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नेशनल में होटल और हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोर्स होंगे शुरू

लखनऊ, संवाददाता। नेशनल पीजी कॉलेज में इसी सत्र से स्नातक स्तर पर होटल और

नेशनल में होटल और हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोर्स होंगे शुरू
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊTue, 14 May 2024 08:05 PM
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लखनऊ, संवाददाता।

नेशनल पीजी कॉलेज में इसी सत्र से स्नातक स्तर पर होटल और हॉस्पिटल प्रबंधन पर वोकेशनल कोर्स शुरू किया जाएगा। आगामी सत्र 2025-26 से वनस्पति विज्ञान और पर्यावरणीय अध्ययन में एमएससी पाठ्यक्रम की भी पढ़ाई आरंभ की जा सकेगी। यह फैसला कॉलेज में मंगलवार को आयोजित एकेडमिक काउंसिल में सर्वसम्मति से लिया गया।

प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेज में पीजी स्तर पर सत्र 2025-26 से दो नए पाठ्यकम एमएससी बॉटनी और एमएससी एनवायरमेंटल स्टडीज पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रक्रिया आंरभ की जाएगी। इसी तरह सत्र 2024-25 से यूजीसी की स्किल आधारित रोजगार परक पाठ्यकम शुरू करने की योजना के तहत बैचलर ऑफ वोकेशनल इन होटल मैनेजमेंट और बैचलर ऑफ वोकेशनल इन हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोर्स शुरू किए जाएंगे। प्राचार्य का कहना है कि वोकेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को छह माह का सर्टिफिकेट पूरा करने के बाद स्टाइपेन्ड पर इन्टर्नशिप की भी सुविधा मिलेगी। इसके लिए कई संस्थानों के साथ एमओयू साइन किए जाएंगे।

प्राचार्य प्रो. डीके सिंह बताते हैं कि एकेडमिक काउन्सिल की बैठक में आगामी सत्र के लिए छात्रहित में बीवाक साफ्टवेयर डेवलपमेन्ट एंड ई-गवर्नेस पाठ्यकम में आंशिक बदलाव किया गया।

परीक्षा अध्यादेश पास किया गया

प्राचार्य प्रो. देवेंद्र सिंह कहते हैं कि नेशनल पीजी कॉलेज ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने लिए एनईपी 2020 अध्यादेश के तहत कई बदलाव किए हैं। जो आगामी सत्र से लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक परीक्षा अध्यादेश पास किया गया है। जिसके तहत छात्रों को प्रमोशन के नियमों में ढील दी गई है। अब विद्यार्थी मेजर विषय में सेमेस्टर परीक्षा के आधे पेपर में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक पाता है और वह कुल औसत अंक का 40 प्रतिशत होता है तो उसे अगले सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा। प्राचार्य ने बताया कि कॉलेज परीक्षा परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश करेगा। इससे छात्रों को आगे की योजना बनाने में आसानी होगी।

अब आंतरिक मूल्यांकन को मिलेगा महत्व

नए अध्यादेश के तहत पारंपरिक परीक्षाओं के साथ आंतरिक मूल्यांकन को भी अधिक महत्व दिया जाएगा। इसमें असाइनमेंट, प्रोजेक्ट कार्य, कक्षा भागीदारी और सेमिनार जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।

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