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ऐसा ही रहा तो गौरैया फिर फुदकेगी घरों में

लखनऊ। घर में आती जाती चिड़िया सबके मन को भाती चिड़िया

ऐसा ही रहा तो गौरैया फिर फुदकेगी घरों में
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊMon, 20 Mar 2023 01:45 AM
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लखनऊ।

घर में आती जाती चिड़िया

सबके मन को भाती चिड़िया

तिनके लेकर नीड़ बनाती

अपना घर परिवार सजाती

दाने चुन चुन लाती चिड़िया

सबके मन को भाती चिड़िया....

गौरैया पर ऐसी बाल कविताएं लिखी जानी बंद सी हो गई थीं। गौरैया का कुनबा बढ़ने से फिर ऐसी ही बाल कविताएं लिखी जानी शुरू हो गई हैं। बच्चे भी अब गौरैया को पहचानने लगे हैं। घरों में दाना-पानी, बने बनाए घरौंदे और पेड़ों की छांव होने से फिर गौरैया का कुनबा धीमे-धीमे बढ़ रहा है। दस साल पहले जहां लखनऊ में सिर्फ 2503 गौरैया बचीं थीं अब उनकी संख्या बढ़कर 16103 हो गई। जिस तरह प्रकृतिप्रेमी जागरूक हो रहे हैं उसे देखते हुए इनकी संख्या इस बार होने वाली गणना में 20 हजार पार कर जाएगी।

‘हिन्दुस्तान ने विश्व गौरैया दिवस पर जब गौरैया के बढ़ते कुनबे का कारण जानने की कोशिश की तो घरों की इस जानी पहचानी नन्ही चिड़िया के प्रति लोगों की सहानुभूति और जागरुकता दिखी। लखनऊ में कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपने घरों में चिड़ियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम किया। उनके लिए घरौंदे बनाए। उन्हें धूप से बचाने के लिए पेड़-पौधे लगाए।

इनसे बढ़ रहा है गौरैया का कुनबा

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ओम बांटती हैं बर्ड हाउस और मिट्टी के बर्तन

गोमतीनगर की रहने वाली चैतन्य फाउण्डेशन की सचिव ओम सिंह पिछले सात-आठ वर्षों से गौरैया को संरक्षण देने के काम में लगी हैं। पहले तो उन्होंने अपने और आसपास के पार्कों में बर्ड हाउस लगाए। मिट्टी के बरतनों में उनके लिए काकून (दाना) और पानी रखा। इन्हें चुगने के लिए गौरैया के झुण्ड आने लगे। इसके बाद उन्होंने लोहिया पार्क, जनेश्वर मिश्र पार्क, बेगम हजरत महल पार्क, ठण्डी पार्क, झण्डीवाला पार्क में बर्ड हाउस लगाए। चिड़ियों के दाना-पानी का इंतजाम किया। अब वह स्कूलों में जाकर बच्चों को गौरैया के बारे में जानकारी देती हैं। बच्चों को बर्ड हाउस और मिट्टी के बर्तन बांटती हैं। ओम सिंह ने बताया कि लोगों में अब गौरैया के प्रति जागरुकता बढ़ रही है। लोग घरों में चिड़ियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम कर रहे हैं। यही कारण है कि इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

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चिड़िया के एक बच्चे ने बढ़ा दिया प्यार

गोमतीनगर विस्तार में रहने वाली 13 वर्षीय संजीवनी स्कूल जाने से पहले चिड़ियों के लिए काकून और पानी रखकर जाती हैं। बालकनी में लताओं के अलावा अन्य पेड़ भी लगा रखे हैं। इन पर दिन भर गौरैयो का झुण्ड रहता है। चिड़िया दाना चुगतीं और अपनी नन्हीं चोंच से पानी पीती हैं। संजीवनी ने बताया कि चार साल पहले गौरैया के एक बच्चे को कौवे चोंच मार रहे थे। वह इस बच्चे को घर में ले आईं। उसे पानी में मिलाकर आटा खिलाया। उसके लिए घास का एक घर बनाया। बच्चा दुरुस्त होकर उड़ गया। इसके बाद से उनका चिड़यों के प्रति प्रेम बढ़ गया। इस समय सिर्फ गौरैया ही नहीं कई अन्य तरह की चिड़िया भी उनकी बालकनी में दाना चुगने आती हैं।

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सलेमपुर हाउस तो गौरैया हाउस बन गया है

