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भक्ति संगीत प्रस्तुति

भक्ति रस की सुरधारा से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद व संस्कृति विभाग की ओर से शुक्रवार की शाम 'क्षितिज श्रृंखला' के तहत राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में भक्ति संगीत संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य कलाकार अमित व संध्या मुखर्जी थे। दोनों कलाकारों ने भातखंडे संगीत संस्थान से संगीत की विधिवत शिक्षा ली है। साथ ही उस्ताद गुलशन भारती से गजल की बारीकियां भी सीखी हैं।

रिमझिम बरसात की झड़ी के बीच कार्यक्रम शुरू हुआ गणेश स्तुति 'जय गणेश देवा...' से। इसके बाद 'कोई जानेगा जानन हारा...', 'अलख जगा के जोगी आयो...', 'सांसों की माला पे...', 'ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन...', 'चदरिया झीनी रे झीनी...', 'निधिपति सांईराम प्रतिनिधि नर...', 'शिव जी बिहाने चले पालकी सजाई के...', 'राम नाम ही सत्य जगत में...', 'राम नाम अति मीठा है कोई गाके देख ले...', 'बण गई रे बण गई तेरी...', 'छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...' से होते हुए यह भक्ति रसधार पहुंची 'ऊँ नम: शिवाय...' के जाप तक और शाम की आखिरी प्रस्तुति थी 'कोई बोले राम राम कोई खुदाए...'। कलाकारों के साथ तबले पर सत्यम शिवम सुन्दरम सिंह, ढोलक पर दिलीप त्रिवेदी, सिंथेसाइजर पर विजय सैनी, बैंजो पर सोनू, ऑक्टोपैड पर कृष्ण स्वरूप श्रीवास्तव ने संगत की। मंच संचालन सीमा भारती का था।

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