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रिसर्च के लिए विदेश जा सकेंगे होम्योपैथिक डॉक्टर

- आयुष विभाग उठाएगा रिसर्च करने जाने वाले डॉक्टरों का खर्चा - अच्छे रिसर्च होने से आयुर्वेद के मरीजों को मिलेंगी बेहतर दवाएं और इलाज लखनऊ। विपुल शर्मा होम्योपैथिक के प्रदेश भर के डॉक्टर रिसर्च के लिए अब विदेश जा सकेंगे। इसमें आने वाले पूरे खर्च को आयुष विभाग उठाएगा। होम्योपैथिक विधा के प्रति लोगों में विश्वास और विधा को आगे बढ़ाने के लिए आयुष विभाग लगातार प्रयासरत है। विभाग के अधिकारियों की माने तो अच्छे रिसर्च होने से आयुर्वेद के मरीजों को बेहतर दवाएं और इलाज मिल सकेगा। इससे होम्योपैथिक के छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सकेगा। 250 से अधिक डॉक्टर प्रदेश भर में लखनऊ, कानपुर, अंबेडकर नगर, इलाहाबाद, गाजीपुर, बांदा समेत सात होम्योपैथिक सरकारी कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में 80 से अधिक स्थायी के अलावा संविदा व गेस्ट शिक्षक में करीब 150 से अधिक डॉक्टर हैं। इन सभी कॉलेजों में डॉक्टर रिसर्च करते हैं। इन सभी डॉक्टरों को विदेश में जाकर रिसर्च करने का लाभ मिल सकेगा। उन्हें रिसर्च करने जाने के लिए रहने, खाने व यात्रा किराया आदि दिया जाएगा। रिसर्च से यह होगा फायदा होम्योपैथिक विभाग के डॉक्टरों के विदेश में रिसर्च करने जाने से सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। रिसर्च भी बेहतर किए जा सकेंगे। जिससे दवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और नई बीमारियों का भी पता चल सकेगा। दूसरे राज्य में जाएंगे छात्र डॉक्टरों के विदेश रिसर्च पर जाने की सुविधा के अलावा मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी इसका लाभ मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों में बनी सरकारी व निजी दवा कंपनियों की लैब में छात्र शिक्षा प्राप्त करने जा सकेंगे। उनका भी खर्च होम्योपैथिक विभाग ही उठाएगा। वर्जन उत्तर प्रदेश में सरकारी होम्योपैथिक कॉलेजों के डॉक्टर रिसर्च करने के लिए विदेश जा सकेंगे। आयुष विभाग के सचिव मुकेश मेश्राम ने होम्योपैथिक से मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। रिसर्च के लिए विदेश जाने से नई तकनीकी व दवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी। डॉ. विजय पुष्कर, संयुक्त निदेशक, होम्योपैथिक विभाग

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  • Web Title:homeopathic doctors research