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मैंने कहा था न पदक जीतूंगी, देखो जीत लिए

एपी सेन गर्ल्स इण्टर कॉलेज में 12वीं की पढ़ाई कर रही प्रियंका हजरतगंज चौराहे पर स्थित इलाहाबाद बैंक के पास चाय के ठेले पर हाथों में चमचमाते पदक लेकर पहुंचती हैं। तभी चाय बना रहे अनिल कुमार सबकुछ छोड़ प्रियंका को गले लगा लेते हैं। प्रियंका कहती हैं कि ‘देखो...मै जीत लाई पदक। मैंने कहा था न कि एक दिन मैं पदक जीतूंगी...जीत लिए न...।’ अनिल अपने हाथ में प्रियंका के जीते हुए पदक और सर्टिफिकेट देखते हैं और ठेले के किनारे खड़े सभी लोगों को मुफ्त में चाय पिलाते हैं। बिस्कुट भी खिलाने लगे।
अनिल कुमार तेलीबाग मे रहते हैं। बचपन से ही उनकी बेटी प्रियंका को खेलने का शौक था। वह घर से थोड़ी दूर निलमथा खेलने जाने लगे। तभी उनकी मुलाकात कुश्ती कोच रिजवान से हुई। रिजवान पिछले तीन वर्षों से प्रियंका को कोचिंग दे रहे हैं। प्रियंका नियमित ट्रेनिंग करती हैं। प्रियंका के पिता हजरतगंज में ठेले पर चाय बेचते हैं। बेटी की इच्छा को देखते हुए उन्होंने  प्रियंका को कभी खेलने से मना नहीं किया। उन्होंने प्रियंका के लिए कुश्ती लड़ने वाली कास्ट्यूम खरीदी। जूते खरीदे। पिछले दो वर्षों में प्रियंका ने जिला स्कूली प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन उसका चयन मण्डल स्तर पर नहीं हुआ।
इस बार हुई जिला विद्यालयी प्रतियोगिता में प्रियंका ने 45 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। मण्डलीय प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीता। मण्डल प्रतियोगिता में अव्वल रहने पर प्रियंका चयन मण्डलीय टीम में हो गया। वह अब राज्य विद्यालयी प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। जो मेरठ में होगी। सत्तरह वर्षीय प्रियंका बताती हैं कि उनके पिता अनिल कुमार और मां सांवरी देवी बहुत सहयोग करते हैं। खेलने के लिए खूब बढ़ावा देते हैं। 
प्रियंका कहती हैं कि साल उनकी 12वीं की बोर्ड की परीक्षा है। इसके  बाद वह कुश्ती को गंभीरता से लेंगी। भारतीय खेल प्राधिकरण के लखनऊ सेंटर में कुश्ती खेल होता है। वहां के लिए ट्रायल देंगी। वह इतनी मेहनत करना चाहती हैं कि साक्षी मलिक, गीता फोगट व विनेश फोगट की तरह देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकें।

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  • Web Title:I said will win a medal look for victory