बोले लखनऊ : गाजीपुर की गलियां गंदगी से पटीं, दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर लोग
Lucknow News - इंदिरानगर सी-ब्लॉक गाजीपुर गांव के निवासी गंदगी, टूटे रास्तों और लटकते बिजली के तारों से परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम और पार्षद से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गली की मरम्मत, सफाई व्यवस्था और बिजली के खंभे लगाने की मांग की जा रही है।
इंदिरानगर सी-ब्लॉक गाजीपुर गांव से दुर्गा मंदिर की ओर जाने वाला 100 मीटर का रास्ता घोर बदहाली का शिकार है। यहां जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, सिल्ट से भरी नालियां, और बल्लियों पर लटकते-झूलते बिजली के तार स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। वहीं करीब दो साल पहले पाइप लाइन बिछाने के लिए गलियां खोद डाली गई, लेकिन अभी तक नहीं बनी। परेशान लोगों ने क्षेत्रीय पार्षद से लेकर नगर निगम के अधिकारियों तक बार-बार शिकायतें की हैं। उन्होंने महापौर और विधायक को भी पत्र लिखे, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने ‘बोले लखनऊ’ अभियान के तहत इस मार्ग की पड़ताल की।
पेश है रिपोर्ट- शहर की सबसे पॉश कॉलोनियों में गिनी जाने वाली इंदिरा नगर के सी-ब्लॉक स्थित गाजीपुर गांव में मूलभूत नागरिक सुविधाओं की भारी कमी है। स्थानीय निवासियों को गंदगी और अव्यवस्था के बीच जीवन गुजारने को मजबूर होना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग पर अक्सर कूड़े का ढेर लगा रहता है, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए भारी परेशानी खड़ी होती है। इस गंदगी के कारण पूरे दिन मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय निवासी सफाई व्यवस्था को लेकर बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आते हैं, और अगर कभी आ भी जाते हैं तो बिना झाड़ू लगाए चले जाते हैं। स्थानीय निवासी उमा जायसवाल, रामू वर्मा और दिनेश सहित अन्य लोगों ने क्षेत्रीय पार्षद से लेकर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। इन निवासियों ने नगर निगम से जल्द से जल्द ‘डोर-टू-डोर’ कूड़ा कलेक्शन शुरू करने की मांग की है, ताकि इस बदहाल स्थिति से छुटकारा मिल सके। स्थानीय निवासी इरफान ने तो यहां तक कह दिया कि गंदगी के कारण उनके यहां लोग रिश्ते के लिए भी नहीं आते हैं, जिससे उनकी पीड़ा साफ झलकती है। एक अन्य निवासी सुमित निषाद और गीता ने टूटे पत्थरों से भरी और बजबजाती नालियों की शिकायत की। सुंदारा ने सीवर ओवरफ्लो होने और बदबू के बीच जीने की मजबूरी बताई, साथ ही नगर निगम से गरीब बस्तियों को भी सुविधाएं देने की मांग की। बांस-बल्लियों के सहारे लटक रहे बिजली के तार गाजीपुर में दुर्गा मंदिर के पास स्थित एक संकरे रास्ते पर बिजली के तारों की खतरनाक स्थिति ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। इस मार्ग पर बिजली के खंभे नहीं लगाए गए हैं, जिसके कारण कई जगहों पर बांस और बल्लियों के सहारे बिजली के तार दौड़ाए जा रहे हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ये तार कई जगह पर काफी नीचे लटक रहे हैं, जिससे हर वक्त बड़े हादसे का डर बना रहता है। स्थानीय निवासी ऊषा निषाद, दिनेश, सुधीर श्रीवास्तव, योगेश राजपूत ने बताया कि आए दिन ये जर्जर तार टूटकर गिर जाते हैं, और शॉर्ट सर्किट के कारण कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। यह व्यवस्था कॉलोनी के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर बारिश के मौसम में। स्थानीय निवासियों ने कई बार लेसा अधिकारियों से शिकायत की है। लोगों ने जल्द से जल्द खंभे लगाकर इन खतरनाक लटकते तारों को ठीक करने की मांग की है, लेकिन शिकायत के बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान प्रत्येक घर से 200-250 रुपये वसूली की गई। दो साल से खुदी पड़ी गली, मरम्मत न होने से बढ़ी परेशानी क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए करीब दो साल पहले खोदी गई गली की मरम्मत न होने से स्थानीय निवासी भारी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। गली में गड्ढों और मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। गली की खराब स्थिति के कारण बाइक और स्कूटी सवारों को संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। मजबूरी में कॉलोनी के ज्यादातर निवासियों