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5 दिसंबर, 2020|12:59|IST

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खामोश हुई घंटाघर के घंटों की आवाजें, चाबी भरने वाला कर्मचारी गायब

मंगलवार से चालू होगी घंटाघर की घड़ी

काफी समय से बंद है एतिहासिक घंटाघर की घड़ी

हुसैनाबाद स्थित एतिहासिक घंटाघर पर लगी घड़ी की सुईयां पिछले कई महीनों से रूकी हुई है। अभी पिछले साल ही आठ लाख रूपए की लागत से घंटाघर की घड़ी बनाई गई थी लेकिन बनने के बाद से ही आए दिन ये बंद हो जाती थी। दूरदराज से आए पर्यटकों भी काफी निराशा हो रही है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि घंटाघर में लगी घड़ी की चाबी भरने वाला कर्मचारी काफी समय से बीमार है। इसकी वजह से घड़ी नहीं चल रही थी। एक से दो दिन में घड़ी चलती हुई नजर आएगी।

लखनऊ का एतिहासिक घंटाघर देश के सबसे ऊंचे घंटाघर में शुमार किया जाता है। इसका निर्माण साल 1887 में अवध के नवाब नसीरूद्दीन हैदर ने कराया था। इस घंटा की ऊंचाई 221 फुट है। पिछली सरकार में एतिहासिक हुसैनाबाद को संवारने के दौरान घंटाघर में 8 लाख रूपए से घड़ी बनवाई गई थी। बाकायदा इसको बनाने के लिए विदेश से लोग आए थे। घड़ी बनने के कुछ दिन बाद ही रूक गई थी। हुसैनाबाद ट्रस्ट ने इससे फिर से सही कराया था। कुछ महीने चलने के बाद फिर से काफी से घड़ी की सुईयां थम गई है। वहीं, इस एतिहासिक इमारत को देखने के लिए दूर दराज से सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे में घड़ी की खामोशी उनको काफी अखरती है। रोजाना यहां पर करीब एक हजार से अधिक लोग बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, घंटाघर और पिक्चर गैलरी घूमने के लिए आते हैं।

आज चालू होने की उम्मीद

हुसैनाबाद ट्रस्ट के सचिव नासिर नकवी ने बताया कि मंगलवार से घड़ी चालू हो जाएगी। घड़ी में किसी तरह की खराबी नहीं आई है। इसमें सप्ताह में एक बार चाबी भरी जाती है। चाबी भरने वाला कर्मचारी बीमार था। इसलिए घड़ी कुछ समय के लिए बंद हो गई थी जो कल से शुरू हो जाएगी।