DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खुद की जिंदगी खतरे में डाल बचा रहे मरीजों की जान

खतरों में खुद को डालकर जिंदगी बचाने वाले।

ऐसे डॉक्टरों पर रिपोर्ट, जो पाजिटिव मरीजों की सर्जरी स्वेच्छा से कर रहे हैं।

उनके जज्बे की सराहना करती रिपोर्ट।

अब तक कितनी सर्जरी की। उनके कितनी प्लांड सर्जरी थीं।

साथ में

ऐसी सर्जरी में क्या-क्या एहतियात बरतते हैं डॉक्टर।

लखनऊ। निज संवाददाता

उनमें जज्बा है, जुनून है। लक्ष्य भी तय कर रखा है, एचआईवी के खात्मे का। बस इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ जुटे हुए हैं। वह खून की जांच से लेकर ऑपरेशन तक कर रहे हैं। संसाधनों की कमी भी आड़े नहीं आती है। डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ का कहना है कि सावधानी बरतकर उपलब्ध संसाधनों के साथ मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। जांच व ऑपरेशन कर मरीजों को जिंदगी दी जा रही है।

लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों के इलाज में खास सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि संक्रमित मरीज के संपर्क में आने से बीमारी हो सकती है। ग्लब्स व किट आदि का इस्तेमाल कर संक्रमित मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है।

बलरामपुर अस्पताल की पैथोलॉजी विभाग में तैनात लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार बताते हैं कि खून की जांच में संक्रमण का पता लगाया जाता है। सभी तरह के ऑपरेशन में एचआईवी की जांच जरूरी है। खून का नमूना लेते वक्त टेक्नीशियन को खास ख्याल रखना पड़ता है। क्योंकि कौन मरीज संक्रमित है कौन नहीं? इसकी जानकारी किसी को नहीं होती है। जरा सी सुई चुभने से टेक्नीशियन भी संक्रमण की जद में आ सकता है।

केजीएमयू के जनरल सर्जरी के सर्जन डॉ. विनोद जैन बताते हैं कि किसी भी संक्रमित मरीज के हर प्रकार के ऑपरेशन किए जाते हैं। इसमें किडनी स्टोन, मोतियाबिंद, गॉलब्लेडर स्टोन आदि शामिल है। इस बात का भय रहता है कि डॉक्टर या स्टॉफ को संक्रमण न हो। इसलिए अपारगम्य गाउन, जूते, डबल ग्लब्स पूरे स्टाफ द्वारा पहना जाता है। यदि संक्रमित खून किसी डॉक्टर या कर्मचारी के शरीर पर पड़ जाता है तो पोस्ट एक्पोजर प्रोफाइल बचाव के तहत तुरंत दवाइयां ली जाती हैं।

केजीएमयू एआरटी के डॉ. सौरभ पॉलीवॉल बताते हैं कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ द्वारा मरीज के इलाज के समय यूनिवर्सल वर्क्स प्रिकॉशन का खास ध्यान रखा जाता है। किसी भी संक्रमित मरीज को देखने से पहले ग्लब्स, एप्रिन, गूगल्स, मॉस्क आदि पहनना बहुत जरूरी होता है। हम लोग एआरटी सेंटर पर भी एचआईवी मरीजों को देखने, दवा देने और बातचीत करने के दौरान विशेष ध्यान देते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hiv