प्रत्येक विवि के शिक्षक स्टार्टअप से जुड़ी टीमें बनाएं
Lucknow News - भारत की अर्थव्यवस्था बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़ी है। बीबीएयू में हुई कार्यशाला में डॉ. यासिर अब्बास जैदी ने कहा कि शोध को सुरक्षित करने के लिए आईपीआर जरूरी है। प्रो. राज कुमार मित्तल ने हर फैकल्टी से पेटेंट विकसित करने का आह्वान किया। आईपीआर नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगा।

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़ी होती है। भारत शोध के क्षेत्र में तो मजबूत है, लेकिन उस शोध को सुरक्षित रखने और उसका सही उपयोग करने की समझ आईपीआर के माध्यम से मिलती है। पहले भारतीय स्वामी विवेकानंद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईपीआर का प्रभावी उपयोग किया। ये जानकारी सोमवार को बीबीएयू में बौद्धिक संपदा अधिकारी पर आयोजित कार्यशाला में एग्जामिनर ऑफ पेटेंट डिजाइन एंड नीपैम ऑफिसर डॉ. यासिर अब्बास जैदी ने कहीं। उन्होंने से आह्वान किया कि संकाय सदस्य प्रत्येक विश्वविद्यालय में स्टार्टअप से जुड़ी टीमों का गठन करें। हर संस्थान से अनेक स्टार्टअप उभर सकें।
इस दिशा में ठोस पहल की जाए, तो वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने में आईपीआर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बीबीएयू कुलपति प्रो.राज कुमार मित्तल ने कहा कि प्रत्येक फैकल्टी सदस्य कम से कम एक पेटेंट अवश्य विकसित करे। जिसमें शोध, उद्योग और समाज के बीच सेतु स्थापित हो सके। भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके। आईपीआर जैनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट आदित्य कुमार शर्मा ने कहा कि आईपीआर न केवल हमारे अधिकारों का संरक्षण करता है। बल्कि नवाचार और शोध को आगे बढ़ाने के लिए एक नया आत्मविश्वास भी उत्पन्न करता है। उन्होंने देश में सकारात्मक बदलाव लाने वाले पांच प्रमुख स्तंभ अर्थव्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुदृढ़ अवसंरचना, प्रभावी प्रणाली तथा सशक्त और जीवंत ज्ञान पर बात की। इस मौके पर विवि की प्रो. सुनीता मिश्रा, आईआईसी अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा समेत अन्य ने विचार रखे।
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