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लखनऊ

वार्षिक शुल्क जमा नहीं होने पर मासूम छात्रा के साथ अमानवीय व्यवहार

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Newswrap
Fri, 24 Sep 2021 08:30 PM
वार्षिक शुल्क जमा नहीं होने पर मासूम छात्रा के साथ अमानवीय व्यवहार

-प्राइवेट स्कूल फीस के लिए बना रहे अभिभावकों पर दबाव

-इरम पब्लिक कॉलेज में छात्रा को एक घंटा परीक्षा से रोका

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

स्कूल खुलने के साथ ही प्राइवेट स्कूल प्रबंधनों की मनमानी शुरू हो गई है। फीस के लिए सिर्फ दबाव ही नहीं बनाया जा रहा है बल्कि मासूम छात्र-छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। छमाही परीक्षा में शामिल नहीं किए जाने की धमकी तक दी जा रही है। परीक्षा से पूर्व ही फीस या अन्य मद में बकाया शुल्क की वजह से विद्यार्थी को पूरी कक्षा के सामने शर्मिंदा करने के साथ ही एक-एक घंटे तक परीक्षा देने तक से रोक दिया गया। प्राइवेट स्कूल प्रबंधन की मनमानी से अभिभावक जहां परेशान हैं वहीं छोटे-छोटे बच्चे मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। बच्चे घर में गुमसुम रहने लगे हैं। जबकि शासन का सख्त आदेश है कि अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव नहीं बनाएं। साथ ही परीक्षा से वंचित करना या परीक्षा नहीं देने की धमकी देना भी शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाना है।

केस 1

इंदिरानगर स्थित इरम पब्लिक कॉलेज में कक्षा आठ की छात्रा को छमाही परीक्षा के अन्तर्गत हिन्दी की परीक्षा के दौरान पूरी क्लास के सामने शर्मिंदा किया गया। छात्रा से कहा गया कि तुम्हार वार्षिक शुल्क नहीं जमा है इसलिए तुम परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती। इसके साथ मासूम छात्रा के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए उसे क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। छात्रा शिक्षिका से मिन्नते करती रहीं लेकिन शिक्षिका का दिल नहीं पसीजा। जब छात्रा ने कहा कि पिता जी ने फीस जमा करने आ रहे हैं, उसके काफी देर बाद छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। इस दौरान छात्रा का एक घंटा खराब होने के साथ ही उसे मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा। इस सम्बंध में कॉलेज की प्रधानाचार्या जवाब देने से बचती रहीं। कई बार फोन करने के बावजूद मीटिंग में होने की बात कहती रहीं और कोई जवाब नहीं दिया।

केस-2

इंदिरानगर स्थित सेंट मैरी स्कूल में कक्षा दो और चार में पढ़ने वाले दो छात्रों को स्कूल प्रबंधन ने भरी क्लास में बेइज्जत किया। यहां बच्चों से अन्य छात्रों के सामने कहा गया कि तुम्हारी फीस नहीं जमा है इसलिए छमाही की परीक्षा में शामिल नही हो पाएंगे। बच्चों ने घर जाकर अपने अभिभावकों को ये बात बतायी। अभिभावकों ने स्कूल जाकर विरोध भी दर्ज कराया। एक अभिभावक ने कहा कि इतने छोटे बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कहां का नियम है। इस सम्बंध में स्कूल प्रबंधन को कोई बार फोन मिलाया गया लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

डीआईओएस बोलीं:

फीस के लिए दबाव बनाना या फीस जमा नहीं होने के कारण परीक्षा से वंचित करना नियमों का उल्लंघन है। अभिभावकों को आगे आकर शिकायत करना चाहिए। कार्रवाई की जाएगी। दोनों स्कूलों से जवाब भी तलब किया जाएगा।

रीता सिंह, प्रभारी डीआईओएस

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