को अपने वाहनों को घर से काफी दूर खड़ा करना पड़ता है और पैदल घर तक आना पड़ता है। स्थानीय निवासी अभय, संतोष, अनिल, मेवा लाल और द्वारिका प्रसाद ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बारिश के मौसम में यह गली कीचड़ के दलदल में बदल जाती है। इस दौरान पैदल चलना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है। निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग से गली की मरम्मत कराने की गुहार लगाई है, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निवासियों ने प्रशासन से तुरंत गली का पक्का निर्माण कराने की मांग की है ताकि रोजमर्रा की समस्याओं से छुटकारा मिल सके। गलियों में पुरानी टाइल्स लगाई जा रही स्थानीय निवासी अमन वर्मा ने विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गाजीपुर गांव की गलियों में पुरानी इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जा रही हैं, जबकि अन्य स्थानों पर नई टाइल्स का उपयोग हो रहा है। अजय कुमार लोधी ने बताया कि इंदिरा नगर का सी-ब्लॉक उनकी जमीनों पर बसाया गया, लेकिन उन्हें ही उपेक्षित छोड़ दिया गया है। -------------- खाली प्लॉटों पर कूड़े के ढेर दुर्गा मंदिर के ठीक सामने स्थित एक खाली प्लॉट स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है। यह प्लॉट आज कूड़े के एक विशाल ढेर में तब्दील हो गया है। स्थानीय निवासी ऊषा जायसवाल ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि इस कूड़े के ढेर के कारण उनके जीवन पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी भयानक हो जाती है। असहनीय दुर्गंध से जीना मुहाल हो जाता है। उन्होंने बताया कि यह कूड़े का ढेर केवल बदबू तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने जंगली और खतरनाक जीवों का बसेरा बन गया है। कई बार तो सांप और बिच्छू हमारे घरों के भीतर घुस आते हैं। नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो दो बार अपने निजी खर्चे पर इस जगह की सफाई करवाई है, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। ----------------- बदहाल पार्क का सौंदर्यीकरण कराया जाएं मुख्य मार्ग पर स्थित एक पार्क, जिसे स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन और विश्राम का केंद्र होना चाहिए था, वह भी पूरी तरह से बदहाली का शिकार है। स्थानीय निवासी हिमांशु रावत, रेनू और संदीप पाठक, राधेश्याम ने बताया कि पार्क में न तो बैठने के लिए कोई बेंच है, न ही बच्चों के खेलने के लिए कोई झूले लगे हैं। विडंबना यह है कि सौंदर्यीकरण और हरियाली की जगह, इस पार्क के एक कोने पर भी कूड़े का ढेर जमा हो गया है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि लगभग दो साल पहले इस पार्क में एक नलकूप तो लगाया गया था, लेकिन इसके बाद पार्क के सौंदर्यीकरण या रखरखाव के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के चलते यह पार्क आज एक उपेक्षित और अनुपयोगी स्थान बन कर रह गया है। बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित और साफ जगह नहीं मिल रही है, वहीं बुजुर्गों को भी सुबह-शाम टहलने या बैठने की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। ----------------- नगर निगम की अनदेखी, लोग खुद कर रहे नालियों की सफाई नालियों की सफाई न होने से भी स्थानीय निवासी त्रस्त हैं। सफाई व्यवस्था चरमरा जाने के कारण लोगों को गंदे पानी की निकासी न होने की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी जय सिंह ने बताया कि नालियों की गंदगी के कारण जल-जमाव होता रहता है, जिससे मच्छर पनपते हैं और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के कर्मचारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन जब उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो हमें खुद ही फावड़ा उठाना पड़ा और नालियों की सफाई करनी पड़ी। ----------------- प्रमुख समस्या - मुख्य सड़क पर कूड़े का ढेर है - नालियां बजबजाने से गंदा पानी गलियों में बह रहा - बांस-बल्लियों के सहारे लटक रहे बिजली के तार - दो साल से गली खुदी होने से लोगों को हो रही परेशानियां - नगर निगम के कर्मचारी नियमित सफाई करने नहीं पहुंचते प्रमुख सुझाव - सफाई कर्मचारी नियमित कूड़े का ढेर हटाएं - डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाए - नालियों की सफाई की जाएं - खुदी सड़क