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पीजीआई के डॉक्टर ने तैयार किया हार्ट सेफ इंडिया एक्ट, कार्डियक अरेस्ट से बच्चों को बचाएगा

पीजीआई के डॉक्टर ने तैयार किया हार्ट सेफ इंडिया एक्ट, कार्डियक अरेस्ट से बच्चों को बचाएगा

संक्षेप:

Lucknow News - सुशील सिंहपीजीआई ने अमेरिका की मदद से स्कूली बच्चों में अचानक ह्दय गति रुकने से होने वाली मौतें रोकने का राष्ट्रीय मसौदा ‘हार्ट सेफ इंडिया एक्ट’ तैय

Jan 31, 2026 05:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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सुशील सिंह पीजीआई ने अमेरिका की मदद से स्कूली बच्चों में अचानक ह्दय गति रुकने से होने वाली मौतें रोकने का राष्ट्रीय मसौदा ‘हार्ट सेफ इंडिया एक्ट’ तैयार किया है। डॉक्टरों ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) को पाठ्यक्रम में शामिल करने का मसौदा केंद्र सरकार को भेजा है। ये स्कूलों में अचानक कार्डियक अरेस्ट से होने वाली बच्चों की मौत से बचाएगा। ये राष्ट्रीय मसौदा पीजीआई कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आदित्य कपूर ने अमेरिका के कैनसास सिटी हार्ट रिदम इंस्टीट्यूट की मदद से तैयार किया है। इस प्रस्ताव को अन्तरराष्ट्रीय इंडियन पेसिंग एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी जर्नल ने मान्यता दी है। डॉ. आदित्य कपूर के मुताबिक सडन कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है।

बच्चा व बड़ा कुछ ही सेकंड में बेहोश होकर गिर जाता है। यदि चार से पांच मिनट के भीतर मदद न मिले। तो ये जानलेवा या दिमाग को स्थायी नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष करीब सात लाख लोग सडन कार्डियक अरेस्ट से जान गंवा देते हैं। यह मौतें अक्सर घरों, सड़कों, दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर होती हैं। जहां न डॉक्टर होते हैं और न ही तुरंत चिकित्सा सुविधा। इन मौतों में से बड़ी संख्या को सिर्फ समय पर सीपीआर देकर रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से पीजीआई ने ये राष्ट्रीय प्रस्ताव हार्ट सेफ इंडिया एक्ट तैयार किया है। इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में सीपीआर और ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) की ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाने की मांग की है। ताकि समय रहते मौतों का आंकड़ा कम किया जा सके। सीपीआर से जान बचने की संभावना दो गुनी ज्यादा डॉ. आदित्य कपूर बताते हैं कि सीपीआर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक ऐसी इमरजेंसी तकनीक है। इसमें छाती को दबाकर दिल और दिमाग तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखा जाता है। यदि एक से दो मिनट के भीतर सीपीआर मिल जाए। तो बचने की संभावना दोगुनी हो जाती है। जबकि हर मिनट की देरी से जीवित बचने की संभावना 7-10 फीसद कम हो जाती है। 10 मिनट के बाद दिमाग स्थायी रूप से खराब हो सकता है। क्या है हार्ट सेफ इंडिया एक्ट: डॉ. आदित्य कपूर के मुताबिक हार्ट सेफ इंडिया एक्ट एक प्रस्तावित राष्ट्रीय कानून है। इसका मकसद है कि सीपीआर प्रशिक्षण शिक्षा का हिस्सा बने। मसौदे में कक्षा 6 से बड़ी कक्षाओं के छात्रों को हर साल कम से कम दो घंटे का सीपीआर और एईडी का प्रायोगात्मक प्रशिक्षण दिया जाना,माध्यमिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एईडी मशीन की स्थापना सीपीआर देने वाले छात्रों और शिक्षकों को कानूनी सुरक्षा देना है। इसके अलावा सीपीआर प्रशिक्षकों का प्रमाणन और नियमित प्रशिक्षण। एईडी और प्रशिक्षित लोगों का राष्ट्रीय रजिस्टर इमरजेंसी सेवाओं से जोड़ा जाए। राज्यों के अनुसार भाषा और संस्कृति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार हो। देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में करीब 25 करोड़ छात्र पंजीकृत हैं। जीवित रहने की दर सिर्फ तीन फीसदी डॉ. आदित्य कपूर ने बताया कि भारत में अस्पताल के बाहर होने वाले कार्डियक अरेस्ट (ओएचसीए) के मामलों में जीवित बचने की दर औसतन तीन प्रतिशत है। जबकि विकसित देशों में यह दर 10 से 20 प्रतिशत तक है। देश में सीपीआर की दर सिर्फ 1.3 से 9.8 प्रतिशत है। जबकि विकसित देशों में यह दर 40-70 फीसदी तक है। यहां के लोगों को सीपीआर की जानकारी न होना, कानूनी डर, सांस्कृतिक झिझक और एईडी मशीनों की कमी है। इन देशों में सीपीआर अनिवार्य डॉ. आदित्य ने बताया कि डेनमार्क, नॉर्वे और जापान के स्कूलों में सीपीआर शिक्षा पहले से अनिवार्य है। डेनमार्क में 15 साल में कार्डियक अरेस्ट के बाद बचने की दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई है। नॉर्वे में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग सीपीआर जानते हैं। सीपीआर सिखाना सिर्फ शिक्षा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जीवन रक्षा रणनीति है। यदि यह कानून लागू होता है, तो भारत युवा आबादी को जीवन रक्षक शक्ति में बदल सकता है। इससे हर साल लाखों जानें बचाई जा सकती हैं।

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