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यहां तो मौत के साये में जिंदगी का कखग पढ़ रहे देश के भविष्य 

यहां तो मौत के साये में जिंदगी का कखग पढ़ रहे देश के भविष्य 

1 / 3यहां तो मौत के साये में जिंदगी का कखग पढ़ रहे देश के भविष्य 

यहां तो मौत के साये में जिंदगी का कखग पढ़ रहे देश के भविष्य 

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3 / 3यहां तो मौत के साये में जिंदगी का कखग पढ़ रहे देश के भविष्य 

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बेसिक शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बीच भारी बारिश ने सारी पोल खोल दी है। जिले के कई ब्लाकों में बेहद जर्जर स्कूलों में बच्चे जिंदगी का कखग पढ़ने को मजबूर हैं। यहां तक कि शिक्षक तक इन स्कूलों में पढ़ाने से खौफ खाते हैं। सर्व शिक्षा अभियान में सुविधाओं और संसाधनों का ढिंढोरा पीटने वाले जिम्मेदारों को ये स्कूल नजर नही आते हैं। कहने को तो डीएम भी दौरे पर दौरे करते फिर रहे हैं लेकिन उन्हें भी यह बदहाली अभी तक दिखाई नही पड़ी है। 
इटियाथोक ब्लाक में बरसात से प्राथमिक विद्यालय छतों में दरारें आ गयी हैं। अध्यापक इनमें बच्चों को बैठाने से डरने लगे हैं। प्राथमिक विद्यालय रानीपुर के प्रधानाध्यापक कुलदीप यादव ने बताया कि बरामदे से प्लास्टर गिर गया जिससे उसकी सरिया दिखने लगी है। उन्होंने ने बताया कि कई बार सूचना दी गई है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है जबकि इस विद्यालय में 119 बच्चे और चार अध्यापक कार्यरत हैं।
1973 में बना ये विद्यालय 
 यह 1973 का बना हुआ विद्यालय है। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय पारासराय का छत जर्जर हो चुकी है। इसमें बच्चों को बैठाना जान जोखिम में डालना है। यहां पर 100 बच्चे पंजीकृत है। प्रभारी प्रधानाध्यापक राजीव कुमार मिश्र ने बताया कि बच्चों के साथ कमरे में बैठे पढ़ा रहे थे तभी छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया। गनीमत यह रही कि किसी को चोट नहीं लगी। यहां चार अध्यापक कार्यरत हैं। यह स्कूल सन उन्नीस सौ पचासी में निर्मित हुआ था । तब से बिना मरम्मत के चल रहा है। प्राथमिक विद्यालय विनोहनी की छत लटक गई है और भरभराकर गिर जाने की आशंका है। यह भवन 1984 का बना हुआ है और यहां 86 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। तीन शिक्षक भी कार्यरत हैं। प्राथमिक विद्यालय तेलियानी कानूनगो का बरामदा एक वर्ष पूर्व धराशायी हो गया है। तबसे वैसे ही पड़ा है और किसी बड़े घटना के बाद ही कार्यवाही का इंतजार किया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय गजाधर पुर के छत से प्लास्टर गिर गया और केवल ढांचा बचा है वह भी कब गिर जाय पता नहीं। इसी प्रकार बरदांड, मध्य नगर, मेहनौन, लालपुर, विशुनपुर माफी, पृथ्वी पाल गंज ग्रंट, नये गांव, कुंदेरवा, जंहदरिया, बेलभरिया सहित अन्य विद्यालयों का भवन जर्जर है। इन स्कूलों में कभी भी दुर्घटना हो सकती है। खंड शिक्षा अधिकारी रामराज ने बताया कि जर्जर विद्यालयों की सूची विभाग को मरम्मत के लिए उपलब्ध करा दी गई है। अब विद्यालयों का मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दे दी गई है।
पहले इन पर थी जिम्मेदारी :
 स्कूल भवन निर्माण प्रभारी निर्माण वर्ष से 15 वर्ष तक के लिए जिम्मेदार होता है। जिसने निर्माण कराया है यदि पन्द्रह वर्ष के भीतर भवन जर्जर हो गया है तो उसे मरम्मत कराना चाहिए। उसके बाद विभाग की जिम्मेदारी हो जाती है। विगत वर्ष से विद्यालय के रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दे दी गई है।
स्कूलों में हुआ जल भराव :
लगातार बरसात होने से विद्यालय में जलभराव हो गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय इंटियाथोक के प्रांगण में जलभराव हो जाने से बच्चों को विद्यालय आने में कठिनाई हो रही है। प्राथमिक विद्यालय भटपुरवा इंटियाथोक रूदापुर सरकांड अर्जुन पुर कोल्हुवा में बरसात का पानी भर गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय ज्वालापुरवा और तेलियानी के प्रांगण में भी जल भराव हो जाता है क्योंकि पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

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  • Web Title:Here is the future of the country reading the book of life in the shadow of death