राजा नवाब अली खान की ऐतिहासिक कोठी यानी कैसरबाग स्थित सलेमपुर हाउस अब बर्ड हाउस बन गया है। मौजूदा समय इस कोठी में तीन बड़े परिवार रहते हैं। इनके परिवार के सदस्य, नौकर-चार की बड़ी संख्या है। भीतर पेड़-पौधों से हरियाली है। हर किसी ने गौरैया समेत अन्य चिड़ियों के लिए लकड़ी, मिट्टी के घरौंदे बना रखे हैं। सुबह और शाम को दाना-पानी रखा जाता है। सुबह से तरह-तरह की चिड़ियों की चहचहाट शुरू हो जाती है। यह दिन भर लगी रहती है। यहां रहने वाली आरिफ हुसैन ने बताया कि उनके बचपन में बहुत चिड़ियां आती थीं। मकान की मरम्मत हुई, सीमेंट का प्लास्टर हुआ तो उनका आना कम हो गया। फिर सभी ने चिड़ियों के लिए माहौल तैयार करना शुरू किया। उनके लिए घरौंदे बनाए। दाना-पानी का इंतजाम किया। अब खूब चिड़ियां आती हैं।

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तो इसलिए खत्म होने की कगार पर पहुंची थी गौरैया

गौरैया संरक्षण की दिशा में अरसे से काम रही लखनऊ विश्वविद्यालय की डा. अमिता कनौजिया ने बताया कि दरअसल हम विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते आ रहे हैं। पेड़ खत्म कर क्रंक्रीट के जंगल बसाते गए। यह नहीं सोचा कि गौरैया ही नहीं अन्य चिड़ियां कहां रहेंगी। अपार्टमेंट संस्कृति बढ़ गई। ऐसे में चिड़ियों ना घोसले बनाने की जगह रही और ना ही छांव। प्रदूषण इतना बढ़ गया कि मनुष्य का सांस लेना दूभर हो रहा तो पक्षियों का क्या हाल होगा? बहरहाल अब लोगों में जागरुकता पैदा हो रही है। लोग गौरैया के बारे में सोच रहे हैं। यही कारण है कि गौरैया का कुनबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

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परिवार के सदस्य की तरह माने गौरैया को

एडिशनल एसपी (भर्ती बोर्ड) रश्मि ने अपने में गौरैया के अनुकूल वातावरण तैयार किया है। पेड़ों और छांव वाली जगह दीवारों पर गौरैया के लिए बर्ड हाउस टांगे हैं। पेड़ों की छांव में मिस्टी के बरतन टांगे हैं। इनमें वह चिड़ियों के लिए दाना और पानी रखती हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां इतनी चिड़ियां आती हैं कि सुबह से लेकर शाम तक चिड़ियों की चहचहाट रहती है। गौरैया लॉन से लेकर दरवाजे तक फुदकती रहती हैं। अब लोगों में गौरैया के लिए प्यार भी खूब उमड़ा है। यह ऐसे ही बरकरार रहना चाहिए। गौरैया का कुनबा धीरे-धीरे बढ़ता रहेगा।

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लखनऊ में गौरैया की संख्या में हुआ इजाफा

वर्ष गौरैया की संख्या

2013 2503

2014 3362

2015 5637

2016 6034

2017 7074

2018 8654

2019 11675

2020 15324

2021 15520

2022 16103

(आंकड़े लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित ओएनजीसी सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज इंस्टीट्यूट ऑफ वाइल्डलाइफ साइंसेज के हैं।

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ऐसे बढ़ेगा गौरैया का कुनबा

- उनके लिए घरों में ऐसे स्थानों पर बर्ड हाउस टांगे जहां धूप और बरसात का पानी ना आता हो

- बर्ड हाउस सात-आठ फुट की ऊंचाईं पर टांगे

- पेड़ों की छांव में मिट्टी के बरतन में पानी और दाना रखें

- जहां बर्ड हाउस हो या दाना-पानी रखा हो वहां शोर ना हो

- चिड़िया ने अण्डे दिए हैं तो उसके घोसले के पास ना जाएं

- छांव का इंतजाम करें

- खाने के लिए बाजरा, काकून, चावल की कनकी, सूखी दलिया आदि दें

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फोटो

गौरैया दिवस पर बच्चे और विद्यार्थी करेंगे चिड़ियाघर की मुफ्त सैर

लखनऊ। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में रविवार को गौरैया जागरुकता अभियान शुरू हुआ। पहले दिन चिड़ियाघर में बच्चों की पोस्टर और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर एडीसीपी चिरंजीव नाथ सिन्हा और उनके मित्र तनुश्री, ऋतुराज रस्तोगी,राजेश चौरसिया राम गोयल उवैस ने चिडिय़ाघर में बच्चों के नि:शुल्क प्रवेश और भ्रमण के लिए 51000 रुपए प्रदान किए। कोई भी समूह अथवा स्कूल इस पैसे से फ्री टिकट लेकर बच्चों और विद्यार्थीगण को चिडियाघर की सैर करा सकते हैँ ।

चिड़ियाघर के मुख्य द्वार पर एक स्टाल लगाया गया। इसका उद्घाटन चिड़ियाघर के निदेशक विष्णुकांत मिश्रा ने किया। इस स्टाल पर लोगों को गौरैया संरक्षण के प्रति जागरुक किया गया। साथ ही घोंसले ,पानी और चारे के लिए मिट्टी के बर्तन, गौरैया आहार और ऐसे पौधों का वितरण किया गया।

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