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वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिये साझा दृष्टिकोण की जरूरत-केन्द्रीय मंत्री

वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिये साझा दृष्टिकोण की जरूरत-केन्द्रीय मंत्री

संक्षेप:

Lucknow News - लखनऊ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में 52 देशों के न्यायविदों ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए साझा दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया और न्यायविदों से पृथ्वी की सुरक्षा के लिए एक नेटवर्क बनाने का आह्वान किया।

Nov 22, 2025 08:48 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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-सीएमएस में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में जुटे 52 देशों के न्यायविदों व कानूनविदों ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य की आवाज बुलन्द की लखनऊ, कार्यालय संवाददाता केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान प्रोद्योगिकी डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिये साझा दृष्टिकोण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तकनीक उन्नति अपने साथ नई कानूनी और नैतिक चुनौतियां भी लेकर आती है। ऐसे में स्वतंत्रता, सुरक्षा और गोपनीयता के बीच सही संतुलन बनाते हुए महासागर, साइबर दुनिया और अंतरिक्ष आदि नए क्षेत्रों के लिए कानूनों को बदलना और विकसित करना होगा। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सीएमएस में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में उपस्थित न्यायविदों का आह्वान किया कि एक ऐसा नेटवर्क बनाएं जो पृथ्वी की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर काम करें।

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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई मिशन पूरे किये हैं। जलवायु परिवर्तन को लेकर हमारी सरकार पूरी तरह से संजीदा है। एआई, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को लेकर सरकार भविष्य की योजनाओं पर कार्य कर रही है। डीप ओशन मिशन के तहत समुद्र की गहराइयों तक पहुंचने का काम किया है। नेशनल क्वांटम मिशन के तहत प्रौद्योगिकी के विकास की ओर अग्रसर हैं। साइबर सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, एआई और अंतरिक्ष सुधार समेत कई काम सरकार कर रही है। यह सम्मेलन में निजता बनाम निगरानी, स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वामित्व बनाम डेटा संरक्षण और एआइ-जनित गलत सूचनाओं के उदय आदि उभरती कानूनी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करेगा। अंतरिक्ष मलबा और बाह्य अंतरिक्ष खनन, गहरे समुद्र के संसाधनों का दोहन, सीमा पार जलवायु जवाबदेही और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों की राय के बाद जो साझा कार्यक्रम तैयार होगा। वो देशहित में होगा। अंतरिक्ष की गतिविधियों को जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ बढ़ाएं-शुभांशु भारतीय अन्तरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा कि पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है। इसकी सुरक्षा करना हम सबका सामूहिक दायित्व है। हमें जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर इमानदारी से सहयोग करना होगा। अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों को जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ बढ़ाना होगा। भावी पीढ़ी में ऐसी सोच और नैतिक समझ विकसित करने की जरूरत है जो वैश्विक चुनौतियों का रचनात्मक समाधान प्रस्तुत कर सकें। सीएमएस प्रबन्धक प्रो. गीता गांधी किंगडन ने कहा कि ‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51’ पर आधारित यह सम्मेलन एक नई उम्मीद जगाता है कि विश्व के सभी देश एकता व शान्ति स्थापना हेतु ठोस कदम उठायें और इस पुनीत कार्य में वर्ल्ड ज्यूडियशरी की महती भूमिका है। वर्ल्ड ज्यूड्यिशरी की संकल्प शक्ति विश्व में स्थायी शान्ति स्थापित कर सकती है। साउथ सूडान के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बेंजामिन बाक डेंग ने कहा कि सीएमएस के बच्चों की अपील को हमें नजरअन्दाज नहीं करना चाहिए। एंटीगा-बारबूडा की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष ऑस्बर्ट आर फ्रेडरिक ने कहा कि विश्व इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। सामूहिक रूप से ऐसे छोटे-छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे विश्व के उस हिस्से को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी लें। किर्गिज रिपब्लिक सुप्रीम कोर्ट के चेयरमैन मेडरबेक सत्येव ने भ्रष्टाचार-निरोधक एवं क्षमता-विकास कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। हैती सुप्रीम कोर्ट के वाइस-प्रेसीडेन्ट न्यायमूर्ति जीन-क्लाउड थियोजीन ने कहा कि वर्तमान समय के अशांत वैश्विक वातावरण में देशों को बल की बजाय तर्क और सार्वभौमिक मानवाधिकारों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अंगोला की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुश्री एफ़िगेनिया लीमा क्लेमेंटे, अमेरिका के न्यायमूर्ति डेनिएल फॉरेस्ट, ताजिकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चेयरमैन न्यायमूर्ति मिर्ज़ाज़ोदा रूस्तम समेत कई न्यायविदों विभिन्न पैरालल सेशन्स में जमकर चर्चा परिचर्चा की सीएमएस के बच्चों ने आंखों में पट्टी बांधकर रंग और वस्तुओं का पहचाना सीएमएस के दो विद्यार्थियों ने मिड ब्रेन एक्टिवेशन विधि की मदद से रंग और वस्तुओं की पहचान की। आंखों में पट्टी बांधकर किताब पढ़ी और मोबाइल के मैसेज भी पढ़े। इनमें सीएमएस राजाजीपुरम शाखा के 10 वीं के छात्र स्वास्तिक गुप्ता और सीएमएस गोमतीनगर द्वितीय शाखा की आठवीं की छात्रा आराध्या ने यह कारनामा कर दर्शकों की तालियां बटोरी। यह विधि बच्चों की संवेदी धारणा को बढ़ाती है। इसमें ये आंखें बंद करके भी रंग और वस्तुओं को पहचान सकते हैं।