सोना-चांदी महंगा होने से सोलर पैनल, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कारों की लागत बढ़ेगी
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी ने टेक और ऑटो सेक्टर पर असर डालना शुरू कर दिया है। सोलर पैनल, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों की लागत में वृद्धि की संभावना है। चांदी की महंगाई से छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतें 5 से 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में आ रही तेजी ने केवल आभूषण प्रेमियों या निवेशकों की ही नींद नहीं उड़ाई है, बल्कि अब इसका सीधा असर टेक और ऑटो सेक्टर पर भी पड़ने वाला है। सोना और चांदी केवल आभूषण के लिए नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनिवार्य हिस्से हैं। कीमतों में इस उछाल का असर भविष्य में सोलर पैनल, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों की लागत में वृद्धि के रूप में दिखाई देगा। सोलर पैनल की सेल बनाने में चांदी का उपयोग किया जाता है। चांदी की वैश्विक मांग का एक बड़ा हिस्सा अकेले सौर ऊर्जा क्षेत्र से आता है। चांदी की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर सोलर पैनल के निर्माण की लागत को बढ़ा देगा। सोलर एजर्जी वेंडर एसोसिएशन के सदस्य पंकज कुमार ने बताया कि सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से सरकार के ‘नेट जीरो’ लक्ष्यों और आम आदमी के लिए सौर ऊर्जा को सस्ता बनाने की मुहिम को झटका लग सकता है। साथ ही सेमीकंडक्टर चिप की मैन्युफैक्चरिंग में भी चांदी का इस्तेमाल होता है, जिससे पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री प्रभावित होगी。
स्मार्टफोन, लैपटॉप और गैजेट्स होंगे महंगे
चिप की किल्लत और कच्चा माल महंगा होने से पहले ही 40 फीसदी तक स्मार्टफोन, लैपटॉप महंगे हो गये हैं, लेकिन अब सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से दाम तीन लाख रुपये प्रतिकिलो पहुंच गया है। सोने की विशेषता यह है कि इसमें जंग नहीं लगता और यह बिजली का उत्कृष्ट संवाहक है। इससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट के मदरबोर्ड के सूक्ष्म सर्किट में सोने की बेहद पतली परत का उपयोग होता है। इसके अलावा चार्जिंग पोर्ट और अन्य डिजिटल कनेक्टर्स में सोने की प्लेटिंग की जाती है ताकि डेटा और बिजली का प्रवाह बिना किसी बाधा के हो सके। सोने की बढ़ती कीमतें इन उपकरणों की उत्पादन लागत को कई गुना बढ़ा देंगी।
डिजिटल घड़ी, जीपीएस सिस्टम भी होगा महंगा
रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले डिजिटल उपकरणों जैसे कैलकुलेटर, डिजिटल घड़ियों और जीपीएस सिस्टम में चांदी का व्यापक उपयोग होता है। इन उपकरणों के स्विच और इंटरनल सर्किट में चांदी के बिना उच्च सटीकता प्राप्त करना कठिन होता है। चांदी महंगी होने से छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों में 05 से 10 फीसदी तक की वृद्धि की संभावना है।
इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ेगी लागत
भविष्य की सवारी मानी जाने वाली इलेक्ट्रिक कारें भी इस महंगाई से अछूती नहीं हैं। एक सामान्य पेट्रोल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार में चांदी का उपयोग कहीं अधिक होता है। कार की इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ईसीयू) में चांदी का उपयोग होता है। बैटरी की कार्यक्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सिस्टम में चांदी के कोटिंग वाले तार और घटक लगते हैं। कारों के टचस्क्रीन और स्मार्ट फीचर्स भी चांदी की सुचालकता पर निर्भर करते हैं। इससे ईवी गाड़ियों को खरीदना आम आदमी के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
कारोबारी बोले-
चिप की किल्लत और कच्चा माल महंगा होने से पहले ही स्मार्टफोन महंगे हो गये हैं, लेकिन अब चांदी के दाम बढ़ गए हैं। इससे स्मार्टफोन के दाम अभी और बढ़ने की उम्मीद है।
रतन मेघानी
उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सेल्युलर एसोसिएशन
इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी में चांदी का उपयोग होता है, लेकिन कस्टम ड्यूटी बढ़ने से लागत बढ़ेगी। जिससे आने वाले दिनों में टू-व्हीलर और फोर व्हीलर गाड़ियों के दाम बढ़ेंगे।
राहुल, इलेक्ट्रिक व्हीकल शोरूम
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