Hindi Diwas: Desi lyrics in Hindi films - Hindi Diwas : हिंदी फिल्मों में देसी बोल पर तालियों की गूंज DA Image
12 दिसंबर, 2019|11:34|IST

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Hindi Diwas : हिंदी फिल्मों में देसी बोल पर तालियों की गूंज 

सिनेमाघरों में देसी संवाद पर गूंजने वाली दर्शकों की तालियां बताती हैं कि अब भी उन्हें अपनी भाषा और बोली से बेहद प्यार है। दरअसल हिंदी फिल्मों में स्थानीय बोलियों को जगह देकर रचे गए संवाद युवाओं में हिंदी को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। 

इन संवादों में अंग्रेजी के भी शब्द शामिल हैं और इन्हें बोलने वाले अदाकार स्थानीय लहजे को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। फिर चाहे वह रांझणा में धनुष की बनारसिया हिंदी हो या दम लगाके हईशा में हरिद्वार के लहजे में कलाकारों का बात करना। 
एक बानगी देखिए: ...लगता है तुमने कॉस्परोव की स्टडी नहीं पढ़ी वरना मैं वजीर का सैक्रिफाइस शराब पीकर भी नहीं करता।  

इस संवाद के साथ ही पूरा सिनेमाघर तालियों से गूंज उठता है। ये संवाद यूपी की देसी भाषा की बानगी है। संवाद फिल्म छिछोरे का है जिसे बोला है सहर्ष कुमार शुक्ला ने। सहर्ष यूपी से हैं। हिंदी में पढ़ाई की। हिंदी रंगमंच किया। 

एक और बानगी है इस साल की ब्लॉकबस्टर फिल्म केजीएफ की। केजीएफ के हिंदी संवाद लखनऊ के मयंक सक्सेना ने लिखे हैं। मयंक  और सहर्ष उसी परिपाटी को आगे बढ़ा रहे हैं जिसे हिमांशु शर्मा, वरुण ग्रोवर, प्रसून जोशी जैसे फनकारों ने शुरू किया। हिंदी को नए कलेवर में फिल्मों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने की परिपाटी। 

बॉलीवुड में हिंदी
हिंदी में नए शब्द शामिल हो रहे हैं। तमाम तरह के डायलेक्ट और एक्सेंट सामने आ रहे हैं। दम लगाके हईशा में आपको हरिद्वार का लहजा मिलेगा तो तनु वेड्स मनु में लखनवी लहजा। हिंदी तरक्की तभी करेगी जब वह शुद्धतावाद से निकलेगी और नए शब्दों को स्वीकार करेगी। मयंक सक्सेना, संवाद लेखक, केजीएफ और पहलवान 

हिंदी जानने का फायदा यह है कि कहानी और ्क्रिरप्ट अच्छे से समझ पाता हूं और ठीक से काम कर पाता हूं। सहर्ष कुमार शुक्ला, सहर्ष ने छिछोरे, रंगून, तलवार जैसी फिल्मों में काम किया है। 

लखनऊ के युवा सितारे
’ मयंक सक्सेना, संवाद लेखक, केजीएफ-हिंदी ’ हिमांशु शर्मा, लेखक, तनु वेड्स मनु, रांझणा ’ वरुण ग्रोवर, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित लेखक, गीतकार ’ अमिताभ भट्टाचार्य, गीतकार 

लखनऊ में बनीं फिल्में
 आर्टिकल 15
  जॉली एलएलबी 2
 गुलाबो सिताबो
  प्रस्थानम
 बरेली की बर्फी
 तनु वेड्स मनु

शूटिंग के फायदे
  स्थानीय लोगों को काम मिल रहा है
  लखनऊ का टैलेंट बड़े पर्दे पर दमक रहा 
 टूरिज्म बढ़ रहा  
संस्कृति फैल रही

सोशल मीडिया ने हिंदी लिखने और हिंदी में परफॉर्म करने वालों के लिए  नई राहें खोली हैं। हिंदी के लेखक अब प्रकाशक के मोहताज नहीं। वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी कहानी, कविता पाठकों तक पहुंचा सकते हैं। यकीनन इससे उनकी लोकप्रियता को विस्तार मिला है।

हिमांशु बाजपेयी, दास्तानगो 

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