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लखनऊ में मिला अपनापन और घर जैसा प्यार: विनेश 

रेसलिंग के सिलसिले में ज्यादातर मुझे घर के बाहर ही रहना पड़ता है। लेकिन जब मैं किसी बाउट में हार जाती हूं तो मुझे घर की सबसे ज्यादा याद आती है। मां से मिलकर मेरी हार का दर्द कम भी हो जाता है। हालांकि इसके बावजूद मुझसे अगर कहा जाए कि कुछ दिन रेसलिंग न करूं तो यह मुझे मंजूर नहीं। इसके आगे कुछ भी याद नहीं रहता। शायद यहीं कारण रहा कि चोट के बावजूद मैंने महिला कुश्ती में शानदार वापसी की। 
ये बातें सरोजनीनगर स्थित साई सेंटर में आयोजित सम्मान समारोह में एशियन गेम्स 2018 में स्वर्ण पदक विजेता विनेश फोगाट ने कही।
लखनऊ को अपना दूसरा घर बताते हुए विनेश ने कहा कि साई सेंटर में आना जाना लगा ही रहता है। अब तो यह मेरे दूसरे घर की तरह हो गया है। यहां के स्टाफ की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया। युवा खिलाड़ियों को सीख देते हुए स्टार पहलवान ने कहा कि मैं वक्त जैसा भी हो उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। 
सोना जीतना लक्ष्य: विनेश ने कहा कि हर खेल में हमेशा में स्वर्ण पदक को ही लक्ष्य बना कर तैयारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जीतने की तैयारी से परिणाम बेहतर आएगा।
रेसलर का रोल करना इतना आसान नहीं: विनेश से जब पूछा गया कि अगर उनके संघर्ष और सफलता पर फिल्म बनती है तो कौन सी अभिनेत्री उनके किरदार के लिए फिट रहेगी। इस पर उन्होंने कहा कि रेसलर का रोल करना इतना आसान नहीं है। मै भी परफेक्ट नहीं हूं। मैंने खुद भी गिनी चुनी फिल्में ही देखी है, लेकिन मेरी कहानी से अगर लोगो को प्रेरणा मिले तो मुझे खुशी होगी। जहां तक मेरे रोल का सवाल है तो मेरी समझ से विनेश के रोल के लिए विनेश ही फिट है। 
एशियाड में  जीतना सपना पूरा होने जैसा: एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली यूपी की दिव्या काकरान ने कहा कि एशियाड में मेडल जीतना किसी सपने को पूरा होने जैसा है। जब मैने मेडल जीता तो एक पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ कि मैने मेडल जीत लिया है। लोगो के प्यार और उम्मीदों की बदौलत ही मै पदक जीत सकी। इस पदक के बाद आत्मविश्वास इतना बढ़ गया है कि मैं आगे ओलिंपक में मै पदक जीत सकती हूं।  

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  • Web Title:Got love like home in Lucknow: Vinesh