DA Image
हिंदी न्यूज़ › उत्तर प्रदेश › लखनऊ › प्रदेश की तीन सबसे प्रदूषित नदियों में गोमती भी
लखनऊ

प्रदेश की तीन सबसे प्रदूषित नदियों में गोमती भी

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Newswrap
Fri, 04 Jun 2021 03:01 AM
प्रदेश की तीन सबसे प्रदूषित नदियों में गोमती भी

गोमती को नाले कर रहे गंदा, हिंडन व काली नदी में फैक्ट्रियों से बढ़ा प्रदूषण

लखनऊ। रामेन्द्र प्रताप सिंह

प्रदेश की 15 बड़ी नदियों में तीन नदियां बेहद प्रदूषित हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन्हें ‘सी श्रेणी में रखा है। इसमें अपनी गोमती भी है। दो अन्य नदियों में हिण्डन और काली नदी है। इन नदियों में जलीव जीवों का जीवित रहना संभव नहीं है। हिण्डन और काली नदी में तो घुलित आक्सीजन है ही नहीं। जबकि गोमती नदी में अभी 0.9 मिलीग्राम आक्सीजन मौजूद है। चार मिलीग्राम से कम आक्सीजन में जलीय जीवों का जीवित रह पाना मुश्किल है।

हिण्डन नदी सहारनपुर, नोएडा, बागपत और मेरठ से होकर निकलती है। चार स्थानों पर मार्च माह में हुई मानीटरिंग का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डाटा जारी किया है। चारों ही स्थानों पर आक्सीजन शून्य मिली है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का रसायनयुक्त पानी पहुंचने से बायोलॉजिकल आक्सीजन डिमांड भी 46 से 68 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। इसकी मात्रा तीन मिलीग्राम से ज्यादा होना ठीक नहीं है। नोएडा में तो सीवर भी बड़ी मात्रा में पहुंच रहा है। यहां पर फीकल कोलीफार्म 11 लाख एमपीएन प्रति 100 एमएल मिला है। इसकी मात्रा 2500 से ज्यादा होना पानी के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। यही हाल काली नदी का है। कन्नौज में घुलित आक्सीजन 7.8 मिलीग्राम पाई गई लेकिन मुजफ्फरनगर में यह घटकर 2 मिलीग्राम पहुंच गई। यहां से आगे बढ़ते ही मुजफ्फरनगर के डाउन स्ट्रीम में आक्सीजन शून्य हो गई। बुलंदशहर में भी आक्सीजन की मात्रा नहीं पाई गई।

गोमती मे नालों ने बढ़ाई मुसीबत

गोमती नदी में गिर रहे 33 नालों ने मुसीबत बढ़ाई है। सीतापुर में आक्सीजन 8.7 मिलीग्राम है। शहर से बाहर गऊ घाट के पास भी आक्सीजन की मौजूदगी 7.1 मिलीग्राम है। लेकिन शहर में प्रवेश करते ही आक्सीजन घटने का क्रम शुरू हो जाता है। गोमती बैराज तक पहुंचते ही आक्सीजन घटकर 0.9 मिलीग्राम हो जा रही है। सरकारी आकड़ों हर दिन 700 एमलएलडी पानी नालों से निकल रहा है। इसमें 400 एमएलडी एसटीपी से शोधित हो पा रहा है। लगभग 300 एमएलडी सीवर नदी में सीधे गिर रहा है। महज दो एसटीपी ही संचालित हैं। इसमें दौलतगंज की क्षमता 56 एमएलडी और भरवारा की क्षमता 345 एमएलडी है।

फीकल कोलीफार्म क्या है

फीकल कोलीफार्म पानी में मौजूद मल-मूत्र की मौजूदगी को दर्शाता है। नदी में इसकी अधिकतम सीमा 2500 एमपीएन (मैक्सिमम प्राबेबल नम्बर) प्रति 100 मिली लीटर होनी चाहिए। इसकी अधिकता से संक्रामक रोग हो सकता है।

जब तक नालों को टैप करके एसटीपी से शोधित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता। इसपर जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं हो पा रहे हैं। आने वाले समय में गोमती का हाल भी हिण्डन और काली नदी जैसा होना तय है।

प्रो. वेंकटेशन दत्ता, पर्यावरण वैज्ञानिक, बीबीएयू

संबंधित खबरें