की मरम्मत कराई जाएं - बांस-बल्लियों को हटाकर बिजली के खंभों से कनेक्शन दिया जाएं ---------------- इंफो वार्ड का नाम- मैथिलीशरण गुप्त वार्ड संख्या- 77 आबादी- 15 हजार ---------------- पार्षद का पक्ष इंदिरानगर सी-ब्लॉक गाजीपुर में सीवर व पानी की समस्या दूर की गई है। कूड़ा उठाने के लिए दो कर्मचारी है। गली निर्माण का काम जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। अशोक कुमार उपाध्याय पार्षद, मैथिलीशरण गुप्त वार्ड ---------------- लोगों की पीढ़ा गाजीपुर गांव के मोड़पर लोग कूड़े का ढेर लगा है। आसपास के लोग यहीं पर आकर कूड़ा डाल जाते हैं। हम लोगों को चलना फिरना मुश्किल हो गया है। ऑनलाइन शिकायत भी की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। उमा जायसवाल यहां पर कूड़ेदान को सड़क पर रख दिया गया है। लोग कूड़ा दान के स्थान पर सड़क पर ही कूड़ा फेंक देते हैं। कूड़ा उठता ही नहीं है। यहां डोर टू डोर कूड़े की उठान होनी चाहिए। हम लोग बहुत परेशान हैं। मधुर गाजीपुर गांव की गलियों में पुरानी इंटरलाकिंग टाइल्स ही लगायी जा रही हैं। जबकि अन्य स्थानों पर नई टाइल्स लगायी जा रही हैं। पूछो तो कोई जवाब ही नहीं मिलता। गांव में और भी कोई कार्य नहीं होते हैं। अमन वर्मा कॉलोनियों में तो झाडू लगती है लेकिन हमारी पुरानी बस्ती में झाडू लगाने कोई नहीं आता। यहां कभी -कभी कूड़ा बिनने वाले आते हैं वहीं झाडू लगाते हैं। साफ-सफाई का हाल बहुत बुरा है। बबलू कश्यप हमारी बस्ती की नालियां भरी पड़ी हैं। नालियों के ऊपर के पत्थर टूट गए हैं। पानी की टंकी भी लीक कर रही है। पानी बहता रहता है। बस्ती में तार लटक रहे हैं। नगर निगम की ओर से कोई इस ओर ध्यान नहीं देता। सुमित निषाद हम लोग गंदगी के बीच जीने को मजबूर हैं। सड़क से लेकर गलियों तक गंदगी फैली है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। आलम यह है कि गंदगी देखकर हमारे यहां लोग रिश्ते के लिए नहीं आते हैं। इरफान गाजीपुर गांव में झाडू नहीं लगती है। यहां केवल मुख्य सड़क पर ही सफाई होती है। हमारी बस्ती में कोई सफाईकर्मी नहीं आता है। तारों का मकड़जाल गलियों में फैला है। जो हमारे लिए खतरा साबित हो रहा है। दिनेश हमारी गलियों में बिजली के तार झूल रहे हैं। किसी तरह से लोगों ने बल्लियों के सहारे उनको रोका है। तार कई जगह से कटे हुए हैं। बहुत डर लगता है। इन तारों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। ऊषा निषाद नालियां बजबजा रही हैं। सीवर अक्सर ओवरफ्लो हो जाता है। गंदगी नालियो में बहती है। हम सभी बदबू के बीच जीने को मजबूर हैं। नगर निगम को कॉलोनी के साथ ही हम गरीबों की बस्ती में भी सुविधा देनी चाहिए। सुंदारा साफ सफाई न होने से हमारे यहां कई तरह की बीमारियां पनप रहीं हैं। नालियों की सफाई भी नहीं होती है। नालियों के पत्थर टूट गए हैं। इनको बदला जाये और नालियों और सीवर की सफाई की जाए। गीता हमारी बस्ती में बिजली के तारों का जंजाल फैला है। तार जमीन को छू रहे हैं। किसी तरह से इधर उधर बांध कर उनको रोका गया है। सड़क भी महीनों खुदी पड़ी रही लोगों को स्वयं ही बनानी पड़ी। सुधीर श्रीवास्तव नगर निगम के लोग कभी नालियों की सफाई करने नहीं आते हैं। हम लोगों को स्वयं ही नालियां साफ करनी पड़ती हैं। बिजली के तारों को बांस बल्ली के सहारे रोका गया है। योगेश राजपूत इंदिरा नगर का सी-ब्लाक हमारी जमीनों पर बसाया गया है और हम लोगों को उपेक्षित छोड़ दिया गया है। कोई सुविधा नहीं दी गई है। न तो सार्वजनिक शौचालय है, न ही शादी घर बना है। स्कूल भी नहीं है। अजय कुमार लोधी हमारी गली में पानी की लाइन ही नहीं डाली गई। मजबूरी में ट्यूवेल से पानी भरते हैं। नालियों की सफाई करने भी कोई नहीं आता। हम सभी को स्वयं ही नालियां साफ करनी पड़ती है। रेनू गाजीपुर में कलराज मिश्र जी जब विधायक थे उस समय सीवर लाइन पड़ गई थी। इधर पानी की लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़क को गई गलियों में अभी तक बनाया नहीं गया है। पूरे गांव में लाइन भी नहीं पड़ी है। संदीप पाठक पार्क तो हैं लेकिन इसके विकसित नहीं किया गया है। पार्क को विकसित किया जाए। पौधे लगाए जाएं। बस्ती में एक सार्वजनिक शौचालय भी बनवाया जाए। साफ सफाई के लिए उचित व्यवस्था की जाए। राधेश्याम प्रस्तुति: सुमित गुप्ता, आशीष गुप्ता राजे, फोटो: रितेश यादव

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