हुए है। आरोपियों ने यूपीआई से उरई के प्रदीप सिंह से एक हजार रुपये के फर्जी टिकट के लिए थे। इसी यूपीआई ट्रांजेक्शन से पुलिस ने आरोपी का नंबर प्राप्त किया। फिर उन्हें पकड़ा। ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने के लिए मुख्य रूप से श्रीकांत बोरकर के बैंक खाते का उपयोग करते थे। राजेंद्र चौधरी और श्रीकांत बोरकर का कार वॉशिंग के कार्य में मुनाफा नहीं हुआ तो आर्थिक तंगी और नया ऑफिस खोलने के लिए रुपए की जरुरत थी।

सामान्य प्रश्न

इस गिरोह के आरोपियों ने किस प्रकार के टिकट बेचे?
इस गिरोह ने आईपीएल के फर्जी टिकट बेचे।
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