मातृभाषा संस्कृति, पहचान और परम्परा की आधारशिला
Lucknow News - लखनऊ में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग ने मातृभाषा दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया। डॉ. आराधना अस्थाना ने मातृभाषा को संस्कृति और पहचान की नींव बताया। सलमान अंसारी ने मातृभाषा के संरक्षण पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। अन्य विद्वानों ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए।

लखनऊ, कार्यालय संवाददाता अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से विचार गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि डॉ. आराधना अस्थाना ने कहा कि मातृभाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान की मूल आधारशिला है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को सबसे प्रभावी ढंग से अपनी मातृभाषा में ही अभिव्यक्त कर सकता है। मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन से न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है, बल्कि समाज में वैचारिक समृद्धि भी सुनिश्चित होती है। परास्रानातक छात्र सलमान अंसारी ने मातृ भाषा के संरक्षण में योगदान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इस मौके पर डॉ. नसीब, डॉ. काजिम रिजवी तथा डॉ. विनय समेत अन्य उपस्थित रहे।
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