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हिन्दी दिवस 2019 : तकनीक से रोजगार की भाषा बन रही हिंदी

हिन्दी दिवस 2019 : तकनीक से रोजगार की भाषा बन रही हिंदी

संक्षेप:

तकनीकी क्रांति से हिंदी के व्यावहारिक और रोजगारपरक भाषा न होने की बाधा दूर हो गई है। शिक्षा, चिकित्सा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में हिंदी की ऑनलाइन सामग्री ने महानगरों ही नहीं छोटे-शहरों-कस्बों के...

Sep 14, 2019 10:52 am ISTDeep Pandey हिन्दुस्तान टीम, लखनऊ।
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तकनीकी क्रांति से हिंदी के व्यावहारिक और रोजगारपरक भाषा न होने की बाधा दूर हो गई है। शिक्षा, चिकित्सा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में हिंदी की ऑनलाइन सामग्री ने महानगरों ही नहीं छोटे-शहरों-कस्बों के बच्चों और युवाओं को प्रतिस्पर्धा में ला दिया है। आज बाजार में एजुकेशन लर्निंग एप और मेडिकल लर्निंग एप की बाढ़ आ चुकी है। ये एप हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध करा  रहे हैं। ई-कॉमर्स क्षेत्र के दिग्गजों ने भी हिंदी में एप लान्च कर माना है कि बाजार बढ़ाने के लिए उसकी कितनी अहमियत है।

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चिकित्सा शिक्षा-परामर्श क्षेत्र में बढ़ी धमक
मेडिकल एजुकेशन क्षेत्र में तकनीकी क्रांति के बाद हिंदी में भी ऑनलाइन पठन-पाठन सामग्री तेजी से बढ़ रही है। एम्स जैसे बड़े अस्पताल अब प्रशासनिक कार्यों में हिंदी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श देने वाले एप डॉकप्राइम, हैलोहेल्थ ने हिंदी के जरिये मरीजों, डॉक्टरों और विशेषज्ञों को जोड़ा है। मेडिकल न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. विश्वरूप चौधरी का कहना है कि ऑनलाइन चिकित्सा सामग्री में अभी भी हिंदी का इस्तेमाल एक-दो फीसदी तक पहुंचा है। 

दवा के दुष्प्रभाव की जानकारी मिल रही
ऑनलाइन कंपनियां हिंदी में दवा के असर और दुष्प्रभाव की जानकारियां दे रही हैं। सरकार को दवाओं के पैकेट पर उत्पादन तिथि, समाप्ति अवधि आदि जानकारी हिंदी में प्रकाशित करना अनिवार्य करना चाहिए। करीब 150 के करीब दवाएं और 200 के करीब बीमारियां हैं, जिनकी हिंदी में पहुंच मुहैया करा दी जाए तो दवाओं के दुष्प्रभाव के मामले 50%तक कम किए जा सकते हैं।

पढ़ाई-लिखाई और कोचिंग हिंदी एप पर
भारत जैसे विशाल देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी को डिजिटल एजुकेशन ने तेजी से पाटा है। नेक्स्ट एजुकेशन, वेदांतू, काहूट, आवाज जैसे एप हिंदी में सामग्री मुहैया करा रहे हैं। बायजू भी इस साल के अंत तक हिंदी भाषा में वीडियो सामग्री पेश करेगी। 

ई कॉमर्स बाजार को भी लुभाया
भारतीयों में स्मार्टफोन की बढ़ती ललक को देखते हुए ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों फ्लिपकार्ट, अमेजॉन ने हिंदी में भी एप लॉन्च कर दिया है। पांच लाख से ज्यादा डिजिटल किताबों वाले अमेजॉन के किंडल लाइट एप पर ही 30 हजार से ज्यादा किताबें ऑनलाइन पढ़ी जा सकती हैं। फ्लिपकार्ट ने भी हिंदी में खरीदारी आसान बनाने को एप और वेबसाइट लॉन्च की है। 

दूरदराज के स्कूलों को मिल रहा फायदा
दूरदराज के स्कूल जो ऊंचे वेतन के शिक्षक नहीं रख सकते, वे भी स्मार्ट क्लास के माध्यम से हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल तरीके से अपने बच्चों को बड़े स्कूलों जैसे प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्र के छात्रों के लिए भी हिंदी में ऐसा कंटेट टेक एजुकेशन कंपनियां अपना रही हैं। लर्निंग प्लेटफॉर्म कैटालिस्ट के सीईओ एएस पंडित का कहना है कि 22 बड़ी भारतीय भाषाओं में हिंदी ही एकमात्र भाषा है, जिसे बाइलिंग्युअल माध्यम के रूप में स्कूली पाठ्यक्रम में तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है। 

ऑडियो वीडियो विजुअल में प्रयोग 
हिंदी में कहानियां, चुटकुले, समाचार, संगीत सुनाने और दिखाने वाले ऑडियो-विजुअल एप भी बाजार में छा चुके हैं। ऑडियो-विजुअल एप हिंदी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। ये एप यूजर को खुद कंटेट देने और पैसा कमाने का मौका भी देते हैं। वीडियो एप टिकटॉक, लाइक से हिंदी में कंटेंट डालकर यूजर हर माह हजारों कमा रहे हैं।  

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey
दीप नरायन पांडेय, डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में 13 साल से अधिक का अनुभव। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में कार्यरत रहे। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में हैं। राजनीति के साथ क्राइम और अन्य बीटों पर काम करने का अनुभव। और पढ़ें

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