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कुम्भ के कोने-कोने में दिखेगी भारतीय संस्कृति, पढ़िए किन प्रतीक चिह्नों का होगा इस्तेमाल 

कुम्भ मेले के मौके पर न सिर्फ भारतीय संस्कृति प्रयागराज के चप्पे-चप्पे पर नजर आएगी बल्कि स्वागत के लिए लगाये जाने वाले गेट भी कुछ खास होंगे। कुम्भ मेले में इस बार थीम आधारित गेट लगेंगे जिसमें नंदी, स्वास्तिक, डमरू व शंख आदि प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल होगा।
प्रयागराज में कुल 30 गेट लगाये जाएंगे, जिनमें कुम्भ के मुख्य लोगो के अलावा भारतीय संस्कृति के अन्य प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल होगा। इसमें गदा, कौस्तुभ, कामधेनु, लक्ष्मी, ओम, शिवलिंग, नाग वासुकी, रुद्राक्ष, अश्व, कलश, सूर्य, कमल, चंद्र, सुदर्शन चक्र, समुद्र मंथन जैसी चीजें दिखेंगी। ये सभी गेट एक दिसम्बर तक लगा दिये जाएंगे ताकि यहां कुम्भ मेले की रौनक महसूस की जा सके। ये गेट यहां 15 मार्च तक लगे रहेंगे और बनाने वाली कम्पनी को इसकी देखभाल भी करनी होगी। कुम्भ जनवरी से शुरू होगा। 
संस्कृति ग्राम में देखा जा सकेगा भारत का क्रमिक विकास: वहीं यहां पर संस्कृति गांव भी बसाया जाएगा। इसमें सिंधु घाटी की सभ्यता, रामायण, महाभारत, बुद्ध, जैन से लेकर गुप्त, मौर्य काल समेत भारत के पूरे इतिहास को एक जगह दिखाया जाएगा। सारे कालों का सचित्र वर्णन होगा। इसमें एक गैलरी बनाई जाएगी, जहां क्रमवार देखा जा सकेगा कि भारत की संस्कृति किन-किन कालों से होकर गुजरी है। आर्ट गैलरी में सबसे पहले सिंधु घाटी की सभ्यता, फिर वैदिक काल, बुद्ध व जैन काल, मौर्य व शुंग काल, कुषाण, गुप्त काल, वर्धन राजवंश, चंदेल, मध्यकालीन युग (चोला/चालुक्य व पल्लव), विजयनगर, भक्ति आंदोलन, इंडो इस्लामिक, मुगल काल, मराठा और इसके बाद 1857 के गदर की कहानियां होंगी। हर काल की गैलरी अलग होगी। 

वॉटर स्पोर्ट्स का मजा भी लिया जा सकेगा कुम्भ में

सिर्फ भारत की सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के रोमांचक वॉटर गेम्स का मजा भी यहां लिया जा सकेगा। वॉटर स्पोर्ट्स के लिए भी यहां तैयारियां चल रही हैं। कुम्भ में आने वाले मेहमान रोमांचक खेलों का मजा ले सकेंगे। वहीं यहां पर टेंट सिटी भी बसाई जा रही है और तरह-तरह के फूड कोर्ट भी लगाए जाएंगे ताकि पर्यटक पूरे देश भर के व्यंजनों का मजा एक जगह उठा सकें।   

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  • Web Title:Indian culture will be seen in the corner-corner of Kumbha