आत्मबोध और अस्तित्व की दार्शनिक यात्रा पर ले गया पूर्णावतार
Lucknow News - -बीएनए के स्वर्ण जयंती समारोह में नाटक पूर्णावतार का मंचन लखनऊ, कार्यालय संवाददाता

भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में राज बिसारिया प्रेक्षागृह में दिल्ली के क्षितिज थिएटर ग्रुप द्वारा नाटक पूर्णावतार का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रमथनाथ बिशी के मूल उपन्यास पर आधारित इस प्रयोगात्मक नाटक का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रंगकर्मी भारती शर्मा ने किया है।करीब 1 घंटा 45 मिनट की इस प्रस्तुति की कहानी जरा नामक एक शिकारी की अन्तर्मन की यात्रा पर आधारित है। वह अनजाने में अपने ही सौतेले भाई भगवान कृष्ण की मृत्यु का कारण बन जाता है, जिसके बाद वह गहरे अपराधबोध और मुक्ति की बेचैन खोज में निकल पड़ता है।
नाटक का मुख्य संदेश यह है कि पलायन केवल एक भ्रम है और मनुष्य को शांति तभी मिलती है जब वह अपने भीतर के सत्य का सामना करता है। समय के भेद को मिटाकर भूत, वर्तमान और भविष्य को एक निरंतरता में देखना ही इस नाटक का सार बना। मंच पर अभिनेता वैभव त्रिपाठी ने जरा की मुख्य भूमिका में अपराधबोध से आत्मबोध तक के सफर को जीवंत कर दिया। उनके साथ शशिकांत वत्स (वासुदेव), आशीष शर्मा (चार्वाक) और हर्ष यादव (मुनि) ने अपने सधे हुए अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। महिला पात्रों में काव्या सजीव (रत्ना), कनिष्का (रानी) और तनिषा तिवारी (मदिरा) ने कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती प्रदान की। अन्य सहयोगी कलाकारों में राजा पांडे, मोहन पटेल, शिवम पांडे, निखिल रांगेरा और कमल यादव ने विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से नाटक को गति दी। ऋषि मिश्रा के संगीत संचालन ने इस दार्शनिक प्रस्तुति को एक दृश्य काव्य में बदल दिया, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
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